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फेफड़ों के दुर्लभ ट्यूमर की जटिल सर्जरी और समय पर निदान से संजीवनी ने बचाई जिंदगी
20-Feb-2026 3:42 PM
फेफड़ों के दुर्लभ ट्यूमर की जटिल सर्जरी और समय पर निदान से संजीवनी ने बचाई जिंदगी

रायपुर, 20 फरवरी। संजीवनी कैंसर केयर हॉस्पिटल ने बताया कि कैंसर सर्जन डॉ. कल्याण पांडेय, डॉ. मौ रॉय तथा कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. विनोद आहूजा के नेतृत्व में, संजीवनी कैंसर केयर हॉस्पिटल, रायपुर के डॉक्टरों की टीम ने समय पर निदान और अत्यंत जटिल सर्जरी के माध्यम से फेफड़ों के एक दुर्लभ ट्यूमर का सफल उपचार किया।

हॉस्पिटल ने बताया कि यह उपलब्धि मध्य भारत में उन्नत कैंसर उपचार सुविधाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। मध्य आयु वर्ग की एक महिला मरीज लगातार खांसी और बार-बार हेमोप्टाइसिस (खांसी के साथ खून आना) की शिकायत के साथ अस्पताल आई थीं। ये लक्षण अक्सर सामान्य श्वसन संक्रमण जैसे लगते हैं, लेकिन कई बार किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।

डॉ. पांडेय ने बताया कि म्यूकोएपिडर्मॉइड कार्सिनोमा सभी फेफड़ों के कैंसर के 1 प्रतिशत से भी कम मामलों में पाया जाता है। यह सामान्यत: श्वासनली (ट्रेकिया) और मुख्य ब्रोंकस के पास उत्पन्न होता है। यह कीमोथेरेपी से प्रभावी रूप से नियंत्रित नहीं होता, इसलिए सर्जरी ही इसका प्रमुख और प्रभावी उपचार विकल्प है। क्लिनिकल मूल्यांकन के बाद विस्तृत जांचें की गईं, जिनमें कॉन्ट्रास्ट-एन्हांस्ड सीटी स्कैन और पीईटी-सीटी शामिल थे।

डॉ. पांडेय ने बताया कि जांच में दाएं फेफड़े के ऊपरी लोब में एक बड़ा और अनियमित आकार का ट्यूमर पाया गया। इस ट्यूमर के कारण ऊपरी लोबर ब्रोंकस में गंभीर अवरोध उत्पन्न हो गया था, जिससे फेफड़े का वह हिस्सा लगभग पूरी तरह सिकुड़ गया था। ट्यूमर प्रमुख वायुमार्गों और आसपास की रक्त वाहिकाओं के अत्यंत समीप था, जिससे सर्जरी चुनौतीपूर्ण हो गई। हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण और अन्य जांचों से यह पुष्टि हुई कि यह म्यूकोएपिडर्मॉइड कार्सिनोमा है, जो फेफड़ों के कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार है और सामान्य कैंसर प्रकारों से जैविक एवं क्लिनिकल रूप से भिन्न होता है।

डॉ. रॉय और डॉ. आहूजा ने बताया कि इस मामले पर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की बहु-विषयक ट्यूमर बोर्ड में विस्तार से चर्चा की गई। ट्यूमर के आकार और स्थिति को देखते हुए पहले मरीज को कीमोथेरेपी दी गई ताकि रोग की सक्रियता नियंत्रित हो सके और सर्जरी की संभावना बेहतर हो। पुनर्मूल्यांकन और सावधानीपूर्वक प्री-ऑपरेटिव योजना के बाद सर्जरी को अंतिम उपचार के रूप में तय किया गया।

डॉ. रॉय और डॉ. आहूजा ने बताया कि जटिल सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान दाएं फेफड़े के प्रभावित ऊपरी लोब को हटाया गया। साथ ही मुख्य ब्रोंकस और पल्मोनरी रक्त वाहिकाओं जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं के आसपास अत्यंत सावधानीपूर्वक डिसेक्शन किया गया। ट्यूमर की संवेदनशील संरचनाओं के निकटता के बावजूद सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई और आसपास के ऊतकों को सुरक्षित रखा गया।


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