बलौदा बाजार
तिरुपति प्रसाद विवाद : 30 की जगह 10 फीसदी ही घी ज्योत जलेगी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 30 सितंबर। हाल ही में तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी में चर्बी मिलने के खुलासे ने देवी मंदिरों में घी से मनोकामना ज्योत जलने की परंपरा पर बाधा पहुंचा दी है।
मंदिर समितियां से मिली जानकारी के अनुसार जिले के सभी प्रमुख मंदिरों में जलने वाली ज्योत में 70 फीसदी तेल तो 30 फीसदी घी की जोत श्रद्धालुओं द्वारा जलाई जाती थी। मगर इस वर्ष घी की ज्योत जलने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सिर्फ 10 फीसदी ही रह गई है। वहीं सबसे अधिक जोत प्रज्वलित करने वाले मां मावली मंदिर, महामाया मंदिर समिति सहित जिले के अधिकांश मंदिर समितियों ने घी की ज्योत जलाने से मना कर दिया है।
इधर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त ने राज्य के सभी कलेक्टरों सहित जिले के कलेक्टर को भी पत्र भेजा है। जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नवरात्र के दौरान मंदिरों में केवल देवभोग ब्रांड का घी ही इस्तेमाल किया जाए। जिले में करीब 5000 मनोकामना ज्योत जलाए जाते हैं।
मां मावली मंदिर में सिर्फ तेल से ही ज्योत जलेंगे
मां मावली मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र वैष्णव कोषाध्यक्ष छल्ला साहू ने बताया कि मावली मंदिर में हर नवरात्र को लगभग 700 और 300 घी की ज्योत श्रद्धालु द्वारा प्रज्वलित होती थी, लेकिन हाल में घटनाक्रमों ने भक्तों में एक गहरी चिंता पैदा कर दी है। जब लोगों ने देखा कि प्रसाद के घी में चर्बी जैसे अशुद्धता पाई गई है तो उनके मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या उनका दिया गया घी वास्तव में शुद्ध है, इसी के चलते समिति ने फैसला लिया है कि मनोकामना ज्योत सिर्फ तेल की ही जलाई जाएगी।
कम पैसे में 9 दिनों तक घी ज्योत जलना संभव नहीं
कुछ मंदिर समितियां द्वारा इस वर्ष भी घी की ज्योत का 851 रुपए रखा गया है, जबकि महामाया के वरिष्ठ कार्यकर्ता रामाधार पटेल, बुधराम अग्रवाल ने बताया कि एक ज्योत चलने में नवरात्र के नौ दिनों में लगभग 3.30 किलो घी की खपत होती है। शुद्ध घी की कीमत बाजार में 1000 से लेकर 1200 रूपए तक है, तो देवभोग जैसे सरकारी घी की कीमत भी 700 रूपए किलो है ऐसे में एक ज्योत जलने का खर्च ही 2500 से 3500 रुपए तक पड़ता है। ऐसे में 851 रुपए में शुद्ध घी की ज्योत जलवाना हमारे लिए तो संभव नहीं है।
महामाया में सिर्फ देवभोग से ही जलेगी घी की ज्योत
बस स्टैंड स्थित महामाया मंदिर की समिति ने भी इस बार सिर्फ तेल की ज्योत की ही रसीद काटी जा रही है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष रोहित साहू ने बताया कि इस बार तेल की ज्योत जलाई जा रही है और सभी इस बार तेल की ज्योत तेल की ही ज्योत जलता रहे हैं। मगर एकाद दो लोग ऐसे भी हैं जो घी की ज्योत ही जलवाना चाहते हैं तो उनके लिए समिति सिर्फ सरकारी देवभोग घी का ही इस्तेमाल करेगी, इसका शुल्क 2501 रुपए रखा गया है।
काली माता मंदिर में सिर्फ तेल की ज्योत जलने की परंपरा
वही अर्जुनी के काली मां मंदिर में सालों पुरानी परंपरा के चलते सिर्फ तेल की ज्योत जलाई जाती है। यहां के पुजारी सुरेश वर्मा का कहना है कि तेल के ज्योत जलाने के फायदे भी हैं। यह अधिक स्थायी और दीर्घकालीन होती है। तेल का उपयोग करने से लागत भी कम होती है।
जिले के लवन स्थित महामाया मंदिर जहां रिकॉर्ड 3200 ज्योत जलाई जाती है। यहां के पुजारी भावेश तिवारी ने बताया कि यहां पर 700 तेल एवं 1051 की ज्योत का शुल्क रखा गया है घी की एक ज्योत जलने में खर्च तो ज्यादा आता है मगर श्रद्धालुओं से सिर्फ 1051 रुपए ही लिया जाता है जबकि तेल की ज्योत का 700 रुपए शुल्क है।


