राष्ट्रीय

12-Apr-2021 7:52 PM 18

नई दिल्ली, 12 अप्रैल: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 12 करोड़ की प्रतिबंधित दवाइयां बरामद कर चार लोगों को गिरफ़्तार किया है.ये दवाएं अवैध तरीके से तस्करी कर विदेश भेजीं जा रही थीं. खास बात है कि दवाओं की खरीद फरोख्त डार्कनेट के जरिये की जा रही थी. NCB ने आगरा ,बलिया और दिल्ली में छापेमारी कर इन 4 लोगों के. अग्रवाल, के. गोयल, सोमदत्त और मनीष को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि ये सभी प्रतिबंधित दवाओं की अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त कर तस्करी के जरिये उन्हें अमेरिका ,ब्रिटेन ,यूरोप समेत कई देशों में भेजते थे. एनसीबी ने हरिद्वार की एक दवा कंपनी में छापेमारी कर 30 लाख से ज्यादा नशीली दवाइयां और 70 हज़ार खांसी के सीरप बरामद किए हैं जिनकी कीमत 12 करोड़ आंकी गई है.

एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर (ऑपेरशंस)  केपीएस मल्होत्रा ने बताया,' दो लोग आगरा से अरेस्ट हुए हैं. जो आगरा से पहला अरेस्ट हुआ है उससे ऑपेरशन स्टार्ट हुआ. उसका रोल यह था कि वह डार्क नेट से दवा लेता था और फिर आगे उसे भिजवाता था. जिस शख्‍स से वो ड्रग्स लेता था वो भी आगरा का ही निकला है.'एनसीबी के मुताबिक इस ऑपरेशन को 3 महीने में अंजाम दिया गया, जांच में पता चला कि आगरा का कारोबारी के. अग्रवाल इस तरह की दवाएं खरीदता है जबकि आगरा का ही दवा विक्रेता के. गोयल उसे दवा बेचता है. ये दवाएं हरिद्वार की एक दवा कंपनी से अवैध तरीके से आ रहीं थीजबकि इन दवाओं को बलिया का मनीष और दिल्ली का सोमदत्त अपनी पहचान छिपाकर विदेश भेजते थे. दवाएं हर्बल पैकिंग में छिपाकर भेजीं जा रहीं थीं.खास बात ये है कि दवाओं की खरीद फरोख्त डार्कनेट के जरिये हो रही थी वहीं से एनसीबी को इस गैंग का सुराग मिला.

केपीएस मल्होत्रा बताते हैं, ' अगर आप नेट पर जाए तो वहां 2 तरह के नेट हैं,एक तो सरफेस नेट है जिसको हम गूगल के जरिये एक्सेस कर सकते हैं जिसकी वेबसाइट हैं जिसके सर्वर हैं. डार्कनेट एक अलग तरह का नेट हैं जिसके कोई सर्वर नहीं हैं. उसमें एक अलग तरह का मार्केट है, उसे एक्सेस करने के लिए एक अलग तरह का सॉफ्टवेयर चाहिए जैसे टोर है, इसमें आपको पहले लिस्ट कराना होता है तभी आप प्रोडक्ट बेच सकते हैं. मामले में दवा कंपनी के मालिक की एनसीबी तलाश कर रही है. गौरतलब है कि एनसीबी ने इस साल 36 करोड़ से ज्यादा की प्रतिबंधित दवाएं बरामद की हैं. (ndtv.in)


12-Apr-2021 7:50 PM 34

नई दिल्ली, 12 अप्रैल : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के के विधानसभा चुनाव के रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि ममता बनर्जी बड़े मार्जिन से जीत हासिल करने वाली हैं. उन्होंने NDTV से खास बातचीत में कहा कि ''बंगाल में एंटी इनकम्बेंसी कुछ स्थानों पर है. यह तृणमूल के लोकल लीडर्स के खिलाफ है, जिसे पार्टी ने पिछले एक वर्ष में दूर करने की कोशिश की है. ममता के खिलाफ असंतोष नहीं है वह अब भी बंगाल की सबसे लोकप्रिय नेता हैं. हमारा फार्मूला है कि कम से कम 45 फीसदी वोट लेने हैं. जो भी बंगाल को समझता है, बताएगा कि तृणमूल और ममता के पक्ष में महिलाएं बड़ी संख्‍या मे निकलकर आ रही हैं. मैंने 8-10 साल के अनुभव में किसी महिला को इतना लोकप्रिय नहीं देखा है जितनी ममता हैं. मेरा आकलन है कि ममता बनर्जी जीत रही हैं, बड़े मार्जिन से जीत रही हैं.''

प्रशांत किशोर ने कहा कि ''बीजेपी ताकतवर है, इससे इनकार नहीं है. मैं किसी को कम करके नहीं आंकता हूं. मुझे लगता है कि आपको अपने अपोनेंट को अंडर एस्‍टीमेट नहीं करना है. बीजेपी जैसी बड़ी पार्टी को हमारे जैसे साधारण शख्‍स की जरूरत नहीं है.'' उन्होंने कहा कि ''मोदी जी की पापुलरिटी एक फैक्टर है. यहां पर जो ध्रुवीकरण है वह फैक्टर है. दलित समाज के लोगों में से एक बड़ा फैक्टर बीजेपी को सपोर्ट कर रहा है और हिंदी भाषियों की बीजेपी पर बड़ी पकड़ है, यह फैक्टर है.''

उन्होंने कहा कि ''जो भी पार्टी 10 साल सत्ता में रहेगी उसके खिलाफ कुछ हद तक एंटी इनकम्बेंसी रहेगी ही. मेरे जैसे व्यक्ति के लिए काम यह है, यह समझना है कि एंटी इनकम्बेंसी किसके खिलाफ है. क्या लोकल लीडर के खिलाफ है, क्या पार्टी के खिलाफ है या क्या ममता बनर्जी के खिलाफ है? कुछ पॉकेट में इसके अलावा भी लोगों में गुस्सा हो सकता है. इन सबके बाद भी जितने भी फैक्टर कंसीडर करें, तो ममता बनर्जी वेस्ट बंगाल की आज भी सबसे कद्दावर नेता हैं.''

