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बालको ने माह भर जागरूकता कार्यक्रम से जिम्मेदार सडक़ व्यवहार को दिया बढ़ावा
04-Feb-2026 3:26 PM
बालको ने माह भर जागरूकता कार्यक्रम से जिम्मेदार सडक़ व्यवहार को दिया बढ़ावा

पांच हजार से अधिक लोगों को सुरक्षा से जोड़ा

बालकोनगर, 4 फरवरी। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने ‘सडक़ सुरक्षा-जीवन रक्षा’ थीम के तहत 37वां राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा माह मनाया। इस दौरान कंपनी ने कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और आसपास के समुदाय सहित 5,000 से अधिक लोगों को जोड़ते हुए सडक़ पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूरे महीने जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

श्री कुमार ने बताया कि यह अभियान बालको के प्रचालन क्षेत्रों और आसपास के समुदाय में संचालित किया गया, जिसमें सडक़ अनुशासन, यातायात जागरूकता और दुर्घटना रोकथाम से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस रहा। कार्यक्रमों के अंतर्गत क्विज प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, फायर सेफ्टी प्रदर्शन, कर्मचारियों और स्कूली विद्यार्थियों के लिए ड्राइंग एवं स्लोगन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। बालको ने नियमित वाहन चालकों के लिए ‘रोड रश’ नामक एक गेमिफाइड लर्निंग मॉड्यूल भी शुरू किया, जिसका उद्देश्य सडक़ सुरक्षा से जुड़े ज्ञान का परीक्षण करने के साथ सुरक्षित ड्राइविंग व्यवहार को प्रोत्साहित करना रहा।

 

श्री कुमार ने बताया कि स्थानीय स्कूलों में आयोजित जागरूकता सत्रों और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों को यातायात अनुशासन और दुर्घटना रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया। इसके अलावा, सामूहिक जिम्मेदारी और सतत परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कारपूलिंग चैलेंज भी आयोजित किया गया। अभियान के तहत कंपनी ने अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में कार्यरत भारी वाहन चालकों के लिए नेत्र एवं स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया।

श्री कुमार ने बताया कि आंतरिक सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए अचानक वाहन निरीक्षण भी किए गए, ताकि वाहनों की सुरक्षित स्थिति और यातायात नियमों के पालन की पुष्टि की जा सके।  सडक़ सुरक्षा, बालको की ‘जीरो हार्म’ प्रतिबद्धता का ही विस्तार है। हर सुरक्षित यात्रा अनुशासन, जागरूकता और जवाबदेही का प्रतिबिंब होती है। कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और समुदाय के साथ निरंतर जुड़ाव के माध्यम से बालको एक ऐसी संस्कृति विकसित कर रहा है।


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