धमतरी

गांवों में सावन में इतवारी मनाने की परंपरा आज भी कायम
29-Jul-2024 4:47 PM
गांवों में सावन में इतवारी मनाने की परंपरा आज भी कायम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 29 जुलाई। खरीफ फसल के शुरुआती काम धान बोवाई, रोपाई, चलाई जैसे कामों से निवृत्त होकर सावन महीने में इतवारी मनाने की सदियों पुरानी परम्परा आज भी कायम है। शहरों में जिस तरह गुमास्ता एक्ट के तहत सप्ताह में एक दिन कारोबार बंद होता है, ठीक उसी प्रकार ग्रामीण अंचल में भी सावन माह में इतवारी मनाया जाता है।

कुरुद जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत फुसेरा में 28 जुलाई को इतवारी मनाने की शुरुआत की गई। जिसमें सभी किसान अपने खेती किसानी का काम धाम बंद कर एक जगह इक_ा हुए।

सरपंच पूजा साहू ने बताया कि सदियों से चली आ रही यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कायम है। जिसके तहत लोग अपने सभी काम धाम बंद कर रविवार को छुट्टी मनाते है।  जनपद सदस्य लोकेश साहू का कहना है कि इस दिन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा किसान, मजदूर एवं अन्य काम धंधे से जुड़े लोग एक जगह एकत्रित हो कर खेती किसानी, समाजिक एवं पारिवारिक समस्या पर राय शुमारी कर उनका निदान का रास्ता ढुंढते है। ग्राम प्रमुख करणलाल बंजारे, ग्राम पटेल भुलाऊ राम साहू ने बताया कि करीब 6-7 रविवार तक चलने वाले इस सप्ताहिक अवकाश के दिन समाजिक प्रकरण, नशा उन्मूलन, स्वच्छता, पर्यावरण जैसे विषयों पर जनजागृति लाकर ग्राम स्तर पर इन मुद्दों को हल करने का प्रयास किया जाता है।

उप सरपंच तुलसीराम भीमो, पंच राजेश, ओमप्रकाश, परदेशी, प्रमीला साहू, सविता, भोज लहरी, सोमलता, साधना, पुष्पा,चमेली नेताम ने बुजुर्गों द्वारा शुरू की गई इस परम्परा को ग्रामीण व्यवस्था के लिए काफी सहायक बताते हुए कहा कि अतिक्रमण, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं किसी विवादित विषय का सर्वमान्य हल इन बैठक में निकल जाता है। जिससे पंचायत को इन्हें लागू करने में कोई अड़चन नहीं होती। चन्द्रशेखर, राजेन्द्र, दुखूराम, नोहर, संतोष, डोमार आदि गामीणों का मानना है कि इतवारी बैठक में हमें खेती किसानी में होने वाली बीमारियों के नियंत्रण, पानी निकासी, रखवार, राउत लगाने जैसे निर्णय लेने में आसानी होती है। बैठक में लिए गए फैसलों का उलंघन होने पर दंड का प्रावधान होता है। जिससे गांव में अनुशासन कायम रहता है।


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