बिलासपुर
बिलासपुर में बिल्डर-प्रशासन गठजोड़ पर उठे सवाल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 17 मार्च। न्यायधानी बिलासपुर के अज्ञेय नगर क्षेत्र के एक मामले ने नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एमएस अनंत रियल्टी नामक परियोजना में बिल्डर नमन गोयल पर अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर गलत तरीके से नक्शा पास कराने का आरोप लगा है।
दस्तावेजों के अनुसार, बिल्डर ने चार मंजिला इमारत में 60 फ्लैट बनाने की जानकारी दी थी। लेकिन उसी प्रोजेक्ट के नक्शे में 6 मंजिल और 90 फ्लैट दिखाकर उसे मंजूरी दिला दी गई। यह अंतर इतना स्पष्ट है कि सामान्य नजर में भी पकड़ा जा सकता है, फिर भी अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का नक्शा विकास सिंह नाम के इंजीनियर के जरिए तैयार बताया गया है। लेकिन शहर में इस नाम का कोई पंजीकृत इंजीनियर या आर्किटेक्ट मौजूद नहीं है।
बताया जा रहा है कि इस नाम का इस्तेमाल पहले भी अवैध निर्माणों के नक्शे पास कराने के लिए किया गया था, जिस पर नगर निगम ने संबंधित लाइसेंस को निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद उसी नाम से नए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है।
नियमों के तहत बड़े प्रोजेक्ट में आर्थिक रूप से कमजोर के लिए फ्लैट आरक्षित करना अनिवार्य है। बिल्डर ने तिफरा स्थित खसरा नंबर 407/7 पर ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाने का हलफनामा दिया।
लेकिन जांच में सामने आया कि यह जमीन बिल्डर के नाम पर ही दर्ज नहीं है। यानी गरीबों को मकान देने के नाम पर भी प्रशासन को गुमराह कर अनुमति हासिल की गई।
इस पूरे मामले से न सिर्फ सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान होने की आशंका है, बल्कि भवन निर्माण मानकों की अनदेखी से आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।


