बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 5 अगस्त। कॉलोनाइजर ने खेती जमीन का रास्ता बंद किया था। सर्राफ परिवार की बेटियों को 9 साल बाद अदालत से रास्ता मिला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला इस प्रकार का है कि पंचशील नगर बलौदाबाजार से लगा निर्माणाधीन कॉलोनी प्रतिष्ठा के दोनों बिल्डर्स नितेश शर्मा व आनंद सर्राफ द्वारा कॉलोनी से लगी मधु सर्राफ एवं उसकी अन्य 6 बहनों के 10 एकड़ की भूमि पर आने-जाने के रास्ता को दीवार उठाकर बंद कर दिया गया। जिसके कारण मधु एवं उसकी बहने अपनी भूमि पर आ-जा नहीं पाने के कारण न ही खेती कर पा रहे थे और न ही बेच पा रहे थे, जबकि प्रतिष्ठा कॉलोनी वाली भूमि से उसके पूर्व स्वामी अब्दुल जब्बार के जीवनकाल से लगभग 54-55 साल से मधु एवं उसकी बहनों द्वारा अपने पिता के समय से निरंतर आना-जाना करने के कारण उन्हें उक्त भूमि पर आने-जाने का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया था, जिसे प्रतिष्ठा कॉलोनी के दोनों बिल्डर्स द्वारा इसलिए बंद कर दिया गया था ताकि मधु सर्राफ वगैरह अपनी उक्त भूमियों को किसी अन्य के पास बिक्री न कर सकें। मधु एवं उसकी बहनों द्वारा अपने अधिवक्ता सतीश चन्द्र श्रीवास्तव के माध्यम से मार्गाधिकार का वाद दोनों बिल्डर्स सहित प्रतिष्ठा कॉलोनी में प्लाट खरीदने वाले सभी लोगों के विरूद्ध न्यायालय में पेश किया गया था।
9 साल की लंबी लड़ाई लडऩे के पश्चात् वरिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश मंजूलता सिन्हा द्वारा निर्णय पारित कर दोनों बिल्डर्स को मधु वगैरह का रास्ता बंद नहीं किये जाने का आदेश दिया गया है। अधिवक्ता सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने उक्त संबंध में बताया कि वर्ष 2015 से आज तक मधु और उसकी बहनें न ही अपने खेत पर जा सके और न ही खेती कर सके, जिसके कारण उन्हें 20 लाख रूपये से ज्यादा का नुकसान भी उठाना पड़ा है।
वहीं इस मामले को लेकर मधु सर्राफ ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, किंतु पराजित नहीं, 9 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मुझे अपने अधिवक्ता सतीश चन्द्र श्रीवास्तव के माध्यम से रास्ते की जंग में न्यायालय से इंसाफ मिला है।


