‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 14 दिसंबर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार 13 दिसंबर को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर, कोण्डागांव में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव किरण चतुर्वेदी द्वारा किया गया। इसके पश्चात लोक अदालत में रखे गए राजीनामा योग्य मामलों के निराकरण के लिए निर्देश दिए गए।
नेशनल लोक अदालत के तहत जिला न्यायालय कोण्डागांव के तीन न्यायालयों, तालुका विधिक सेवा समिति केशकाल के न्यायालय में एक खंडपीठ, तालुका विधिक सेवा समिति नारायणपुर के न्यायालय में दो खंडपीठ तथा राजस्व प्रकरणों के लिए राजस्व न्यायालय में खंडपीठों का गठन किया गया। इन खंडपीठों के माध्यम से विभिन्न श्रेणियों के मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
लोक अदालत में कोण्डागांव, केशकाल एवं नारायणपुर न्यायालयों में बैंक रिकवरी के 1,492 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमें 6,52,140 रुपये का अवार्ड पारित हुआ।
चार आपराधिक प्रकरणों का निपटारा किया गया। बिजली बिल से संबंधित 1,852 प्रकरणों में 2,20,748 रुपये की राशि निर्धारित की गई। मोटर दुर्घटना दावा के 8 प्रकरणों में 70,80,000 रुपये का अवार्ड पारित हुआ।
चेक बाउंस के 2 प्रकरणों में 4,00,000 रुपये की राशि तय की गई। अन्य सिविल मामलों के 2 प्रकरणों में 12,21,999 रुपये का अवार्ड पारित हुआ। ट्रैफिक चालान के 1,644 प्रकरणों में 7,80,300 रुपये की राशि निर्धारित की गई।
राजस्व मामलों के 5,185 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमें 5,000 रुपये की राशि प्राप्त हुई। नगर पालिका कोण्डागांव एवं नारायणपुर से संबंधित 905 प्रकरणों में 7,70,715 रुपये तय किए गए। दूरसंचार विभाग से जुड़े 203 प्रकरणों का निपटारा किया गया। अन्य श्रेणी के 49 प्रकरणों में 30,600 रुपये का अवार्ड पारित हुआ।
इस प्रकार समस्त न्यायालयों एवं राजस्व न्यायालयों के माध्यम से कुल 11,346 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें आपराधिक प्रकरणों के समन शुल्क एवं सिविल प्रकरणों को मिलाकर कुल 1,11,61,502 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
लोक अदालत के आयोजन में सभी खंडपीठों के पीठासीन अधिकारी, सदस्य, अधिवक्ता तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला चिकित्सालय कोण्डागांव की टीम द्वारा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया, जिसमें पक्षकारों का बीपी और शुगर परीक्षण किया गया। अधिकार मित्रों द्वारा पक्षकारों को लोक अदालत प्रक्रिया से जोडऩे में सहयोग किया गया।
न्यायालय के अनुसार, प्रकरणों का समाधान प्राप्त करने वाले पक्षकारों को न्याय वृक्ष के रूप में काजू, जामुन और आंवला के पौधे भेंट किए गए।