बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 12 जनवरी। प्रदेश में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच बलौदाबाजार जिले में सडक़ों की जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है. यहां सडक़ें बदहाल हैं और हादसों का खतरा बढ़ चुका है, जिसके चलते स्थानीय जनता लगातार परेशान है. छत्तीसगढ़ ने बलौदाबाजार जिले के विभिन्न हिस्सों में पहुंची तो वहां के नागरिकों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा की.
खस्ताहाल सडक़ों से राहगीर परेशान
छत्तीसगढ़ ने सबसे पहले बलौदाबाजार भाटापारा मार्ग का दौरा किया, जो एक प्रमुख मार्ग है। बावजूद इसके इस रोड की हालत बेहद खस्ताहाल है। इस मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं और गाडिय़ों रे गुदरने पर धूल का गुबार उड़ता रहा है, जिसकी वजह से यह मार्ग यात्रा करने के लिए खतरनाक हो गया है। ‘छत्तीसगढ़’ ने जब एक राहगीर संजय वर्मा से बात की तो उसने खराब सडक़ को लेकर शिकायतों की झड़ी लगा दी।
संजय वर्मा, राहगीर का कहना है कि पूरे छत्तीसगढ़ में ऐसा रोड आज तक मैंने नहीं देखा है। खासकर पडक़ीडीह रावन और खरोरा रोड में बड़े बड़े गड्ढे हैं। यहां धूल भी बहुत ज्यादा रहती है। कुछ देर पहले ही मेरे सामने जब 2 ट्रक गुजरा तो मुझे कम से कम 30 सेकेंड तक रुकना पड़ा, क्योंकि धूल की वजह से आगे का रास्ता ही नहीं दिखाई दे रहा था।
स्थानीय निवासी का कहना है कि हम रोज इन सडक़ों से गुजरते हैं. गाड़ी गुजरते वक्त जब धूल उड़ता हैं तो कम से कम 20 से 30 मीटर का रास्ता ही दिखाई नहीं पड़ता. यहां 3 से 4 फीट के बड़े बड़े गड्ढे हैं, जहां कभी भी कोई एक्सीडेंट हो सकता है। हम कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
सीमेंट प्लांट की जनसुनवाई में की शिकायत
सीमेंट प्लांट के विस्तार पर हुई जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर पहुंची एक महिला ने बताया कि हमारे घरों में धूल इतनी अधिक है कि न तो हम ठीक से खाना बना पाते हैं और न ही छत पर कपड़े सुखा सकते हैं। घर से बाहर सब तरफ धूल ही धूल है। इस धूल ने हमारी जिंदगी मुश्किल बना दी है।
रवेली के स्थानीय ग्रामीण का कहना है कि रोड के सामने ही मेरा घर है। हम रोजाना धूल खा रहे हैं। छत पर कुछ सूखा नहीं पा रहे हैं। पडक़ीडीह मार्ग पर गर्भवती को ले जा नहीं पा रहे। सडक़ खराब है, जिसके चलते उस रोड से गुजरने वाले कभी बिस्तर से उठ नहीं पाते हैं। दो साल पहले पूरे रवेली गांव के लोगों ने धरना दिया था तो कंपनी और कलेक्टर ने 7 दिन में निराकरण करने का भरोसा देकर धरना समाप्त करया था, लेकिन आज 2 साल बीत जाने के बाद भी सडक़ नहीं सुधार पाए।
सडक़ पर हादसों का बढ़ता खतरा
सबसे ज्यादा खराब स्थिति बलौदाबाजार भाटापारा मार्ग, बलौदाबाजार से सुहेला पडक़ीडीह, हथबंद, सिमगा, बलौदाबाजार विकासखंड के ही ग्राम करना गैलरी, भरसेला मार्ग की है। उड़ती धूल और बड़े बड़े गढ्ढों से राहगीरों का इन रास्तों पर चलना दूभर हो चुका है। यह रोड ग्रामीणों और राहगीरों के लिए बेहद असुरक्षित हो चुका है। ट्रक चालकों का कहना है कि खराब सडक़ों और बढ़ती दुर्घटनाओं के चलते वे हमेशा चिंता में रहते हैं।
पंकज घृतलहरे, ट्रक चालक का कहना है कि इस सडक़ में दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। इन सडक़ों पर ज्यादातर सीमेंट कंपनी जाने वाली बड़ी गाडिय़ां गुजरती हैं। हम हमेशा डरते रहते हैं कि हमारी गाड़ी खराब या फिर कोई बड़ा हादसा न हो जाए। टायर, बेक पट्टी न जाने क्या-क्या टूटता है, मालिक हमको सुनता है, लेकिन प्रशासन ने इस समस्या पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है।
सीमेंट संयंत्रों की वजह से उपजी समस्या
बलौदाबाजार जिले में कई सीमेंट संयंत्र हैं, जिसकी वजह से न केवल वातावरण को प्रदूषित हो रहा है, बल्कि सडक़ की स्थिति भी खराब हो रही है। छत्तीसगढ़ ने भी सीमेंट संयंत्रों के आसपास की स्थिति का जायजा लिया, जहां भारी ओवरलोड वाहनों का संचालन होता है।इन सडक़ों की हालत खस्ताहाल है। बड़े वाहनों की वजह से सडक़ें और ज्यादा खराब हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट की जनसुनवाई में उठे मुद्दे
अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के पास स्थित ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों का कहना था कि जब मुख्यमंत्री और मंत्री करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन करने आते हैं, लेकिन यह सब कागजों तक सीमित रहता है। जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जनसुनवाई में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रशासन के समक्ष कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
बलौदाबाजार जिले के नागरिकों की सबसे बड़ी मांग है कि प्रशासन इस दिशा में फौरन कार्रवाई करे, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके। यदि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं देगी तो आने वाले समय में यह समस्याएं और भी बढ़ सकती है। प्रशासन और संबंधित विभागों से लोगों को उम्मीद है कि खराब सकड़ की समस्याओं को प्राथमिकता दिया जाएगा।


