दन्तेवाड़ा

बस्तर पंडुम विश्व पटल पर बस्तरिया संस्कृति की धमक - केदार कश्यप
28-Jan-2026 10:29 PM
बस्तर पंडुम विश्व पटल पर बस्तरिया संस्कृति की धमक - केदार कश्यप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दंतेवाड़ा 28 जनवरी। जिला प्रशासन द्वारा जिला  स्तरीय बस्तर पंडुम का माँ दंतेश्वरी मंदिर परिसर में बुधवार को भव्य आयोजन  किया गया। कार्यक्रम में बस्तर की लोक संस्कृति, कला, नृत्य, संगीत एवं रीति-रिवाजों की जीवंत झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप नें सभी मौजूद नागरिकों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विरासत को सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

श्री कश्यप ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत दंतेवाड़ा जिले से हुई है और उनके जीवन का आधा से अधिक समय यहीं बीता है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज बस्तर बदल रहा है, बस्तर की तस्वीर बदल रही है और देश-विदेश में बस्तर की एक नई पहचान बन रही है। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मंशानुसार बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है। माँ दंतेश्वरी मंदिर, ढोलकल, बारसूर, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे अनेक प्रमुख पर्यटन स्थल बस्तर की पहचान हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।

श्री कश्यप ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने बस्तर की संस्कृति को सहज और जीवंत रखा है, यह हम सभी का कर्तव्य है कि इस सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढिय़ों तक सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा कि पहले बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में जहाँ कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, आज वहाँ ढोल-मांदर की थाप सुनाई दे रही है। यह उक्त। स्थिति बदलाव की परिचायक है। हमें केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि पूर्वजों से मिली संस्कृति को जीकर उसकी पहचान बनानी है। अब बस्तर से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और यह क्षेत्र एक समृद्ध एवं विकसित बस्तर के रूप में आगे बढ़ रहा है।

जो जिले पहले अति संवेदनशील कहलाते थे, वे आज प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आकांक्षी जिलों में शामिल हैं।

व्यंजनों का लिया जायका

उन्होंने युवा वर्ग से बस्तर के पारंपरिक गीत, संगीत जैसे ’’आया माचो दंतेश्वरी’’ और ’’साय रेला’’ जैसे पारंपरिक गीतों को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म में फॉलों कर प्रचार-प्रसार करने को आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने जिला स्तरीय बस्तर पंडुम के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए दीदियों के द्वारा बनाई गई व्यंजनों का स्वाद चखा।

जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी नें कहा कि बस्तर पंडुम कार्यक्रम की संपूर्ण परिकल्पना प्रदेश के मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं एवं लोककलाओं को एक सूत्र में पिरोकर संरक्षित और संवर्धित करना है।

कलेक्टर देवेश ध्रुव ने कहा कि आज का यह पावन अवसर हम सभी के लिए अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है। बस्तर पंडुम के माध्यम से हम सभी बस्तर की समृद्ध, ऐतिहासिक और जीवंत संस्कृति के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक मंचीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बस्तर की आत्मा को महसूस करने का सशक्त माध्यम है। बस्तर पंडुम में यहां की परंपरागत रीति-रिवाज, लोक संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, नृत्य-संगीत और जनजीवन की विविध झलक देखने को मिलती है, जो बस्तर की विशिष्ट पहचान को दर्शाती है।


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