बलौदा बाजार
गांधी चौक पर है संगमरमर की ऐतिहासिक प्रतिमा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 30 जनवरी। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर बलौदाबाजार स्थित गांधी चौक और वहां स्थापित उनकी संगमरमर की प्रतिमा को लेकर स्थानीय इतिहास से जुड़े तथ्य सामने आते हैं। स्थानीय इतिहासकारों और बुजुर्गों के अनुसार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी का इस क्षेत्र में आगमन हुआ था और उन्होंने कुछ समय यहां प्रवास किया था।
इतिहासकारों के अनुसार 26 नवंबर 1933 को महात्मा गांधी ने छुआछूत के विरोध में पुरानी मंडी स्थित शहीद स्मारक के कुएं से पानी निकालकर एक दलित व्यक्ति ने पिलाया था। इस घटना की स्मृति में बाद में गांधी चौक पर उनकी संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गई।
स्थानीय जानकारों के अनुसार यह प्रतिमा जयपुर से मंगवाई गई थी, जिसे उस समय 4500 रुपये में तैयार कराया गया था। इतिहासकारों का कहना है कि आज इसकी कीमत इसके ऐतिहासिक महत्व के कारण कहीं अधिक आंकी जाती है।
1951 में हुआ था प्रतिमा का अनावरण
स्थानीय अभिलेखों के अनुसार गांधी चौक का निर्माण 26 जनवरी 1951 को किया गया था। इसे सरकीपार के मालगुजार जगन्नाथ प्रसाद वाजपेई ने अपने दामाद सर्वेश्वर प्रसाद मिश्रा की देखरेख में बनवाया। प्रतिमा के अनावरण के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल के आगमन की सूचना थी, लेकिन उनके निधन के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। इसके बाद 26 जनवरी 1951 को तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल ने प्रतिमा का अनावरण किया।
प्रतिमा और ध्वज से जुड़े स्मरण
रवि शंकर मिश्र के पुत्र रमेश मिश्र ने बताया कि यह प्रतिमा दशकों तक विभिन्न प्रकाशनों में देश की प्रमुख गांधी प्रतिमाओं के रूप में उल्लेखित रही है। इतिहासकार डॉ. आर.के. अग्रवाल के अनुसार यह प्रतिमा अपने निर्माण काल और ऐतिहासिक संदर्भों के कारण महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सुरेश मिश्र के अनुसार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधी के बिलासपुर प्रवास के समय शनिचरी पड़ाव में फहराए गए तिरंगे की नीलामी हुई थी। उस तिरंगे को जगन्नाथ प्रसाद वाजपेई ने 1200 रुपये में खरीदा था और बाद के वर्षों में वही ध्वज बलौदाबाजार में राष्ट्रीय पर्वों पर फहराया जाता रहा।
प्रतिमा से जुड़ा हालिया प्रसंग
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्ष दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा गांधी प्रतिमा को पारंपरिक चश्मे के स्थान पर काला चश्मा पहनाया गया था। इस घटना को लेकर विभिन्न संगठनों और नागरिकों ने आपत्ति जताई थी।


