बलौदा बाजार

सरकारी स्कूलों में हर बच्चे पर 23 हजार खर्च, लेकिन न अक्षर का ज्ञान और न ही अंकों का
16-Dec-2024 3:21 PM
 सरकारी स्कूलों में हर बच्चे पर 23 हजार खर्च,  लेकिन न अक्षर का ज्ञान और न ही अंकों का

इतनी ही फीस में निजी स्कूलों में अंग्रेजी स्पोर्ट्स कंप्यूटर सिखाया जाता है

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
बलौदाबाजार,16 दिसंबर।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार शिक्षण व्यवस्था को सुधारने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। सरकार स्कूलों में शिक्षा के नाम पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं लेकिन शिक्षा के बिगड़ते हालात में अब तक कोई सार्थक परिवर्तन नहीं आया है। कहने को तो सरकारी स्कूलों में प्राइवेट से दुगनी यानी 30 से ज्यादा एक्टिविटी है लेकिन टीचर इन्हें करने की बजाय डाटा अपडेट करने में ही लगे रहते हैं। 

‘छत्तीसगढ़’ ने स्कूल शिक्षा विभाग के 2023-24 के खर्च का ब्यूरो निकला। खर्च किए बजट में पाया कि इस साल शिक्षा विभाग व शिक्षा ने जिले के शासकीय स्कूलों में पहली से 12वीं तक पढऩे वाले 2 लाख 56 हजार 15 बच्चों पर 579 करोड़ 87 लाख 20 हजार 38 खर्च किए गए हैं। 

इस हिसाब से एक बच्चे पर पूरे साल में 23 हजार 40 खर्च हुए, यह बलौदाबाजार के कई नामी निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के खर्च के बराबर या उससे ज्यादा भी है। इतनी फीस में एक सीबीएसई स्कूल बच्चों को अंग्रेजी भाषा कंप्यूटर एजुकेशन स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग और ऐसी ही 10 से 12 एक्टिविटी सिखाई जाती है। जबकि शासकीय स्कूलों में बच्चों के शिक्षा का स्तर ऐसा है की पांचवी कक्षा में पढऩे वाले बच्चों को न तो 10 तक का पहाड़ा आता है और न ही अक्षर  का ज्ञान बल्कि जिले के 8.30 हजार शिक्षकों को 1 साल में 490 करोड़ रुपए वेतन के रूप में सिर्फ पढऩे के लिए दिए जाते हैं। साल भर कई ट्रेनिंग प्रोग्राम भी होते हैं। 

छात्र बोला पहाड़ आता है लेकिन क, ख, ग, नहीं
बलौदाबाजार से लगे शासकीय प्राथमिक शाला के अंदर एक क्लास लगी मिली सभी बच्चे आपस में बातें करते दिखे पांचवी के रोहन ध्रुव बदला हुआ नाम ने पूछने पर बताया कि उसे पहाड़ तो छह तक आता है मगर उसे क, ख, ग, पूरा नहीं आता। दूसरे बच्चों का भी यही हाल था। 

फुटी पाइपलान छत से टपकता पानी बाजू में क्लास 
सदर रोड स्थित बेसिक स्कूल में टीम पहुंची तो स्कूलों में गंदगी का आलम था तो कक्षा चौथी की क्लास में जहां सिर्फ 10 12 बच्चे ही मौजूद थे। कक्षा तीसरी में पढऩे वाले सोमनाथ यादव, प्रियाशी यादव, आशीष, गजेंद्र, काव्या कुर्रे, नाम बदला हुआ या पांचवी कक्षा के हिमांशु यादव, हिमांशु पटेल पूर्णिया पटेल बदला हुआ नाम किसी को भी 10 तक का पहाड़ा नहीं आता। ना वे अ, आ, इ, ई स्वर्णमाला का ज्ञान था ऐसे में उनके लिए प्रति निबंध लिख पाना या गणित का कोई प्रश्न हल कर पाना संभव ही नहीं दिख रहा था। इसी तरह सुहेला प्राइमरी स्कूल, ओटगन स्कूल, भरवाडीह, खपरी रवान सहित अन्य शासकीय स्कूलों का भी यही हाल है। 

शासन से यह राशि मिलती है
योजना                      शासन से प्राप्त राशि 
छात्रवृत्ति                      135855765 
पाठ्य पुस्तक                288210000
गणेश                            73346400 
साइकिल                        40489200 
क्रीडा                              6000000
मध्यान भोजन                251487990 
रसोइया मानदेय              51924000 
विद्युत बिल                      20088959 
वेतन                            4995917724 
टटा पट्टी                          55000000 
फर्नीचर                        203000000 
मरम्मत                            4400000
लैब खर्च                        100000000
लाइब्रेरी खर्च                    100000
डीजल स्टेशनरी                500000 एवं अन्य खर्च 
योग                                5898720038 

शिक्षा स्तर अच्छा है डीईओ 
वही इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने कहा कि स्कूलों में शिक्षा स्तर अच्छा है और अच्छा करने प्रयास जारी है। 

 


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