गांव-गांव में बैठकें शुरू, आंदोलन को सफल बनाने चुनी गई महासमिति
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
पिथौरा, 13 जून। बारनवापारा वन क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में बुनियादी सुविधाओं एवं मुलभुत सुविधाओं की अनदेखी के विरुद्ध जनआक्रोश फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यदि प्रशासन ने समय रहते सुध नहीं ली, तो हजारों की संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ग्राम बार में 11 जून को 18 से अधिक गांवों के ग्रामीणों की एक महाबैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सामुदायिक वन अधिकार पत्र की प्राप्ति, क्षेत्र के 21 गांवों में सुचारू बिजली व्यवस्था और पक्की सडक़ निर्माण को लेकर आर-पार की लड़ाई का शंखनाद किया गया है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जल्द ही कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
गांव-गांव में जलाई जा रही अलख, भारी जनसमर्थन उक्त आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत और सफल बनाने के लिए सभी गांवों से प्रमुख जनप्रतिनिधियों, सरपंचों, पंचों और सक्रिय ग्रामीणों को मिलाकर पदाधिकारियों का चयन किया गया है। यह समिति अब गांव-गांव जाकर चौपाल लगा रही है और लोगों को जागरूक कर रही है। इस अभियान की पहली कड़ी में 12 जून को ग्राम पंचायत बार एवं मुड़पार (ब) में बैठक रखी गई, जिसमें भारी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
ग्रामीणों की 3 मुख्य मांगें हैं- 21 गांवों में बिजली का गंभीर संकट क्षेत्र की सबसे पहली और मुख्य समस्या बिजली की ही है। ग्रामीण आज के दौर में भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। इससे प्रभावित होने वाले प्रमुख गांव बफरा, भिभौरीं, नवाडीह, गुड़ा गढ़, बार, हरदी, मुड़पार, दोंद, पाड़ादाह, आमगांव, लोरिदखार, ढेबी, ढेबा, मोंहदा, रवान, कौहाबाहरा, मुरुमडीह, छतालडबरा, रामपुर, झालपानी और फुरफुंदी हैं।
दूसरा मुद्दा 4 सालों से अटका वन अधिकार पत्र के बारे मे ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 4 सालों से 18 गांवों का ‘सामुदायिक वन अधिकार’ एवं ‘सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र’ सरकारी विभागों के चक्कर काट रहा है और अफसर इस पर कुंडली मारकर बैठे हैं। इस मांग को लेकर मुड़पार, पाड़ादाह, दोंद, सैहाभाठा, सुरबाय, बार, हरदी, गुड़ा गढ़, ढेबी, ढेबा, मोंहदा, रवान, कौहाबाहरा, अकलतरा, देवगांव, गबौद, चरौदा, भिभौंरी और बडग़ांव के आदिवासियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।क्षेत्र की तीसरी बड़ी मांग पक्की सडक़ को लेकर है। सडक़ों की हालत इतनी बदतर है कि मरीजों को अस्पताल ले जाने और बच्चों को स्कूल जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह पूरा इलाका मुख्य मार्ग से कट जाता है।
आंदोलन को सफल बनाने गांववार कमान संभालनें एवं आंदोलन को अनुशासित और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक गांव से प्रबुद्ध नागरिकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसमें बफरा- लक्ष्चीराम ध्रुव, बलीराम चौहान, रुपसिंह ठाकुर, भिभौंरी- संतोष कुमार, रामकुमार यादव, उपेन्द्र दीवान, नवाडीह-रत्नेश नेताम, गौतम ठाकुर, गुढ़ागढ़- शंकर नेताम, पप्पू यादव, प्रितराम ठाकुर ग्राम बार: सम्पत ठाकुर, भुवन यादव, कन्हैया ध्रुव, मत्थु, गोलू, बेनु राम, शिवप्रसाद, डान चौहान, लक्ष्मीनारायण, हरदी- सुकदेव, भानु , टिकनेश, भागु राम, राधेश्याम,ग्राम मुड़पार: संतोष, संजीव ठाकुर, रामु ठाकुर, नंदकुमार, भुनेश्वर, कपुर, दोन्द- खेमराज ठाकुर, मोहन नेताम, रामु यादव, कंशराम, पाड़ादाह- मनहरण, अजय, राकेश, अवन , महेन्द्र ठाकुर, ईश्वर ठाकुर,ग्राम आमगांव: अनिरुद्ध दीवान, परदेशी, संतोष, सियाराम, भागवत प्रसाद, सुखराम, महेततर, अशोक, ग्राम लोरिदखार- डिग्री प्रधान, संन्यासी प्रधान, चरण प्रधान, बलराम, ढेबी खार- अमरध्वज, इंद्ल दीवान, बेदराम बरिहा, उमाशंकर, नित्यानंद पटेल, ग्राम ढेबा- गीताराम, दुलारू, तुलसीदास, चंदूलाल ग्राम कौहाबाहरा- प्रवीण साहू, बलराम, शंकर ग्राम मोहदा: राजकुमार दीवान, नागेश दीवान, धनीराम, मनोज यादव, आनंदराम, गणेश ध्रुव, दिलेश्वर, ग्राम रवान- गोलू ठाकुर, शिवलाल यादव, कैलाश ध्रुव, दीपक, कन्हैया, मुरुमडीह- दीपक, शंकर विश्वकर्मा, सुंदर, छताल-जलंधर, नारायण पटेल, रेख राम ठाकुर, डोलामणी, ग्राम रामपुर- राजकुमार, रोहित, अकलतरा-हेम कुमार दीवान, रामजी, देवगांव- तेजकुमार, रविशंकर साहू, गबौद- पुरुषोत्तम प्रधान, अगरसिंह, बाबूलाल दीवान, ब्रिज कुमार,चरौदा- पुरनलाल यादव, संतलाल यादव, भूपेन्द्र बारिक, माधव प्रसाद तिवारी, बडग़ांव-भीखम ठाकुर, विष्णु ठाकुर, भगत बरिहा, सैहाभाठा-धरम रात्रे, लोकनाथ रात्रे, अश्वनी केंवट, सुरबाय- पंचराम बरिहा, रामकुमार बरिहा, शंकर बारिहा बनाये गए हैं।