बलरामपुर

अवैध धान परिवहन और भंडारण का मामला, जांच के दायरे में अफसर भी
04-Jan-2026 10:55 PM
अवैध धान परिवहन और भंडारण का मामला, जांच के दायरे में अफसर भी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रामानुजगंज, 4 जनवरी।
उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ की विभिन्न सहकारी समितियों में खपाने के उद्देश्य से धान के अवैध परिवहन और भंडारण का एक मामला सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के तहत कुरलूडीह निवासी श्याम सुंदर को पकड़ा गया है।
प्रशासन की कार्रवाई के दौरान श्याम सुंदर के पास से कुछ दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें विभिन्न किसानों की पासबुक, हस्ताक्षरयुक्त चेकबुक, बी-1 खसरा सहित अन्य कागजात शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस द्वारा दस्तावेज जब्त कर जांच की जा रही है।
पटवारी पर कार्रवाई, अन्य की
भूमिका जांच का विषय
प्रशासन ने मामले में संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित पटवारी के विरुद्ध कार्रवाई की है। हालांकि, अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
 नागरिकों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान का अवैध कारोबार बिना किसी स्तर पर संरक्षण के संभव नहीं है।
यह भी कहा जा रहा है कि जांच का दायरा सीमित न रहकर व्यापक होना चाहिए।
मोबाइल डेटा की जांच की मांग
सूत्रों के अनुसार, यदि आरोपी के मोबाइल फोन की तकनीकी जांच की जाती है, तो संपर्कों और लेन-देन से जुड़े तथ्यों का पता चल सकता है। पुलिस द्वारा इस दिशा में जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
 अफसरों से संपर्क को लेकर चर्चाएं
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि श्याम सुंदर का कुछ अधिकारियों से संपर्क रहा है। हालांकि, इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह सभी बिंदु जांच के अधीन बताए जा रहे हैं।
 लंबे समय से सक्रिय होने के आरोप
यह भी कहा जा रहा है कि आरोपी हाल के समय में नहीं, बल्कि लंबे समय से इस गतिविधि से जुड़ा हुआ था। प्रशासनिक जांच में इन पहलुओं को भी शामिल किए जाने की मांग उठ रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई से अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण की उम्मीद
जिला और पुलिस प्रशासन द्वारा हाल के दिनों में की गई कार्रवाइयों से अवैध धान कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में प्रयास देखे जा रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद पूरे नेटवर्क से जुड़े तथ्यों को सामने लाया जाएगा।
 पूर्व का मामला
उल्लेखनीय है कि लगभग दो वर्ष पूर्व भी रकबा बढ़ाने से जुड़ा एक मामला सामने आया था। उस समय प्रारंभिक कार्रवाई पटवारी के विरुद्ध की गई थी, लेकिन बाद में जांच में एक तहसीलदार की भूमिका सामने आने पर कमिश्नर द्वारा निलंबन की कार्रवाई की गई थी।


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