बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 8 अक्टूबर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गठित चिरायु टीम को सत्र के दौरान 1300 स्कूल एवं 1178 आगनबांडी केन्द्रों में पढऩे वाले बच्चों की स्वास्थ जांच करने का लक्ष्य दिया गया है। जिले में अब तक चिरायु टीम द्वारा 406 स्कूल एवं 810 आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर शिविर लगाया गया है। अप्रैल से लेकर सितंबर अंत तक 5 माह के दौरान टीम 31 फीसदी स्कूल तथा 69 फीसदी आंगनबाड़ी केन्द्रों तक पहुंच पाई है।
केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय योजना के तहत स्कूल एवं आगनबाड़ी केन्द्र में पढऩे वाले 1 से लेकर 18 साल के बच्चों का चिरायु योजना के तहत जांच कराने के लिए शिविर लगाया जाना है। टीम को एक सत्र के दौरान स्कूल में एक एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में दो बार शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया है । जिला की टीम ने इस सत्र के दौरान 1300 स्कूल में से केवल 406 स्कूल में शिविर लगाया है। शेष 69 फीसदी स्कूल तक चिरायु टीम अभी तक नहीं पहुंच पाई है।
810 आंगनबाड़ी केन्द्रों में पहुंची, पर जांच 55 फीसदी बच्चों की हुई
जिले के चार विकासखंड के 1178 आंगनबाड़ी में से 810 केन्द्रों में चिरायु की टीम जांच करने के लिए पहुंच चुकी है। जिले में 80858 बच्चों की जांच स्क्रीनिग करना था जिसमें से केवल 65172 बच्चों की जांच हो पाई है।
चार ब्लॉक में 10 हजार से अधिक बच्चे बीमार मिले
चिरायु टीम को जांच कें दौरान 10192 बच्चों में रोग के लक्षण नजर आया है । 10192 बच्चों में से 9195 बच्चों का तत्काल उपचार किया गया। 1002 बच्चों को रेफर किया गया यानी अस्पताल में उपचार की सलाह दी गई थी। 1002 बच्चों में सें 712 बच्चे उपचार के बाद ठीक हुए है वही 290 बच्चों का उपचार जारी है।
35 तरह के रोग के लक्षण अधिक
योजना के तहत विभिन्न 46 रोगों की जांच की गई। अ वर्ग में आने वाले 9 रोग की सूची में से बचत 35 रोग की सूची में आने वाले रोग से प्रभावित बच्चों की संया अधिक है। बी वर्ग में आने वाले त्वचा रोग के 247 बच्चे मरीज मिले। इसी तरह 71 बच्चे कान के संक्रमण , 88 बच्चे दांत के रोग, 3 बच्चे मिर्गी रोग ,76 बच्चों में आंख संबधि रोग, 6 को सुनने में परेशानी , 5 बच्चों में मांस पेशियो में विकार समेत 491 बच्चे इस वर्ग के थे जिनमे से 451 बच्चों का उपचार हो चुका है। 34 बच्चों में खून की कमी, 106 बच्चों में बिटामीन ए की कमी, 88 बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं। 9 बच्चे मोटापा के शिकार मिले है। ग्रुप सी में आने वाले रोग के 237 रोगी बच्चों का उपचार किया गया है वही 11 बच्चों में वाणी दोष, 32 बच्चों में अन्य रोग के लक्षण मिले हैं।
गंभीर रोग वाले 38 बच्चों में 30 का उपचार जिले से बाहर हुआ
चिरायु योजना के तहत वर्ग अ यानी हदय रोग, न्यूटरल टयूब दोष , होठ एवं तालु की सर्जरी, पैर की विकृति , कुल्हे का विकास रोग, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात हदयरोग, जन्मजात रेटिना विकार व हृदय रोग की सूची में से जिले में तालु विकृति के 2, पैर की विकृति के 2, जन्मजात मोतियाबिन्द के 3 मरीज, जन्मजात बधिरता के 3 मरीज, जन्मजात हृदयरोग के 28 मरीज में से 22 का उपचार हो चुका है। वहीं 6 मरीज का उपचार होना है। वहीं जन्मजात बधिरता वाले दो मरीज का उपचार होना है। इस वर्ग में आने वाले कुल 8 मरीज का उपचार होना बाकी है।
77 बच्चों को देखने में परेशानी, मोबाइल बना कारण
चिरायु टीम द्वारा जांच करने के बाद 77 बच्चों में दृष्टि दोष पाया गया है। स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों के नेत्र परीक्षण कर तथा आंख से होने वाली बीमारियों के बचाव व सुरक्षा संबंधित जानकारियां दी जा रही है।बच्चों को बताया जा रहा है कि आंखों की बीमारियों से बचने के लिए अपने हाथों को साफ रखें।
हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए धूप का चश्मा पहनें। मोबाइल से दूर रहं। आंखों को धूल, धुएं और तेज रोशनी से बचाएं। संतुलित आहार लें और पर्याप्त पोषक तत्व खाएं। आंखों की नियमित जांच कराएं और आंखों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक चश्मे पहनें। संक्रमण से बचाव के लिए दूसरों के साथ चश्मे, तौलिये या आई मेकअप साझा करने से बचने का सलाह भी दी जा रही है।
डीपीएम स्वास्थ्य विभाग लता बंजारे ने बताया कि स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में चिरायु की टीम पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। उपचार भी किया जा रहा है । जिले के बाहर 30 बच्चों का उपचार कराया गया है। सत्र में लगातार चिरायु की टीम का अभियान जारी रहेगा।


