धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 20 जुलाई। महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर से बरसते पानी के बीच वापस गर्भगृह लौट आए है। विंध्यवासिनी मंदिर स्थित जनकपुर भवन में 19 जुलाई को दोपहर करीब 2.30 बजे तीनों देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद महाआरती हुई। फिर यात्रा प्रारंभ हुई, जो रामबाग, गणेश चौक, सदर बाजार, मठ मंदिर, शास्त्री चौक, सिहावा चौक, बालक चौक होकर वापस जगदीश मंदिर पहुंची।
विधि-विधान से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व बहन सुभद्रा को विराजित किया गया। जगह -जगह लोगों ने परिवार समेत तीनों देवी-देवताओं की आरती की। बरसते पानी के बीच भगवान के रथ को खींचने भक्तों में होड़ रही। गौशाला जनकपुर से लेकर जगदीश मंदिर तक रास्ते भर लोगों को गजामूंग प्रसाद बांटा गया। रथ वापसी के दौरान शहर में पुलिस की तैनाती रही। सदर मार्ग में दोपहर बाद चार पहिया वाहनों की आवाजाही बंद रही।
चूना-गुड़ से बनी मंदिर 13 दशक पुरानी
जानकारी के मुताबिक धमतरी शहर में 116 साल से रथ निकालने की परंपरा चल रही है। करीब 350 साल पहले जगदीश मंदिर में जहां गर्भगृह है, वहां 1908 साल के आसपास शिवलिंग था। लोग इसे शिव मंदिर के नाम से जानते थे। इसी समय भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की मूर्ति लाकर गर्भगृह में स्थापित कराई। साल 1918 में नई मूर्तियां लेकर आए। इसके बाद शहर में बैलगाड़ी से रथयात्रा निकालने की परंपरा शुरू हुई। 1962 में रथ स्थानीय कारीगरों से तैयार कराया गया था। करीब 60 साल में रथ कमजोर हो गया। इसके बाद 25 फीट ऊंचे रथ 20 लाख की लागत से बनवाया गया था। वर्तमान में महाप्रभु की निकाली जा रही मूर्तियां 105 साल पुरानी है। चूना-गुड़ से बनाई गई मंदिर करीब 13 दशक से भी पुराना है। सीमेंट का उपयोग ही नहीं हुआ है। वहीं रथयात्रा शुरू होने के बाद 55-60 साल पहले 10 किलो का गजामूंगा प्रसाद बांटा जाता था, लेकिन अब 1000 गुना से ज्यादा बढक़र 10 क्विंटल हो गया।


