बलौदा बाजार
दावेदारों के नाम को लेकर अभी से चर्चा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 8 जनवरी। नगर पालिका परिषद बलौदाबाजार के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया मंगलवार को पूरी हो गई। इस बार अध्यक्ष पद अनारक्षित किया गया है। इसके बाद से ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में प्रत्याशी चयन को लेकर खींचतान बढ़ाने की संभावना है। नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए इस बार लॉटरी के बाद सीट अनारक्षित हो गई है, जिससे सभी वर्गों के दावेदारों के लिए अवसर खुल गए हैं। ओबीसी, एसटी, एससी और सामान्य वर्ग के उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। बलौदाबाजार की नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए करीब 20 हजार मतदाता निर्णायक होंगे।
दावेदारों की चर्चाएं
बलौदाबाजार में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों प्रमुख दल के लिए यह चुनाव खासा महत्वपूर्ण है। भाजपा के बलौदाबाजार के प्रत्याशी चयन में कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा, भाटापारा में पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा की सलाह अहम मानी जा सकती है।
1995 से 2020 तक पिछले 6 चुनाव का विश्लेषण करें तो बलौदाबाजार में दो बार सामान्य वर्ग, तीन बार पिछड़ा वर्ग और एक बार सामान्य वर्ग की महिला अध्यक्ष बनी है। इस बार अनारक्षित सीट होने के बावजूद अधिकतर दावेदार ओबीसी वर्ग के ही सामने आए हैं।
भाजपा से कई दावेदार
पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से कई दावेदार सामने आ रहे हैं। वर्तमान अध्यक्ष चितावर जायसवाल इस बार भी प्रमुख दावेदार हैं। इसके अलावा अशोक जैन का नाम भी प्रबल है, जो दो बार स्वयं और एक बार उनकी पत्नी अंजू जैन के कार्यकाल के अनुभव के आधार पर मजबूत माने जा रहे हैं। भाजपा से तीन बार के पार्षद रोहित साहू जितेन्द्र महले और विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अभिषेक तिवारी संजू पटेल भी संभावित उम्मीदवारों की दौड़ में है।
कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार
कांग्रेस से प्रमुख दावेदारों में पार्षद रूपेश ठाकुर, पार्षद सुरेंद्र जायसवाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विक्रम पटेल और धर्मेंद्र वर्मा का नाम चर्चा में है। इसके साथ ही चौंकाने वाले नाम में चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जुगल भट्टर का नाम भी सामने आ सकता है।
अन्य प्रत्याशियों और तीसरे मोर्चे की भी तैयारी
भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य दल बागी और निर्दलीय की प्रत्याशी भी इस बार चुनाव में भाग्य आजमाने को तैयार है। तीसरा मोर्चा और निर्दलीय उम्मीदवारों की उपस्थिति से मुकाबला रोचक होने की संभावना है। इस बार की सामान्य सीट ने सभी वर्गों को बराबरी का मौका दिया है। देखना यह है कि शहर के 20 हजार मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं।
लंबी हो सकती है दावेदारों की सूची, नए चेहरे आएंगे
सामान्य वर्ग में आरक्षण के कारण अध्यक्ष पद के लिए कई नए और पुराने चेहरे अपनी दावेदारी पेश करेंगे। बलौदा बाजार क्षेत्र में दोनों पार्टियों में पहले से ही अध्यक्ष पद के लिए कई इच्छुक उम्मीदवार थे, लेकिन सामान्य वर्ग का आरक्षण तय होने के बाद दावेदारों की सूची और भी लंबी हो गई है। यह स्थिति भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रत्याशी चयन के मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
चुनावी घमासान की तैयारी सामान्य वर्ग के आरक्षण के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। वोट बैंक मजबूत करने के लिए पार्टियां नई रणनीति बना रही है। निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की भी संभावना है।


