बलौदा बाजार
10 साल में नहीं बनी चौपाटी, सभी तालाब गंदगी और जलकुंभी से पटे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 19 दिसंबर। नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ती पर है, पांच साल बाद फिर से जनता अपनी पसंद का अध्यक्ष चुनेगी तो वहीं शहर के 21 वार्ड के लिए 100 से अधिक प्रतिद्वंदी ताल ठोकेंगे। पुराने जनप्रतिनिधि जनता का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं तो वहीं जनप्रतिनिधियों को उनका रिपोर्ट कार्ड दिखाकर कटघरे में खड़े करने के लिए तैयार बैठी जनता अपने विकल्पों का आकलन कर रही है।
जनप्रतिनिधि बनने का सपना देख रहे नए चेहरे भी सक्रिय हो गए हैं। कुछ नेता वरिष्ठ नेताओं की खुशामद मे जुटी है तो कुछ गली मोहल्लों में घूम कर लोगों से दुआ सलाम कर रहे हैं।
प्रदेश की भाजपा सरकार इस समय संगठन चुनाव और पंचायत चुनाव के एक साथ करने की चुनौती से जूझ रहे हैं। केंद्र सरकार का दबाव है कि पंचायत और निकाय चुनाव समय पर कराया जाए जबकि प्रदेश सरकार इन्हें कुछ समय के लिए डालने का प्रयास कर रही है। चुनावी तैयारी और संगठन की मजबूती के बीच संतुलन बैठाना सरकार के यह कठिन साबित हो रहा है। हालांकि फरवरी में पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना लगभग है मानी जा रही है।
अधूरे प्रोजेक्ट और खोखले दावे
इस पर उसे अपनी उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ जनता द्वारा उठाए गए सवालों और कर्मियों का भी जवाब देना होगा। शहर के विकास और योजनाओं को लेकर नगर पालिका के दावे यहां कमजोर नजर आ रहे हैं, वहीं जनता को अब भी नहीं बुनियादी सुविधाओं की कमी खल रही है।
खंडहर में तब्दील हो चुकी करोड़ों रुपए की लागत से बनाया जा रहा है। चौपाटी का निर्माण पिछले 10 साल से पूरा नहीं हो पाया है। इससे नगर पालिका की सबसे बड़ी असफलता की तौर पर देखा जा रहा है। यह परियोजना न केवल स्थानीय पर्यटन और बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि इससे व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते थे। इसके बावजूद इसे पूरा करने में नाकामी ने प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े किए हैं।
पालिका की उपलब्धि-कमियां...
पालिका क्षेत्र -सभी तालाब जलकुंभी और गंदगी से पटे पड़े हैं। भरी गर्मी में विशाल पिपरा तालाब को गहरीकरण के नाम पर खाली करने निस्ताररी का संकट खड़ा करने वाली पालिका ने गहरीकरण नहीं किया।
मुख्य बाजार - महिलाओं की बुनियादी सुविधाओं की कमी बाजारों में खरीदारी के लिए दूर-दराज से आने वाली महिलाओं के लिए कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं है। महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। जबकि यही प्राथमिकता थी।
शहर के फुटपाथ -मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया केवल आधे अधूरे तरीके से की गई। दो दिनों तक चल रही कार्रवाई के बाद प्रशासन इसे भूल गया। फुटपाथ संकरे हो गए।
मुख्य मार्ग -मटन और सब्जी विक्रेताओं की समस्या पहंदा रोड पर मटन मार्केट को व्यवस्थित करने के लिए कुछ समय तक प्रयास किया गया। कई दुकानदार फिर से पुराने स्थान पर लौट आए हैं।
वादे खोखले साबित हुए
रिटायरमेंट प्रोफेसर एस एन ने कहा कि पालिका के लिए यह समय आत्म निरीक्षण का है। समझना होगा कि वह घोषणाएं और योजनाएं बनाना काफी नहीं है जनता की जरूरतों का पर काम करना है।