प्रशांत किशोर ने कहा कि ''हम लोगों का फार्मूला यह है कि हमें कम से कम 45% वोट लेना है. महिला वोटर से एक तरह का एडवांटेज तृणमूल कांग्रेस को खास तौर पर दिख रहा है. महिलाएं बड़ी संख्या में निकलकर आ रही हैं. क्लब हाउस में पब्लिकली बात हुई है. मैंने उसमें ऑफिशियल यह कहा है कि हम वही बात यहां पर कह रहे हैं जो हम अदर वाइज पब्लिकली कहेंगे.''

प्रशांत किशोर ने कहा कि ''एक मैनेजर के तौर पर मेरी मेरा अपना तरीका है कि मेरा जिसके खिलाफ काम्पटीशन है, उसको मैं कम करके नहीं आंकता हूं. मेरी रणनीति यही बताती है कि हमें अपने विरोधी को अंडर एस्टीमेट नहीं करना है. मुझसे पूछा जाता है कि आप चुनाव का संचालन कैसे करते हैं? तो मेरा यह कहना है कि हम वह सारे काम करते हैं जिससे चुनाव जीतने में मदद मिले. हर वह चीज जो पार्टी और लीडर समझते हैं कि मैं उसमें उनकी मदद कर सकता हूं, या कॉन्ट्रीब्यूट कर सकता हूं, तो वह मैं करता हूं. हम लोग कभी किसी को चुनाव जिता या हरा नहीं सकते हैं. वीआर हाईली ओवररेटेड. मैंने राजनीति में शुरुआत की थी, मैं पूरी तरीके से फेल हो गया और मुझे ऐसा बोलने में कोई झिझक नहीं है.'' (ndtv.in)


12-Apr-2021 7:40 PM 19

नई दिल्ली, 12 अप्रैल: केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा कम करने के लिए 2 घंटे से कम की उड़ानों में खान-पान सेवा पर रोक लगा दी है. देश में कोरोना वायरस के केसों में तेजी से हो रहे इजाफे के मद्देनजर यह कदम उठाया है.नागर विमान मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई. गौरतलब है कि भारत इस समय कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहा है और हर दिन कोरोना के केसों में पहले की तुलना में इजाफा हो रहा है.कोरोना केसों के मामले में भारत इस समय दुनिया में दूसरे स्‍थान पर है. भारत से ज्‍यादा केस इस समय अमेरिका में ही हैं. ब्राजील इस सूची में तीसरे स्‍थान पर हैं.

भारत में सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के करीब 1.69 लाख नये मामले सामने आए हैं. आज लगातार छठा दिन है, जब देश में एक लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले देखने को मिले हैं. इसके अलावा देश में पिछले 24 घंटों में 904 मरीजों की कोरोना के कारण मौत हुई है. नए मामलों और मौतों के लिहाज से सोमवार का दिन बेहद डराने वाला रहा.

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में पिछले 24 घंटों में 1,68,912 नए कोरोनावायरस केस दर्ज किए गए हैं, जो एक दिन में रिकॉर्ड हुए केसों का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके साथ ही देश में अब तक दर्ज हुए कुल कोविड केसों की तादाद 1,35,27,717 हो गई है. इसके अलावा, पिछले 24 घंटों के दौरान देश में 904 मरीज़ों की इस घातक संक्रमण की वजह से मौत भी हुई है, और भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या 1,70,179 हो गई है. (ndtv.in)

 


12-Apr-2021 7:37 PM 18

मुंबई, 12 अप्रैल : मुंबई से एक बार फिर पलायन शुरू हो गया है. लॉकडाउन की आशंका से प्रवासी मजदूर  मुंबई (छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ने के कारण सेमी लॉकडाउन के बाद अब पूर्ण लॉकडाउन  के डर से मुंबई से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है. कुर्ला में लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर भारी भीड़ बढ़ने लगी है. इस भीड़ में ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग हैं जिनका काम-धंधा बंद हो चुका है. उनका कहना है कि यहां भूखों मरने की नौबत आ गई है तो रहकर क्या करें?

मुंबई के कुर्ला टर्मिनस पर भारी भीड़ का नजारा अब आम होने लगा है. टिकट नहीं मिल रहा है. बिना टिकट रेल गाड़ी में बैठ नहीं सकते लेकिन फिर भी लोग तपती धूप में पड़े हैं.

मध्य रेलवे का कहना है कि बिना रिजर्वेशन टिकट के इस बार किसी को भी यात्रा करने की इजाजत नहीं है. मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने कहा कि ''जो यात्री तुंरत सफर करना चाहते हैं उनके लिए समर स्पेशल है या तत्काल टिकट ले सकते हैं. बिना टिकट किसी को जाने की इजाजत नहीं है.''

मुंबई में रोजी रोटी कमाने आए इन मजदूरों को एक बार फिर मुंबई पराई लगने लगी है, वजह है बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन का डर. सवाल है कि जब रोजगार ही नहीं रहेगा तो खाएंगे क्या? प्रवासी मजदूरों के लिए साल भर में ही दुबारा मुंबई से पलायन इस कदर दुखदाई है कि इनमें से कई शायद ही वापस फिर मुंबई आएं. (ndtv.in)

 

 


12-Apr-2021 7:34 PM 32

नई दिल्ली, 12 अप्रैल:  ऐसे समय जब देश के पांच राज्‍यों में चुनाव प्रक्रिया आधी से अधिक खत्‍म हो चुकी है, बीते करीब 15 दिनों में यहां कोरोना के पॉजिटिव मामलों में करीब दोगुनी वृद्धि हुई है. पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्‍यों में तो चुनाव आयोग की ओर से वोटिंग की तारीख घोषित किए जाने के पहले ही चुनाव प्रचार शुरू हो गया था. चुनाव आयोग की ओर से तारीखें घोषित होने के बाद जोरशोर से प्रचार शुरू हुआ और इस दौरान कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ती भी देखीं गई. यही कारण है कि पिछले 14 दिनों में  केसों में करीब काफी फीसदी का इजाफा देखा गया है. 

सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्‍य पश्चिम बंगाल (चुनावी राज्‍यों में) है जहां 378 फीसदी चेंज हुआ है. यहां कोरोना के केसों की संख्‍या 30,230 तक पहुंच गई है. राज्‍य में आठ चरणों में चुनाव होने हैं जिसका आखिरी और अंतिम दौर 27 अप्रैल को खत्‍म होगा. चुनाव आयोग पोलिंग सेंटर्स में पूरी ऐहतियात बरत रहा है. शरीर का तापमान लिया जा रहा है, हैंड सेनेटाइजर भी उपलब्‍ध कराया गया है और वोटरों के बीच सोशल डिस्‍टेसिंग का पालन कराया जा रहा है. लेकिन प्रयार के दौरान न तो पार्टियां और न ही नेता और उनके समर्थक, कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते नजर आए हैं. 

कोरोना संकट की विकरालता को आंकते हुए चुनाव आयोग ने शुक्रवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि जो प्रत्‍याशी और स्‍टार चुनाव प्रचारक कोविड-19 सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके प्रचार पर बैन लगाया जा सकता है. वैसे यह अलग बात है कि आयोग की ओर ये यह घोषणा ऐसे समय आई है जब चुनाव की आधी से अधिक प्रक्रिेया पूरी हो चुकी है. कोरोना केसों के मामले में अन्‍य राज्‍यों की स्थिति भी बंगाल से बहुत ज्‍यादा अलग नहीं है. असम में केसों में 331% इजाफा देखा गया है. तमिलनाडु में भी कोरोना केसों में 173 फीसदी इजाफा हुआ है. यूटी पुदुच्‍चेरी में पिछले 14 दिनों में केस 173 फीसदी की रफ्तार से बढ़े हैं. दक्षिण के राज्‍य केरल में पिछले 14 दिनों में नए केसों में 84 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. (ndtv.in)


12-Apr-2021 7:30 PM 16

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्‍नर परमबीर सिंह की ओर से लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के मामले में केंद्रीय जांच ब्‍यूरो (CBI) ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को मंगलवार को तलब किया है.गौरतलब है कि देशमुख ने इसी माह महाराष्‍ट्र के गृह मंत्री पद से इस्‍तीफा दे दिया था. बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से परमबीर सिंह द्वारा महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों की 15 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच करने का CBI को निर्देश दिए जाने के बाद उन्‍होंने इस्‍तीफा दिया था.

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्‍त परमबीर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने गृहमंत्री अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी. परमबीर के आरोपों के अनुसार,देशमुख ने कई पुलिस अधिकारियों को हर माह 100 करोड़ रुपये की वसूली का निर्देश दे रखा था. उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया था.सीबीआई जांच के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ महाराष्‍ट्र सरकार और अनिल देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी लेकिन SC ने CBI जांच के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

100 करोड़ रुपये हर माह वसूली करने के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर बताया था. सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के बांबे हाईकोर्ट के आदेश पर गुरुवार को कहा कि इसमें गलत क्या है, क्या ऐसे मामलों की जांच स्वतंत्र जांच एजेंसी से नहीं कराई जानी चाहिए. कोर्ट ने जांच में रोक या दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच जारी रहेगी. (ndtv.in)


12-Apr-2021 7:27 PM 32

नई दिल्ली, 12 अप्रैल : देश के 10 राज्यों- महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में कोरोना वायरस के रोजाना के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और कुल दैनिक मामलों के 83.02 प्रतिशत मामले इन्हीं राज्यों में ही सामने आए हैं. भारत में कोरोना वायरस के दैनिक मामले लगातार बढ़ रहे हैं और पिछले 24 घंटे में संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक 1,68,912 मामले सामने आए हैं. महाराष्ट्र में सर्वाधिक 63,294 दैनिक मामले सामने आए है. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 15,276 और दिल्ली में 10,774 नए मामले आए हैं. महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, दिल्ली, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, केरल, तेलंगाना, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में नए मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है. भारत में उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 12,01,009 हो गई है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 8.88 प्रतिशत है. देश में एक दिन में उपचाराधीन लोगों की संख्या में 92,922 मामलों की बढ़ोतरी हुई. 

देश के कुल उपचाराधीन मामलों के 70.16  प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और केरल में हैं. कुल एक्टिव केसेज के 47.22 प्रतिशत केवल महाराष्ट्र में हैं. भारत में संक्रमित होने के बाद अब तक 1,21,56,529 मरीज ठीक हो चुके हैं और पिछले 24 घंटों में 75,086 लोग स्वस्थ हुए हैं. इसके अलावा, दैनिक मृतक संख्या भी लगातार बढ़ रही है और पिछले 24 घंटे में 904 लोगों की इस बीमारी से मौत हो गई. कुल मृतक संख्या में से मौत के 89.16 प्रतिशत मामले 10 राज्यों में सामने आए. महाराष्ट्र में सर्वाधिक लोगों (349) की मौत इस वायरस से हुई. इसके बाद छत्तीसगढ़ में 122 लोगों की मौत हुई. 

पिछले 24 घंटे में नौ राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों- ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, दमन एवं दीव, दादरा एवं नागर हवेली, मेघालय, सिक्किम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और अरुणाचल प्रदेश में संक्रमण से कोई मौत नहीं हुई. देशव्यापी ‘टीका उत्सव' के दूसरे दिन सोमवार तक भारत में कोविड-19 टीके की 10.45 करोड़ खुराक दी चुकी हैं. मंत्रालय ने बताया कि सुबह सात बजे तक की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 15,56,361 सत्रों में टीके की 10,45,28,565 खुराक दी जा चुकी है. इनमें 90,13,289 स्वास्थ्यसेवा कर्मियों को पहली खुराक और 55,24,344 स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को दूसरी खुराक दी गई है.  (ndtv.in)


12-Apr-2021 7:25 PM 23

नई दिल्ली, 12 अप्रैल : रूसी वैक्सीन के भारत में आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी मिल गई है. हैदराबाद की डॉ. रेड्डीज लैब द्वारा भारत में निर्मित इस वैक्सीन की प्रभावशीलता 91.6 प्रतिशत है, जो कि मॉडर्ना और फाइजर शॉट्स के बाद सबसे अधिक है. कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत ने तीसरी वैक्सीन के रूप में इसे उपयोग की मंजूरी दी गई है.

भारतीय दवा नियामक की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने  Sputnik V को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने के लिए आज बैठक की और उसमें उसके क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों पर विचार किया.  

