बीजापुर

लाल आतंक से खेलगढ़ तक सोपान की साधना ने बदली बीजापुर की पहचान
24-May-2026 10:09 PM
लाल आतंक से खेलगढ़ तक सोपान की साधना ने बदली बीजापुर की पहचान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बीजापुर, 24 मई। कभी नक्सल हिंसा की पहचान रहे बस्तर अंचल के बीजापुर जिले ने बीते वर्षों में एक नई पहचान गढ़ी है, खेलगढ़ की। इस बदलाव की कहानी किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि मैदान की मिट्टी से उठी है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं सोपान कर्णेवार एक खिलाड़ी, एक प्रशिक्षक और एक संवेदनशील शासकीय अधिकारी, जिन्होंने अपने सपनों को बच्चों के भविष्य से जोड़ दिया।

सोपान कर्णेवार का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां अनुशासन और सेवा भाव जीवन के मूल मूल्य रहे। पिता विक्रम कुमार कर्णेवार उप आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हैं और माता साधना कर्णेवार गृहिणी। बचपन से ही सोपान का मन खेलों में रमा रहा। वॉलीबॉल, रग्बी, एथलेटिक्स और सॉफ्टबॉल हर खेल में उन्होंने खुद को आजमाया, लेकिन सॉफ्टबॉल उनका प्रमुख खेल बना।

साल 2012 में सीनियर सॉफ्टबॉल नेशनल चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ की पुरुष टीम को पदक दिलाने वाली टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने प्रदेश का नाम रोशन किया। इसी उपलब्धि पर उन्हें उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया और आगे चलकर शहीद पंकज विक्रम अवार्ड मुख्यमंत्री ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।

2015 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा श्रम निरीक्षक के पद पर नियुक्ति मिली और उनकी पहली पोस्टिंग बनी बीजापुर।

यहीं से कहानी ने नई दिशा ली। विभागीय दायित्वों के साथ-साथ सोपान ने बच्चों को वॉलीबॉल और सॉफ्टबॉल सिखाना शुरू किया। 2017 में बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी की स्थापना हुई। बोर्डिंग सुविधा के साथ शुरू हुई इस अकादमी में एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, फुटबॉल, आर्चरी, सॉफ्टबॉल, बैडमिंटन, स्विमिंग, कबड्डी, जूडो और कराटे कुल 10 खेलों में प्रशिक्षण दिया जाने लगा। आज यहां 280 बालक-बालिकाएं रहकर पढ़ाई के साथ खेलों में निखर रहे हैं।

नतीजे ऐतिहासिक हैं। अब तक अकादमी के करीब 200 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जिनमें से 100 से अधिक राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। 10 खिलाडिय़ों का चयन भारतीय टीमों में हुआ।

2017 में अरुण और सुनीता ने फिलीपींस में अंडर-19 एशियन सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2019 में सुरेश हेमला ने अंडर-20 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। उसी वर्ष कविता हेमला ने चीन में अंडर-20 वूमेन एशियन चैंपियनशिप खेली।

2023 में त्रिलेश उड़े, राकेश करती और सुशील कुंडयाम ने जापान में एशियन चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया।

नवंबर 2023 में रेणुका तेलम और विमल तेलम के साथ खुद सोपान कर्णेवार चीन में अंडर-18 वूमेन एशियन सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम के हेड कोच रहे।

पिछले 9 वर्षों से अकादमी में सॉफ्टबॉल का प्रशिक्षण नि:शुल्क दिया जा रहा है। सोपान के मार्गदर्शन में 129 खिलाड़ी नेशनल खेले, 56 पदक जीते और 9 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। जिला प्रशासन के सहयोग से वे अंदरूनी इलाकों के बच्चों को खिलाड़ी बनाकर उनका भविष्य संवार रहे हैं। आने वाले वर्षों में सीनियर वर्ग के मेडलिस्ट खिलाडिय़ों को उत्कृष्ट खिलाड़ी अवार्ड और शासकीय सेवाओं में अवसर मिलने की उम्मीद है।ठीक वैसे ही जैसे उनके प्रशिक्षक को मिला।

बीजापुर, जो कभी लाल आतंक के लिए जाना जाता था, आज अपने खिलाडिय़ों की उपलब्धियों से देश-विदेश में पहचाना जा रहा है। यह बदलाव बताता है कि जब मैदान में अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिलता हैतो इतिहास भी बदला जा सकता है। सोपान कर्णेवार की यही साधना बीजापुर की नई पहचान बन चुकी है।

2024 में राकेश पुणेम और राकेश कड़तीं बैंकॉक में मेंस एशियन सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया, वहीं 2025 में चंद्रकला तेलम के साथ एक बार फिर सोपान को भारतीय टीम का हेड कोच बनाया गया जहां चीन में विमेंस एशियन सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया


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