बलौदा बाजार

पहले सडक़-बिजली और पानी दी, अब खुद ही तोड़ेंगे पीएम आवास!
25-Apr-2026 12:47 PM
पहले सडक़-बिजली और पानी दी, अब खुद ही तोड़ेंगे पीएम आवास!

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 25 अप्रैल।
जिले में सामुदायिक स्थलों से अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन के निर्देशों के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और जमीनी स्थिति के बीच अंतर स्पष्ट रूप से सामने आने लगा हैं। मंगलवार को समयसीमा बैठक में कलेक्टर ने तालाब, डाबरी और खेल मैदान जैसे सार्वजनिक स्थलों पर हुए अतिक्रमण को प्राथमिकता से हटाने के निर्देश दिए ताकि इनका उपयोग आम लोगों के लिए सुनिश्चित किया जा सकें।
रामसागर और लगभग 8 एकड़ में फैला पोस्ट ऑफिस वार्ड क्रमांक 6 पिपराहा तालाब जिले में अतिक्रमण की जटिल स्थिति को दर्शाते हैं। पहले इन तालाबों तक पहुंचाने के लिए कई रास्ते उपलब्ध थे, लेकिन अब तक अतिक्रमण मार्गों पर मकान बन चुके हैं, जिससे पहुंच सीमा सीमित हो गई हैं। किनारों पर बस्तियां विकसित हो चुकी हैं और इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकान भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पक्की सडक़ें, पेयजल के लिए बोर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यह इलाका अब पूरी तरह से आवासीय रूप में बदल चुका हैं। इससे प्रशासन के लिए अतिक्रमण और वैध बसाइट के बीच अंतर तय करना चुनौती पूर्ण हो गया हैं।

प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रों को अतिक्रमण की श्रेणी में रखने की संभावना के बाद स्थानीय लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई हैं। निवासियों का कहना है कि जिन बस्तियों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाए गए सडक़ और पेयजल जैसी सुविधाएं विकसित की गई, उन्हें अचानक अतिक्रमण कैसे माना जा सकता हैं। दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि सार्वजनिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सीमांकन और अतिक्रमण हटाना आवश्यक हैं। इस स्थिति ने ग्रामीण और शहरी सीमाओं पर बसे क्षेत्रों में अनिश्चितता बढ़ा दी हैं।

एक और चिंता पुनर्वास के लिए क्या इंतजाम किए
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रशासन तालाबों के संरक्षण और पहले से बस चुकी बस्तियों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करेगा एक ओर रामसागर और पिपराहा जैसे जल स्रोतों को सुरक्षित करने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर वहां वर्षों से रह रहे लोगों के पुनर्वास और सीमाओं की चिंता भी सामने हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में केवल अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की समुचित योजना भी आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा संग सामाजिक संतुलन बना रहे।


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