1 अप्रैल को हुई आखिरी बैठक में, सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने डॉ. रेड्डी लैब से वैक्सीन के सभी इम्युनोजेनसिटी पैरामीटर्स का डेटा जमा करने के लिए कहा था. डॉ. रेड्डी ने स्पुतनिक-V के आपातकालीन उपयोग के लिए 19 फरवरी को आवेदन किया था, जो भारत समेत यूएई, वेनेजुएला और बेलारूस में क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में है. भारत में, स्पुतनिक-V का कालीनिकल परीक्षण 18 से 99 साल के उम्र के लोगों के बीच लगभग 1,600 लोगों पर किया जा रहा है.

स्पुतनिक-V वैक्सीन का नाम सोवियत रूस के पहले स्पेस सैटेलाइट के नाम पर रखा गया है, जो कोविड वायरस को कमजोर करने के सिद्धांत पर काम करता है और शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर करता है. दो-खुराक वाली इस वैक्सीन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रत्येक शॉट के लिए $ 10 से कम है. वैक्सीन को ड्राई फॉर्मेट में 2 से 8 डिग्री तापमान पर संग्रहीत किया जा सकता है. (ndtv.in)


12-Apr-2021 7:15 PM 17

जम्मू, 12 अप्रैल | जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में एक मिनी बस के खाई में गिरने से सोमवार को तीन लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि डोडा जिले के मछीपाल कहरा मार्ग पर पियाकुल दुनाडी गांव के पास चालक ने बस से अपना नियंत्रण खो दिया, और बस एक नाले में गिर गई।

सूत्रों ने बताया, "मिनी बस में सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है।"(आईएएनएस)


12-Apr-2021 7:12 PM 20

नई दिल्ली, 12 अप्रैल | जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल साइंसेज (जेआईबीएस), ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने फ्री इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मोल्दोवा के साथ मिलकर 9-10 अप्रैल को 'मेंटल हेल्थ, वेल-बीइंग एंड लोनलीनेस ड्यूरिंग कोविड-19' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन किया। महामारी दुनिया भर में लोगों के जीवन को बाधित कर रही है, इस बीच सम्मेलन का उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों और सामान्य आबादी के मानसिक स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव को कम करने के तरीकों पर चर्चा, विश्लेषण और सुझाव देता रहा है।

इस दौरान 300 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, अनुसंधान विद्वानों, बहु-विषयक पेशेवरों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दुनिया भर के छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के विभिन्न विषयों पर अपने अनुभवों और शोध परिणामों को साझा किया।

आभासी सत्र (वर्चुअल सेशन) के दौरान बोलते हुए जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल साइंसेज (जेआईबीएस) के प्रधान निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) संजीव पी. साहनी ने विशेष रूप से वर्तमान वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट के दौरान रोजमर्रा की बातचीत में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "एक ऐसी दुनिया में जहां महामारी ने हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन को पूरी तरह से तबाह कर दिया है, सम्मेलन का उद्देश्य कोविड-19 महामारी की वजह से चिंता, अवसाद, बर्नआउट, थकान, अकेलापन और निराशा की भावनाओं का मुकाबला करने के तरीके और टूल्स ढूंढना है।"

डॉ. साहनी ने कोविड-19 संकट और महामारी के दौरान इस प्रकार की दिक्कतों को कम करने के तरीकों के कारण लोगों के बीच व्यवहार के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं में भारी बदलाव पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, "मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग को समझने की जरूरत है। महामारी से पहले, मानसिक स्वास्थ्य में पहले से ही तीव्र गिरावट थी, लेकिन अब स्थिति और भी बढ़ रही है।"

नव स्थापित जिंदल स्कूल ऑफ साइकोलॉजी एंड काउंसलिंग (जेएसपीसी) के वाइस डीन डॉ. डेरिक हॉल लिंडक्विस्ट ने सम्मेलन के दौरान आभासी स्वागत भाषण प्रस्तुत किया, जबकि फ्री इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मोल्दोवा में मनोविज्ञान एवं शैक्षिक विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. नेली बालोड ने विशेष रूप से वैश्विक महामारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष सत्र का आयोजन किया। डॉ बालोड ने मानसिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक मनोविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक और प्रयोगात्मक अनुसंधान को लेकर जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल साइंसेज की भूमिका की प्रशंसा भी की।

2014 में स्थापित, जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल साइंसेज (जेआईबीएस) ओ. पी. जिंदल ग्लोबल का एक वैल्यू-बेस्ड अनुसंधान संस्थान है और संयुक्त राष्ट्र की अकादमिक परिषद का सदस्य है। (आईएएनएस)


12-Apr-2021 7:11 PM 23

नई दिल्ली/सिलीगुड़ी, 12 अप्रैल | कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में चुनावों के अगले चार चरणों में अपने अभियान को तेज करने का फैसला किया है क्योंकि पार्टी को लगता है कि यहां उनकी पकड़ अच्छी है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां अल्पसंख्यकों की अधिकता है। अगले चरणों में जिन जिलों में मतदान होने वाले हैं, उनमें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और उत्तर बंगाल के अन्य भाग शामिल हैं, जहां पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को अच्छे परिणाम मिले थे। मुर्शिदाबाद और मालदा में पार्टी की पकड़ इसलिए मजबूत है क्योंकि यहां दिवंगत रेल मंत्री अब्दुल गनी खान चौधरी के परिवार का काफी प्रभाव है, हालांकि अब उनका परिवार टीएमसी और कांग्रेस पार्टी में बंट गया है।

राज्य में कांग्रेस के पर्यवेक्षक बी. के. हरिप्रसाद ने बागडोगरा से बात करते हुए कहा, "इलाके में हमारा ध्यान हमारे मतदानों को पार्टी के खेमे में वापस लाना है और आखिरी के चार चरण पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण है।"

राज्य में भाजपा और तृणमूल के बीच जारी जंग में कांग्रेस ने अपनी जगह बनाने और मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कमर कस ली है।

पश्चिम बंगाल के कांग्रेस सचिव प्रभारी, बी.पी. सिंह ने सिलीगुड़ी से बोलते हुए कहा, "वाम दलों और आईएसएफ (भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा) के साथ हमारा गठबंधन मजबूत है और राहुल गांधीजी बुधवार को गोलपोखरा और नक्सलबाड़ी में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे।"

