प्रभावी रोक के लिए नितिन सिंघवी का कमेटी गठन का सुझाव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 10 जनवरी। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) द्वारा हाल ही में समस्त नगरीय निकायों को प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर निर्देश जारी किए हैं। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने सवाल उठाया कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के सैकड़ों ट्रक प्रतिदिन छत्तीसगढ़ में कहां से आ रहे हैं। उन्होंने रोक को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन का सुझाव दिया है।
सिंघवी ने कहा कि नगरीय निकायों को स्वच्छता दीदियों के माध्यम से सिंगल यूज प्लास्टिक के वैकल्पिक उपयोग हेतु जागरूकता अभियान चलाने, व्यावसायिक क्षेत्रों, साप्ताहिक बाजारों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जन-जागरूकता अभियान चलाने, आर्थिक दंड सुनिश्चित करने, एनजीओ एवं रहवासीय कल्याण संघ की सहभागिता से घर-घर जागरूकता अभियान चलाने, शासकीय एवं अर्धशासकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों द्वारा जागरूकता अभियान चलाने, विद्यालय स्तर पर चित्रकला प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक इत्यादि के निर्देश दिए गए हैं।
कैंसर का इलाज पैरासिटामोल से
इन्हीं निर्देशों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रतिबंध को लागू करने के लिए यह वैसा ही कदम है जैसे कैंसर का इलाज पैरासिटामोल (बुखार की दवाई) से किया जा रहा हो, जबकि बीमारी से वास्तविक छुटकारा इनके निर्माण और दूसरे प्रदेशों से आयात पर रोक लगाने से ही संभव है। यदि प्रतिबंध केवल आम नागरिक के लिए है और निर्माता व आयातक उसके दायरे से बाहर हैं, तो यह कानून नहीं बल्कि दिखावटी है। सूडा ने निर्देश के पालन से शासन और जनता के धन की बर्बादी ही होगी।
सिंघवी ने बताया कि वर्ष 2017 में उनकी एक जनहित याचिका के दौरान पहली बार सिंगल यूज प्लास्टिक पर विस्तृत प्रतिबंध लागू किया गया था। वर्ष 2023 में इस प्रतिबंध को और विस्तृत किया गया। अब 100 प्रतिशत प्लास्टिक और थर्माकोल से बने सिंगल यूज प्लास्टिक आइटम, नॉन-वूवन कैरी बैग तथा कई अन्य वस्तुएँ प्रतिबंधित हैं। ऐसे में इनके निर्माण और दूसरे प्रदेशों से आयात पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के बजाय केवल जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उनका कहना था कि इसका अर्थ यह है कि आप निर्माण और आयात होने देंगे और जनता से कहेंगे कि उपयोग न करें।
सिंघवी ने सवाल उठाया कि सबसे पहले अधिकारियों को यह बताना चाहिए कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के सैकड़ों ट्रक प्रति दिन छत्तीसगढ़ में आखिर आ कहाँ से रहे हैं? क्या बॉर्डर पर इन्हें प्रवेश से रोका नहीं जा सकता? और प्रदेश में इनका निर्माण कहाँ हो रहा है तथा निर्माण रोकने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है? जबकि निर्माताओं की बिजली खपत से इसका खुलासा आसानी से हो सकता है।
सभी के लिए खतरनाक है...
सिंघवी ने कहा कि अधिकारियों द्वारा प्रतिबंध का कड़ाई से पालन नहीं किया जाना न केवल हमारे लिए, बल्कि उनकी और हमारी आने वाली पीढिय़ों के लिए भी खतरनाक है। माइक्रोप्लास्टिक अब मिट्टी, जल और भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर चुका है और मछलियों, पक्षियों तथा स्थलीय जीवों को प्रभावित कर रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सिद्ध हो चुका है कि माइक्रोप्लास्टिक मानव शरीर के फेफड़ों, रक्त, मस्तिष्क, वृषण तथा गर्भ में पल रहे भ्रुण, महिला के स्तन दूध तक में पाया गया है। प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक नालियों में भरा पड़ा रहता है, जिससे मच्छरों का प्रजनन बढ़ता है और डेंगू जैसे मच्छर-जनित रोगों में वृद्धि होती है। जलवायु परिवर्तन के चलते मच्छरों की संख्या में और अधिक बढ़ोतरी होगी। उन्होंने चेताया कि आज सिंगल यूज प्लास्टिक केवल गंदगी नहीं है, यह कल अस्पतालों को भरने वाली बीमारियों की अग्रिम चेतावनी है।
पत्र बना फुटबाल: उन्होंने कहा कि इन सभी बिंदुओं को लेकर वे अगस्त 2024 से मांग कर रहे हैं कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जो सबसे पहले यह पता लगाए कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक कहाँ से आ रही है और उसका निर्माण कहाँ हो रहा है, तथा उसके बाद उसे रोकने की कार्रवाई की जाए। परंतु डेढ़ साल से उनका पत्र फुटबॉल की तरह एक गोल पोस्ट से दूसरे गोल पोस्ट तक घूम रहा है।