बलौदा बाजार

अहिल्या बाई होलकर जन्म जयंती समारोह
28-Dec-2024 2:56 PM
अहिल्या बाई होलकर जन्म जयंती समारोह

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 28 दिसंबर।
आयोजन समिति जिला बलौदाबाज़ार द्वारा नगर के स्वामी आत्मानंद (हिंदी माध्यम)शास.बहु.उ. माध्य.विधालय बलौदाबाज़ार में लोकमाता देवी आहिल्या बाई होलकर व्यक्तित्व, कतृत्व एवं नेतृत्व विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अहिल्या बाई होल्कर त्रिशाब्दी जन्म जयंती समारोह छत्तीसगढ़ प्रांत के दायित्ववान सदस्य डॉ. वर्णिका शर्मा उपस्थित रहीं, वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य बी. सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में खोड़स राम कश्यप उपस्थित रहे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में अहिल्या बाई होलकर त्रिशताब्दी जन्म जंयती समारोह के जिला अध्यक्ष जयनारायण केशवानी उपस्थित रहे। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में शालीन साहू , जिला कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, ब.बाज़ार ने देश की गौरवशाली नारीयों पर सतत् आयोजन की भुमिका पर प्रकाश डाला तथा अहिल्या बाई होलकर के जीवन के न्याय प्रियता की चर्चा की।  मुख्य अतिथि खोड़स कश्यप ने नारी के अंदर निहित अंतर, बाह्य शक्ति को जानने की बात करते हुए कहा कि होलकर के जीवनी के माध्यम से हम सभी भी अपना एक आदर्श जीवन बना सकते हैं। 

मुख्य वक्ता डॉ. वर्णिका दीदी ने प्रेरणादायी पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्या बाई होलकर के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुई उनके बहुमुखी व्यक्तित्व की चर्चा की। उन्होंने बताया कि वह एक आदर्श नारी, एक न्याय प्रिय प्रशासन संचालिका, धर्म परायण नारी, एक आदर्श बहू, एक आदर्श पत्नी, एक आदर्श माता  ऐसे जीवन कि सभी भुमिकाओं में सर्व श्रेष्ठ थी। एक बहुमुखी व्यक्तित्व के साथ उनका कर्तृत्व भी अद्वितीय है। उन्होंने मंदिरों का निर्माण / जीर्णोद्धार किया, उन्होंने महिला सैन्य शक्ति का गणन किया, उन्होंने शस्त्रागार बनाएं, उन्होंने तीर्थों में कुएं, बावड़ी, विश्राम गृह, भोजन गृह बनायें, उन्होंने नवीन राजधानी बनायी, उन्होंने आवागमन की सुगमता के लिए मार्ग बनावायें। 

इसके साथ ही वह कुशल नेतृत्व कर्ता भी थी  चाहे एक सेना नायक के रूप में, चाहे शासन की मुखिया के रूप में, चाहे सर्वोच्च न्याय कर्ता के रूप में सभी भूमिका में वह अद्वितीय थी ।
 डॉ. वर्णिका ने आगे छात्र छात्राओं से अपने सारगर्भित वाणी व , प्रभावशाली शैली से , आह्वान किया की ऐसे अद्वितीय व्यक्तित्व के गुणों को अपने जीवन में उतार कर यदि आज की पीढ़ी आगे बढ़े तो बहूत सम्भावना हैं की हम अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष के पुर्व ही विकसित राष्ट्र के रूप में खड़े होगें आवश्यकता हैं तो केवल ऐसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर केवल मैं, मेरा तक समिति न रहकर इसके साथ राष्ट्र का भी चिंतन करने की इस  हेतु अपना थोड़ा तन - मन - धन समर्पित करने की। 

कार्यक्रम के अंत में समिति के सचिव हेमंत टिकरिहा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्राध्यापक वर्मा ने किया। 
इस अवसर पर विधालय के प्राध्यापक गण, छात्राओं सहित समिति के सचिव हेमंत टिकरीहा, शालीन साहू, नारायण चन्द्राकर , टेसू लाल धुरंधर , किरण वर्मा दीदी सहित नगर के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।


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