टीएमसी और वाम-कांग्रेस गठबंधन के बीच वोटों के विभाजन से सावधान होकर पार्टी बड़ी ही चतुराई से खुद को चुनाव में पेश कर रही है, ताकि वह लड़ाई में बनी रही और पार्टी के नेता इस बात को सुनिश्चित करें कि कांग्रेस-वाम गठबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करें।(आईएएनएस)


12-Apr-2021 7:03 PM 16

नई दिल्ली, 12 अप्रैल | स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि 'टीका उत्सव' के पहले दिल लगभग 30 लाख लोगों को वैक्सीन दी गई, जिससे वैक्सीन प्राप्त करने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 10.45 करोड़ तक हो गया है। भारत में प्रति दिन औसतन 40,55,055 डोज दी जा रही है, जिससे इस मामले में देश वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर बना हुआ है।

सोमवार को देशव्यापी टीका उत्सव का दूसरा दिन है। केंद्र ने कहा कि सुबह 7 बजे तक, कुल रूप से, 15,56,361 सत्रों में 10,45,28,565 वैक्सीन खुराक दी गई है। इनमें 90,13,289 हेल्थ केयर वर्कर्स (एचसीडब्ल्यू) शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा, "देशव्यापी टीका उत्सव के पहले दिन 63,800 कोविड टीकाकरण केंद्र (सीवीसी) संचालित देखे गए। इसके अलावा, टीका उत्सव का पहला दिन रविवार को होने के बावजूद लगभग 30 लाख टीकाकरण हो चुके हैं।"

सरकार ने कहा कि 10 राज्य महाराष्ट्र के साथ दैनिक नए मामलों में 81 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं, जबकि 5 राज्यों में 70.16 प्रतिशत सक्रिय मामले केंद्रित है। पिछले 24 घंटों में देश में 1,68,912 नए मामले दर्ज किए गए हैं।

दस राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में कोरोना के नए मामलों में वृद्धि हुई है। इन 10 राज्यों से 83.02 प्रतिशत नए मामले सामने आए हैं।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक दैनिक नए मामले 63,294 दर्ज किए गए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 15,276 जबकि दिल्ली में 10,774 नए मामले सामने आए। (आईएएनएस)


12-Apr-2021 6:54 PM 16

हिमालयी वनों में आग कोई असामान्य घटना नहीं है लेकिन जंगलों में हो रही विनाशकारी घटनाओं ने कई स्तर पर चिंता पैदा की है. जंगलों में लगने वाली अधिकांश आग मानवजनित है, लेकिन उस पर नियंत्रण का ढांचा चरमरा रहा है.

 डॉयचे वैले पर हृदयेश जोशी की रिपोर्ट- 

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में एक छोटा सा सरहदी कस्बा है मुनस्यारी, जहां से हिमालय की मशहूर पंचचूली रेंज का भव्य नजारा मिलता है. इस मौसम में यहां पर्यटकों का खूब जमावड़ा भी होता है लेकिन इन दिनों मुनस्यारी से पंचचूली नहीं दिख रही क्योंकि धधकते जंगलों से उठे धुएं ने पूरी पर्वत श्रृंखला पर परदा डाल दिया है. आज हाल यह है कि मुनस्यारी के पास सरहद पर गोरीगंगा बह रही है और उसके ऊपर पहाड़ों पर जंगल धधक रहे हैं. 

उत्तराखंड में सैकड़ों हेक्टेयर वन जले 

नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, देहरादून और पौड़ी समेत उत्तराखंड के कई जिलों में जंगल जल रहे हैं. राज्य सरकार के मुताबिक एक अप्रैल से 11 अप्रैल के बीच राज्य के जंगलों में 847 जगह आग लगी है जिसमें 1248 हेक्टेयर से अधिक जंगल प्रभावित हुआ है. इसमें से करीब दो-तिहाई क्षेत्रफल (804 हेक्टेयर) आरक्षित वन हैं जो काफी समृद्ध माने जाते हैं.

अब तक आग में 28.5 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है और 10 पशुओं की मौत हो गई है. कुछ रिहायशी इलाकों में तक यह आग फैल गई है. आग को बुझाने के लिए राज्य सरकार ने पहले वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों की मदद ली लेकिन उससे कुछ खास हासिल नहीं हुआ. फिलहाल आग बुझाने में कोई बड़ी कामयाबी वन विभाग को नहीं मिली है और वह बरसात के भरोसे है.

देश के कई हिस्सों में आग 

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के फायर इंफॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (फर्म्स) की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जिसमें उत्तराखंड ही नहीं भारत के जंगलों में कई जगह आग लगी हुई है. नासा फर्म्स के मानचित्र को देखने से पता चलता है कि पूरी हिमालयी पट्टी पर पश्चिम से पूर्व तक आग की घटनाएं बिखरी हुई हैं.

जानकार कहते हैं कि देश के बाकी हिस्सों की तरह हिमालयी क्षेत्र में भी आग कोई नई या सामान्य घटना नहीं है लेकिन अब आग की घटनाओं का ग्राफ बदल रहा है. फरवरी से जंगलों में आग की घटनाएं शुरू हो जाती है लेकिन मॉनसून के बाद जंगलों की आग की कोई घटना नहीं होती लेकिन 2020 में उत्तराखंड के वनों में गर्मियों के मौसम में आग की जितनी घटनाएं हुई उससे अधिक घटनाएं जाड़ों में हो गई.

वनों की आग और जलवायु परिवर्तन

डाउन टु अर्थ पत्रिका ने राज्य के वन विभाग के आंकड़ों का हवाला देकर कहा है कि उत्तराखंड के जंगलों में पिछले 6 महीने से जंगलों में आग धधक रही है और इसके पीछे जलवायु परिवर्तन एक वजह है. वन कर्मियों और विशेषज्ञों का कहना है कि हर आग जंगल के लिए खराब नहीं होती लेकिन आग का अनियंत्रित होना और सर्दियों में लगना असामान्य जरूर है.

