बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 14 फरवरी। बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा आगामी अग्नि सीजन (15 फरवरी से 15 जून ) को ध्यान में रखते हुए वन अग्नि सुरक्षा एवं प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यक्रम 13 फरवरी को देवपुर नेचर कैंप में आयोजित हुआ।
कार्यशाला वनमंडल अधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देशन में संपन्न हुई। विभाग ने इस वर्ष अग्नि सीजन में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
कार्यक्रम में ग्रामीण, वन प्रबंधन समितियों के सदस्य, जनप्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं, शिक्षक और वन विभाग के अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश वनाग्नि की घटनाएं मानवजनित कारणों से होती हैं, जिनमें लापरवाही प्रमुख कारण है। महुआ संग्रह के दौरान आग लगाना, खेतों में अवशेष जलाना, बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े फेंकना तथा अन्य गतिविधियां वन क्षेत्र के लिए जोखिम पैदा करती हैं।
अधिकारियों ने आग से पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीव, मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों पर पडऩे वाले प्रभावों की जानकारी दी।
कार्यशाला के दौरान नुक्कड़ नाटक और पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में योगेश बरिहा ग्रुप (देवपुर) प्रथम, शासकीय कॉलेज लवन द्वितीय और यामिनी चौहान ग्रुप (देवपुर) तृतीय स्थान पर रहे। पेंटिंग प्रतियोगिता में अनुपमा ठाकुर, लवी मलाकी और सलीना ठाकुर को क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
समितियों का सम्मान
कार्यक्रम में उन वन प्रबंधन समितियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने पिछले वर्षों में आग की घटनाओं की रोकथाम में सहयोग किया था। विभाग ने बताया कि गांव स्तर पर निगरानी, फायर लाइन की देखरेख और त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपवनमंडलाधिकारी कसडोल अनिल वर्मा, अधीक्षक बारनवापारा अभ्यारण्य कृषानू चन्द्राकार, प्रशिक्षु एसीएफ प्रखर नायक, गुलशन साहू, श्वेता सिंह, वनक्षेत्रपाल कोठारी जीवन लाल साहू, वनक्षेत्रपाल देवपुर संतोष कुमार पैकरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन वनरक्षक अजीत ध्रुव ने किया।
पिछले वर्षों के आंकड़े
वन विभाग के अनुसार, बलौदाबाजार वनमंडल में वर्ष 2021 में 257, वर्ष 2022 में 142, वर्ष 2023 में 72, वर्ष 2024 में 29 तथा वर्ष 2025 में 133 वनाग्नि घटनाएं दर्ज की गईं। विभाग ने बताया कि इस वर्ष फायर लाइन कटाई, फायर वाचरों की तैनाती, त्वरित प्रतिक्रिया दल और तकनीकी निगरानी पर जोर दिया जाएगा।
तकनीकी निगरानी
विभाग के अनुसार, सैटेलाइट आधारित निगरानी और अन्य संचार माध्यमों के जरिए आग की सूचना प्राप्त की जाती है। सूचना मिलने पर संबंधित क्षेत्र के कर्मचारियों को तत्काल अलर्ट किया जाता है।
समापन अवसर पर वनमंडल अधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि लक्ष्य आग बुझाने से आगे बढक़र आग की घटनाओं को रोकना है, जिसके लिए जनसहभागिता आवश्यक है।


