विचार / लेख

हड़ताल पर सब्जियां
06-Jan-2024 4:10 PM
हड़ताल पर सब्जियां

 के.जी.कदम

हाल ही जैसे ट्रक वाले सडक़ों पर उतरे थे, ठीक वैसे ही अब सब्जियां सडक़ों पर उतर गई है। जी हां सब्जियां हड़ताल पर है।

हुआ यूं कि किसी विदेशी ऑनलाइन फूड टेस्ट एटलस कम्पनी ने एक रिपोर्ट में बता दिया कि ‘आलू बैंगन की सब्जी विश्व के 100 सबसे बेकार खाने में से एक है।’

तब से ये सब्जियां गुस्से में है।

ये रिपोर्ट ना बैंगन बॉस को हजम हुई, ना आलू भाई को और सच पूछो तो मुझे भी नहीं। मुझे तो खूब पसंद है आलू बैंगन।

बैंगन भले ही इंट्रोवर्ट किस्म का है। अकेला पकना पसन्द करता है। लेकिन आलू भाई तो हर सब्जी के साथ मेल मिलाप रखता है।

बस आलू का यही व्यवहार काम आया, उतर गई  सारी सब्जियां सडक़ पर गोभी, टमाटर, लौकी, भिंडी.. सबकी सब सब्जियां।

कुछ ही देर में ‘आलू बैंगन जिन्दाबाद’ से लेकर ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, आलू बैंगन का नाम रहेगा’ जैसे नारों से आकाश गूंज गया। सडक़े जाम हो गई।

कद्दू.. जिसे भले ही कम लोग पसन्द करे.. लेकिन साईज के चलते इस आन्दोलन का लीडर बनाया गया।

हम आदमियों में भी.. भले ही बुद्धि कम हो लेकिन शरीर का सुव्यवस्थित आकार प्रकार लीडर बनाने में खासी मदद कर देता है।

खैर सब्जियों ने तय किया कि नोटिस भेजा जाए इस कम्पनी को कि आपने किस आधार पर ये तय किया जनाब.. कि आलू बैंगन है सबसे खराब?

जरूर आपकी सर्वे टीम के सदस्य हमारे देश के लोग है। इसलिए वे सर्वे में सेटिंग सेट करना कराना जानते है  किसे दबाना है, किसे उठाना है.. या फिर आप लोगों ने किसी नई या नहीं बिकने वाली सब्जी से सेंटिग बैठाई है। हम यह नहीं होने देंगे।

एक टिन्डा जो जुलूस में सबसे पीछे चल रहा था। एकाएक आगे आ गया और बोला.. ‘अरे वो विदेशियों।  तुम लोग हमारी सब्जियों का स्वाद कैसे समझ सकते हो तुम्हारे घरों में तो रोज मुर्गे, मच्छी, सांप-कैंकड़े और भेड़ बकरी पकते है। कभी हमारे बैंगन का भर्ता खाकर तो देखोज् उंगलियां चाटोगे उंगलियां।

टिण्डे द्वारा बैंगन की इस तारीफ के बाद आलू ने एक तिरछी नजर टिन्डे पर फेंकी तो टिन्डे ने फिर हुंकार भरी और और ये हमारा भाई आलू ये राजा है राजा अमेरिका से लेकर अफ्रीका तक इसकी पकड़ है। ये इस कम्पनी को धूल चटा देगा।

कद्दू ने टिन्डे को हाथ के इशारे से चुप कराया.. भारतीय नेता की भांति कद्दू भी नहीं चाहता कि कोई छोटा मोटा एक टिन्डा भी नेता बन जाये

सो कद्दू गला साफ करके बोला..

देखो दोस्तों, हमें धैर्य रखना है। जबान पर काबू रखना है। कम्पनी से गलती भी हो सकती है। पर हम गालियां नहीं देंगे.. उटपटांग बोलने का नतीजा भीलवाड़ा के विधायकों से पूछो हम कानून के साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे। हम विदेशियों को आलू बैंगन की इज्जत से नहीं खेलने देंगे। हम जब तक आलू बैंगन को विश्व की सर्वश्रेष्ठ सब्जी घोषित नहीं करवा देते, यहीं डटे रहेंगे।

आकाश एक बार फिर ‘आलू बैंगन -अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा।

ये सभा और आगे बढ़े इससे पहले इन डटी हुई सारी सब्जियों को एक ठेले में भरकर सब्जीवाला मुहल्ले की और बढ़ गया।

ले.. आऔ... भाभीजी ..

ले.. आलू, बैंगन, टमाटर, मूली, मटर, मेथी, पालक, अदरक, लहसुन प्याज ले लो।


अन्य पोस्ट