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अस्थमा मौत की सजा नहीं, सही उपचार से नियंत्रित होने वाली दीर्घकालिक बीमारियों में से एक-डॉ. दिपेश मस्के
05-May-2026 2:39 PM
अस्थमा मौत की सजा नहीं, सही उपचार से नियंत्रित होने वाली दीर्घकालिक बीमारियों में से एक-डॉ. दिपेश मस्के

विश्व अस्थमा दिवस 2026 पर जागरूकता

रायपुर, 5 मई। डॉ. दिपेश मास्के, वरिष्ठ सलाहकार, पल्मोनोलॉजी, नारायणा एमएमआई अस्पताल, रायपुर ने बताया कि हर वर्ष मई के पहले मंगलवार को दुनिया विश्व अस्थमा दिवस मनाती है। यह पहल ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (त्रढ्ढहृ्र) द्वारा संचालित है—एक ऐसा अवसर, जब हम एक ऐसी बीमारी पर विचार करते हैं जो आम है, दीर्घकालिक है, और फिर भी दुखद रूप से कम आंकी जाती है।

डॉ. मस्के ने बताया कि इस वर्ष का विषय स्पष्ट और प्रभावशाली है-अस्थमा से पीडि़त सभी लोगों के लिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स की उपलब्धता अभी भी एक तात्कालिक आवश्यकता। यह सिर्फ एक नारा नहीं है। यह एक चेतावनी है। भारत में अस्थमा लाखों लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन इसकी वास्तविकता स्थानीय स्तर पर और भी गंभीर है। छत्तीसगढ़ में यह चुनौती कई स्तरों पर मौजूद है।

डॉ. मस्के ने बताया कि रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से हो रहे शहरीकरण ने वायु प्रदूषण को बढ़ाया है, वहीं ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में लकड़ी और कोयले से खाना पकाने का धुआं बच्चों के फेफड़ों को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहा है। इसके साथ ही खनन क्षेत्रों की धूल, कृषि से जुड़े एलर्जन और औद्योगिक संपर्क इस समस्या को और बढ़ाते हैं। साफ है कि यहां अस्थमा दुर्लभ नहीं है—बल्कि अक्सर पहचान में नहीं आता।

डॉ. मस्के ने बताया कि बहुत से मरीज अभी भी केवल अस्थायी राहत देने वाली दवाओं पर निर्भर हैं। कई लोग जांच में देरी करते हैं। और अब भी बहुत से लोग इनहेलर से डरते हैं—विज्ञान के बजाय मिथकों के कारण। दूरदराज के क्षेत्रों में, सही निदान होने के बाद भी आवश्यक दवाएं नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होतीं। अस्थमा कोई मौत की सजा नहीं है। सही उपचार के साथ, यह सबसे नियंत्रित होने वाली दीर्घकालिक बीमारियों में से एक है।

डॉ. मस्के ने बताया कि त्रासदी यह है कि गंभीर दौरे, अस्पताल में भर्ती और मौतें अभी भी होती हैं—इसलिए नहीं कि इलाज नहीं है, बल्कि इसलिए कि इलाज उन तक नहीं पहुंचता जिन्हें इसकी जरूरत है। एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर जीवन बचाते हैं। नियमित उपयोग से दौरे रोके जा सकते हैं—सिर्फ इलाज ही नहीं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के लिए यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है।

डॉ. मस्के ने बताया कि अस्थमा नियंत्रण घर से शुरू होता है। बार-बार खांसी, सांस फूलना या घरघराहट को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उपचार नियमित होना चाहिए, न कि केवल जरूरत पडऩे पर। इनहेलर सुरक्षित, प्रभावी और जीवन रक्षक हैं—लेकिन तभी जब उनका सही और नियमित उपयोग किया जाए। धूल, धुआं और इनडोर प्रदूषण जैसे ट्रिगर्स से बचाव और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है।


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