एक उच्च वन अधिकारी ने हिमालयी वनों के बारे में समझाते हुए कहा, "उत्तराखंड के जंगलों में चीड़ के वृक्ष अच्छी खासी संख्या में हैं. इस पेड़ की नुकीली पत्तियां साल में दो बार गिरती हैं. जंगलों की आग इन पत्तियों को न जलाए तो यही पत्तियां मिट्टी की अम्लता (एसिडिटी) को बढ़ा कर काफी नुकसान कर सकती है. अक्सर चीड़ की पत्तियों में लगी आग सतह पर रहती है और जल्दी बुझ जाती है लेकिन अगर यह अनियंत्रित होकर फैल जाए तो हानि का कारण बनती है.” 

सरकार के मुताबिक भारत के 10 प्रतिशत जंगलों में आग की घटनाएं बार-बार होती हैं लेकिन हिमालय में अनियंत्रित आग इसलिए भी चिंता का विषय है कि यहां संवेदनशील ग्लेशियर हैं. क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (साउथ एशिया) के निदेशक संजय वशिष्ठ कहते हैं कि आग की घटनाएं तो पहले भी होती रही हैं लेकिन अब उनका विकराल स्वरूप और बार-बार होना चिंताजनक है. वशिष्ठ ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में लगी आग का हवाला देते हुए कहते हैं कि धरती का तापमान बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

वशिष्ठ के मुताबिक, "हिमालय भारत और पूरे विश्व के लिए विशेष महत्व रखता है. धरती के तीसरे ध्रुव (थर्ड पोल) के नाम से जाना जाने वाला क्षेत्र कई दुर्लभ वनस्पतियों, पक्षियों और जंतुओं का बसेरा है. यह जैव विविधता का भंडार है और यहां कई ऐसी प्रताजियां हैं जो इसी क्षेत्र में पाई जाती हैं, दुनिया में कहीं और नहीं होती. इन्हें एंडेमिक प्रजातियां कहा जाता है. अनियंत्रित आग इस जैव विविधता को खतरा पैदा कर सकती है. भारत ने पेरिस क्लाइमेट संधि में भी यह कहा है कि वह 2030 तक करीब 300 टन कार्बन सोखने लायक जंगल लगाएगा.”

मॉनिटरिंग और सामुदायिक भागेदारी की कमी

जंगलों में लगने वाली अधिकांश आग मानवजनित है. पशुओं के लिए बेहतर चारा उगाने के लिए अक्सर चरवाहे जंगलों में आग लगाते हैं लेकिन कई बार आग अनियंत्रित हो जाती है. लेकिन वन विभाग के पास लगातार घटते वन आरक्षियों (फॉरेस्ट गार्ड्स) और संसाधनों की कमी आग के विकराल होने का कारण बनती है. असल में वन विभाग में अफसर तो बहुत हैं लेकिन जमीन पर मॉनिटरिंग और जंगलों की सुरक्षा के लिए फॉरेस्ट गार्ड नहीं हैं. अभी भड़की आग के बाद उत्तराखंड हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह आरक्षियों के 60% खाली पड़े पदों को अगले 6 महीने में भरे.

उधर वन अधिकार कार्यकर्ता और जानकार कहते हैं कि सामुदायिक भागीदारी के बिना जंगलों को नहीं बचाया जा सकता. कई दशकों से हिमालयी पर्यावरण और समाज से जुड़े कार्यकर्ता चारु तिवारी कहते हैं कि बीसवीं सदी की शुरुआत में जब अंग्रेजी हुकूमत ने लोगों के जंगलों में प्रवेश पर पाबंदी लगाई तो वहां आग की घटनाएं बढ़ने लगी. तिवारी के मुताबिक इसी बात को समझ कर अंग्रेजों ने 1927 के वन कानून में ग्रामीणों के हक-हुकूक बहाल किए और समुदायों का वनों से रिश्ता बना. लेकिन वन अधिनियम 1980 ने एक बार फिर से ग्रामीणों और जंगलों के बीच का वह रिश्ता तोड़ दिया.

चारू तिवारी के मुताबिक, "जंगलों की आग को सरकार नहीं रोक सकती. वनों को सामुदायिक दखल ही बचाएगा. जंगल की आग सदियों से ग्रामीण ही बुझाते रहे हैं लेकिन जंगल और ग्रामीणों के बीच के अंतरसंबंध पिछले कुछ दशकों में टूटते गए हैं जिसके लिए सरकारी नीतियां जिम्मेदार हैं. जब ग्रामीण जंगल से जुड़े थे तो वह जैव विविधता वाले वन उगाते थे लेकिन अत्यधिक सरकारी नियंत्रण से टिंबर फॉरेस्ट ही उगाए जा रहे हैं जो पैसा कमाई का साधन तो बनते हैं लेकिन हमें एक निर्जीव पारिस्थितिकी की ओर धकेल रहे हैं. जंगलों में अनियंत्रित आग इसी का नतीजा है.” 


12-Apr-2021 4:48 PM 16

पटना. इस वक्‍त पूरा देश कोरोना वायरस से फैले संक्रमण की चपेट में है, ऐसे में पटना विश्वविद्यालय भी इससे अछूता नहीं है. पटना विवि भी कोरोना की मार झेल रहा है. कुलपति के साथ ही साइंस कॉलेज और मगध महिला कॉलेज के शिक्षक और अन्‍य कर्मचारी के पॉजिटिव होने की सूचना है. यह स्थिति तब है, जब पटना विवि प्रशासन ने राज्य सरकार के निर्देशानुसार 5 अप्रैल से ही कॉलेजों में ऑफलाइन एकेडमिक गतिविधियां बंद कर दी हैं.

विवि प्रशासन ने पहले 11 अप्रैल तक एकेडमिक गतिविधियां बंद कीं और उसके बाद राज्य सरकार के निर्देशों में बदलाव के अनुसार 18 अप्रैल तक बंदी को बढ़ा दिया गया. दूसरी ओर कुलपति समेत अन्य शिक्षकों और कर्मियों के संक्रमित होने से विश्वविद्यालय की आने वाली गतिविधियां बाधित हो सकती हैं. कुलपति सहित कई कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ गए हैं, जिससे अब लगभग सभी गतिविधियो को स्थगित किया जा रहा है.

