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एचएनएलयू का आयोजन
रायपुर, 5 फरवरी। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने बताया कि 2 फऱवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर रामसर कन्वेंशन के 50 वर्ष: वैश्विक एवं भारतीय परिप्रेक्ष्य में आर्द्रभूमि संरक्षण विषय पर एक ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
एचएनएलयू ने बताया किइस कार्यशाला के माध्यम से राज्य के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि का भी स्मरण किया गया, जिसमें कोपरा जलाशय को छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिलने का उल्लेख किया गया।
एचएनएलयू ने बताया कि प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, कुलपति, एचएनएलयू रायपुर ने 1971 में अंगीकृत रामसर कन्वेंशन की स्थायी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। प्रो. विवेकानंदन ने कहा, विश्व आर्द्रभूमि दिवस और कोपरा जलाशय को रामसर स्थल के रूप में नामित किया जाना केवल किसी अंतरराष्ट्रीय संधि का उत्सव या वैश्विक सूची में एक औपचारिक दर्जा भर नहीं है; यह इस सशक्त विचार की पुन: पुष्टि भी है कि आर्द्रभूमियाँ प्रकृति, मानव समुदाय और हमारे साझा भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
एचएनएलयू ने बताया कि मुख्य भाषण डॉ. रितेश कुमार, निदेशक, वेटलैंड्स इंटरनेशनल – साउथ एशिया द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने रामसर ढांचे के अंतर्गत भारत की चार दशकों की यात्रा का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने रामसर स्थलों के विस्तार तथा नियामक ढाँचों के विकास सहित भारत की उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया, साथ ही शासन, पारिस्थितिकी और संस्थागत चुनौतियों पर स्पष्ट रूप से प्रकाश डाला।
एचएनएलयू ने बताया किडॉ. कुमार ने कहा, आर्द्रभूमियाँ अक्सर अविवेकपूर्ण और अवैज्ञानिक कार्यक्रमों—जैसे कंक्रीटीकरण और सौंदर्यीकरण परियोजनाओं—का शिकार बन जाती हैंज् जबकि वास्तव में उन्हें आईसीयू में रखने की आवश्यकता होती है, उन्हें ब्यूटी पार्लर उपचार दिया जाता है। उन्होंने आर्द्रभूमियों के लिए एक राष्ट्रीय मिशन, अनुसंधान–नीति के बेहतर समन्वय, सुदृढ़ वित्तपोषण, क्षमता निर्माण तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में आर्द्रभूमि शिक्षा के मुख्यधारा में समावेशन की आवश्यकता पर बल दिया।