कोरोना के चलते 24 अप्रैल को आयोजित होने वाले कन्वोकेशन पर भी ग्रहण लग सकता है. हालांकि, इसके लिए बापू सभागार का स्थान तय किया गया है, लेकिन पटना में कोरोना के बढ़ते आंकड़े और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर लगी पाबंदी के बीच दीक्षांत समारोह के आयोजन की उम्मीद कम ही है. इस बीच कुलपति भी कोरोना से संक्रमित हो गए हैं तो आशंका है कि दीक्षांत समारोह स्थगित कर दिया जाएगा.

कुलपति के स्वस्थ होने या दूसरी परिस्थितियों में अगर कन्वोकेशन आयोजित भी होगा तो पूरी संभावना है कि इस बार पटना विवि प्रशासन अपना कन्वोकेशन पहली बार ऑनलाइन मोड में करेगा. राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक पहले से चल रही परीक्षाओं पर शैक्षणिक संस्थानों की बंदी का निर्देश प्रभावी नहीं होगा.
नालंदा खुला विश्वविद्यालय ने भी अपनी परीक्षाएं जारी रखी हैं और रविवार को पाटलिपुत्र विवि प्रशासन ने भी पीएचडी प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया, लेकिन पटना विवि में शिक्षकों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद 27 अप्रैल से निर्धारित स्नातक पार्ट 3 की परीक्षा के स्थगित होने की आशंका है, क्योंकि पटना विवि प्रशासन ने अभी तक परीक्षा का शेड्यूल जारी नहीं किया है. परीक्षा नियंत्रक डॉ. आरके मंडल का कहना है कि परीक्षा के स्थगन पर कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है. (news18.com)


12-Apr-2021 4:47 PM 42

 

चंडीगढ़. पंजाब के लुधियाना जिलेमें 100 साल की बुजुर्ग महिला से 70 साल के बुजुर्ग  द्वारा छेड़खानी का मामला सामना आया है. जिस पर छेड़खानी के आरोप लगे हैं वह महिला का ही रिश्तेदार है. घटना के बाद वृद्ध महिला के परिजनों ने आरोपी बुजुर्ग का मुंह काला कर, उसे जूते और चप्पलों की माला पहनाई और उसे अर्द्धनग्न कर मोहल्ले में घुमाया. यह घटना चार दिन पहले घटित हुई, लेकिन इसका वीडियो वायरल होने पर खुलासा सोमवार को हुआ. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने महिला और उसके परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है.

क्या है मामला
जानकारी के मुताबिक यह घटना लुधियाना के हैबोवाल के तहत आने वाले गोपाल नगर की है. पुलिस ने वृद्ध के बेटे की शिकायत पर मामला दर्ज किया है. शिकायत में कहा गया है कि 70 साल का बुजुर्ग पड़ोस में आयोजित एक समारोह से शराब के नशे में घर वापिस आ रहा था. रास्ते में उसके साले का घर था, जिसकी मृत्यु हो चुकी है. उसकी 100 वर्षीय वृद्धा पत्नी घर के आंगन में चारपाई पर आराम कर रही थी. नशे में होने के कारण वह वृद्धा के ऊपर गिर गया. यह देख कर वृद्धा की भतीजी ने वृद्ध पर छेड़खानी का आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू दिया.

इस पर वृद्धा के परिजन मौके पर इकट्ठा हो गए और और उन्होंने बुजुर्ग को पीटना शुरू कर दिया. उसके कपड़े फाड़कर उसे अर्द्धनग्न कर दिया. उसका मुंह काला करने के बाद उसके गले में जूते और चप्पलों की माला डार कर गलियों में घुमाना शुरू कर दिया. क्योंकि यह मामला पारिवारिक था इसलिए मोहल्ले के लोगों ने ज्यादा आपत्ति जाहिर नहीं की. महिला के परिजनों ने बुजुर्ग को पुलिस में शिकायत करने पर धमकी दी और कहा कि यदि पुलिस को बताया तो वे उसका इससे भी बुरा हाल करेंगे. बुजुर्ग से महिला के परिजनों ने जबरन माफी भी मंगवाई. इस घटना का लोगों ने वीडियो बना लिया जिसके आधार पर यह मामला थाना तक पहुंचा है. थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर नीरज चौधरी का कहना है कि दोनों पक्ष आपस में रिश्तेदार हैं, दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और मामले की जांच चल रही है. (news18.com)


12-Apr-2021 3:50 PM 26

नई दिल्ली, 12 अप्रैल | देश भर में लगातार कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में कुछ दिनों में रमजान का महीना भी शुरू हो जाएगा हालांकि इसको लेकर तमाम इमाम बैठकें कर रहे हैं और इस बात की अपील कर रहे हैं कि सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस को फॉलो किया जाए। नई दिल्ली के इमाम हाउस में मुख्य इमाम डॉक्टर उमेर अहमद इलियासी की अध्यक्षता में दिल्ली के इमामों की एक बैठक हुई, इस बैठक में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को मद्देनजर रखते हुए हालात को कैसे बेहतर बनाया जाए और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क लगाने पर जोर दिया गया।

वहीं रमजान के महीने में जरूरत पड़ने पर घरों से ही नमाज पढ़ी जाए इस पर भी विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही जुमे की नमाज के वक्त तमाम इमाम अपनी मस्जिदों से इस पैगाम को आम लोगों तक पहुंचाए और सरकार के द्वारा दी गई गाइडलाइंस को भी लोगों तक पहुंचा कर अमल करवाने कि बात कही गई।

दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामलों ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दिल्ली में शनिवार को एक दिन में सबसे ज्यादा 10,774 नए केस सामने आए हैं। वहीं 48 कोरोना पेशंट्स की मौत हुई है।

ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चेयरमैन मौलाना उमैर इल्यासी ने आईएएनएस को बताया, "इमामों के साथ हुई बैठक में हमने कहा है कि सरकार की गाइडलाइंस को सख्ती के साथ पालन करें और करवाएं। वहीं मंगलवार को रमजान का चांद दिखने की सम्भावना है, जिसके बाद अगले ही दिन पहले रमजान के रोजा रखा जाएगा।"

"इस बात का जरूर ध्यान रखें कि कोरोना बहुत तेजी से फैल रहा है, कोशिश करें कि घरों में ही नमाज पढ़ें, रोजा घर पर ही खोलें और अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं।"

भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 1,68,912 नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,35,27,717 हुई। 904 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 1,70,179 हो गई है। देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 12,01,009 है और डिस्चार्ज हुए मामलों की कुल संख्या 1,21,56,529 है। (आईएएनएस)


12-Apr-2021 3:49 PM 27

नई दिल्ली, 12 अप्रैल | पहलवान सोनम मलिक चोटिल होने के कारण इस महीने अलमाती में होने वाले एशिया कुश्ती चैंपियनशिप से हट गई हैं।

एशिया चैंपियनशिप का आयोजन 13 से 18 अप्रैल तक होना है।

महिला टीम के मुख्य कोच कुलदीप मलिक ने आईएएनएस से कहा, "स्थानीय मेडिकल विशेषज्ञ से परामर्श के बाद सोनम को इस टूर्नामेंट से ब्रेक देने का फैसला किया गया है।"

मलिक के अनुसार सोनम को एशिया ओलंपिक क्वालीफायर्स में सेमीफाइनल मुकाबले के वक्त ही चोट लगी थी लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए मैच जीत ओलंपिक कोटा हासिल किया था।

कोच ने कहा, "मुझे भरोसा है कि वह जल्द स्वस्थ हो जाएंगी। राष्ट्रीय टीम 19 अप्रैल को वापस आएगी लेकिन सोनम जल्द ही स्वदेश लौट जाएंगे।" (आईएएनएस)
 


12-Apr-2021 3:26 PM 23

इटावा, 12 अप्रैल | यूपी के इटावा में सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। चिकित्सा अधीक्षक डॉ पीयूष के अनुसार, पीड़ित पंचायत चुनाव में वोट डालने के लिए कार से नई दिल्ली से झांसी जा रहे थे।

इनकी गाड़ी का टायर एक भोजनालय के समीप पंचर हो गया और गाड़ी को सड़क किनारे लगा दिया गया, तभी एक तेज रफ्तार ट्रक ने कार को जोरदार टक्कर मार दी। ट्रक के ड्राइवर के संतुलन खोने से यह हादसा हुआ।

डॉक्टर ने कहा कि घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।

डॉक्टर ने आगे कहा, घायल लोगों में दो बच्चे हैं, जिन्हें सेफई भेजा गया है।

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर शोक व्यक्त किया है और जिला अधिकारियों से घायल व्यक्तियों को हरसंभव मदद प्रदान करने को कहा है। (आईएएनएस)
 


12-Apr-2021 3:23 PM 33

नई दिल्ली, 12 अप्रैल | अगर आपने अपने पैन कार्ड को आधार नंबर से लिंक नहीं करवाया है तो इसमें देर न करें, क्योंकि 30 जून के बाद इसके लिए जुर्माना भरना पड़ सकता है। आयकर कानून के तहत किए गए नये नियम के अनुसार पैन कार्ड के आधार से लिंक नहीं होने की सूरत में 1,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट सी. के. मिश्रा ने बताया कि वित्त विधेयक 2021 के जरिए आयकर कानून में धारा 234 एच जोड़ा गया है, जिसके अनुसार निर्धारित समयसीमा के भीतर पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं करने पर 1,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

पहले इस समयसीमा की आखिरी तारीख 31 मार्च 2021 थी। लेकिन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अब इसे बढ़ाकर 30 जून 2021 कर दिया है।

मिश्रा ने बताया कि 30 जून तक अगर किसी ने अपने पैन को आधार से लिंक नहीं करवाया तो उसे 1,000 रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि यह काम कोई मुश्किल नहीं है, क्योंकि एक एसएमएस भेजकर भी पैन कार्ड से से आधार लिंक हो जाता है।

उन्होंने कहा, "आप अपने मोबाइल से एक मैसेज भेजकर पैन को आधार से लिंक करवा सकते हैं। इसके लिए आपको यूआईडीपैन के बाद स्पेस देकर अपने 12 अंकों का आधार नंबर लिखना होगा। इसके बाद फिर स्पेस देकर 10 अंकों का पैन नंबर लिखना होगा। फिर इसे 567678 या 56161 पर मैसेज करना होगा।"

उन्होंने बताया कि इस तरह बैंकिंग के पैन से लिंक होने पर आयकर विभाग जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति द्वारा बैंकों से किए जाने वो सारे लेन-देन का ब्यौरा निकाल सकता है। (आईएएनएस)
 


12-Apr-2021 3:22 PM 18

लखनऊ, 12 अप्रैल | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके काकोरी में पुलिस के साथ झड़प के बाद 200 से अधिक लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। यह झड़प रविवार शाम को हुई, जब सरकारी अधिकारियों की टीम सरकारी जमीन से मूर्ति हटाने गई थी।

पुलिस के अनुसार, कुछ ग्रामीणों ने शनिवार को सैथा गांव में अंबेडकर की मूर्ति चुपके से लगा दी थी।

डीसीपी, दक्षिण, रवि कुमार ने कहा, "जब जिला प्रशासन को इस बात का पता चला, तो अधिकारियों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची और ग्रामीणों को प्रतिमा को उस जगह से दूसरी जगह लगाने को कहा। जिसके बाद विवाद बढ़ गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण उस जगह पर जमा हो गये और जय भीम के नारे लगाने लगे।"

ग्रामीणों को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। इस दौरान ग्रामीण पुलिस से भिड़ गए और उन पर पथराव करने लगे। हालांकि, बाद में पुलिस ने स्थिति को शांत कराया।

डीसीपी कुमार ने आगे कहा कि "झड़प में कोई घायल नहीं हुआ। पुलिस ने 200 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें से 20 की पहचान हो गई है। उन पर सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम के तहत नुकसान पहुंचाने और महामारी अधिनियम के तहत दंगों और उसका उल्लंघन करने को लेकर मामला दर्ज किया गया है।"

स्थिति को नियंत्रित करने और मूर्ति को स्थानांतरित करने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है।

डीसीपी ने बताया कि लोग वहां कूड़ा फेंकते थे और ग्राम प्रधान महेश ने ग्रामीणों से अंबेडकर की मूर्ति को सरकारी जमीन पर बिना किसी अनुमति के लगाने के लिए कहा था। (आईएएनएस)