विचार / लेख

दगे हुए कारतूसों की लिस्ट ..
02-Jan-2024 4:10 PM
दगे हुए कारतूसों की लिस्ट ..

  मनीष सिंह

असल में ये राज्यसभा में कांग्रेस के सांसदों की सूची है। सभी बड़े-बड़े नाम हैं, इतने बड़े कि आम आदमी की स्मृति में समा नहीं पा रहे। अर्थात कम ही लोग जाने पहचाने हैं।

किसी पार्टी के एक सदन में 36 सांसद कम नहीं होते। इतने में तो पूरी संसद हिलाई जा सकती है। मगर कांग्रेस राज्यसभाई तारामंडल, कुछ एक्सेप्शन्स के अलावे, जुगनुओं का ऐसा झुंड है, जिससे अपने घर में भी रोशनी नहीं हो सकती। कुछ वकालत की फीस ले रहे हैं, कुछ रिटायरमेंट बेनिफिट ले रहे हैं, कुछ वफादारी बेनिफिट ले रहे हैं, कुछ का पुनर्वास किया गया है, और जो बचे हैं, उनका पता नहीं क्या किया गया।

मैं इनमें से ज्यादातर को नहीं पहचानता, मगर इनके राज्यों के ज्यादातर लोग अवश्य पहचानते होंगे, ये बड़े नेता होंगे। तो क्या ही अच्छा हो कि इन सबसे राज्यसभा खाली करवाकर लोकसभा की टिकटें दे दी जाएँ? उनकी मर्जी की।

लिस्ट में दिग्विजय सिंह दिखते हैं। जबरन भोपाल से उतारा गया, गृह सीट से लड़ते तो बिल्कुल जीत जाते। ऐसे ही चिदम्बरम हैं। वे तमिलनाडु से एक सीट नहीं जीत सकते तो लानत है 3 दशक के करियर पर। अखिलेश सिंह, प्रमोद तिवारी भी इसी कैटेगरी के हैं। इमरान प्रतापगढ़ी भरी जवानी में रिटायरमेंट बेनिफिट ले रहे है। खडग़े, वेणुगोपाल का अपना महत्व है, पर अगर अपनी लोकसभा नहीं जीत सकते तो राज्यसभाई सांसद होने की ख्वाहिश नहीं पालनी चाहिए। मनमोहन सिंह, विवेक तन्खा, तुलसी, अभिषेक मनु का केस समझ से बाहर है। राजीव शुक्ल, मुकुल वासनिक को तो भगवान ने बनाते समय माथे पर खोद दिया - ‘जा, तू आजीवन राज्यसभा का एमपी बनेगा।’ जो बचे, उनका तो नाम खोजने पर गूगल भी सिर खुजाने लगता है।

इनको अपने कॉन्फिडेंस वाले क्षेत्र की लोकसभा टिकट देकर तुरत-फुरत रवाना करना चाहिए। इसके साथ पायलट, गहलोत, भूपेश, कमलनाथ, पृथ्वीराज चौहान जैसे शानपट्टीबाज, इनके मंत्रिमंडलों के सीनियर मिनिस्टर और मुख्यमंत्री पदाकांक्षी भी एक-एक लोकसभा में ठेले जाने चाहिए। आखिर स्टेट का बबा बनना चाहते हो, 8 विधानसभा सीट (1 लोकसभा) ही जीतकर दिखा दो। जब भाजपा केंद्रीय मंत्री को डिमोट कर विधायकी लड़वा सकती है, तो यहाँ तो सांसद होना प्रमोशन होगा।

असल में कोई 300 सीटों में कांग्रेस का महज 15 सांसद होना, बेहद अचरज की बात है। पार्टी नेतृत्व चाहे जित्ता खराब हो, इनकी अपनी स्टैंडिंग क्या है?? अपना क्या नेटवर्क है, जनता में क्या छवि है.. ऐसा क्या है जिसके बूते ये लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, माँगें रखते हैं?? देश की संसद में चोर दरवाजे से घुसे हुए हैं?? जमीन पर उतरें, 40-50 एडिशनल सीटें जीतें। कांग्रेस के फ्यूचर के लिए अपनी स्टैंडिंग और वर्थ साबित करें, या चुपचाप इतिहास के कूड़ेदान में चले जायें।

कांग्रेस राज्यसभा खाली कराकर नए चेहरों को मौका दें। फायरब्रांड लोग, जो बोलने को खड़े हों तो महुआ मोइत्रा या संजय सिंह की तरह सत्ता में सिहरन पैदा कर दें। जमीन पर जाकर उसकी गूंज बनाएं। स्ट्रीट से निकले, आर्थिक अक्षम नेता, कम से कम सांसदी की सैलरी, स्टाफ और आभामंडल पाकर बेफिक्री से जनता में उतर सकेंगे। नई पत्तियां नई डालें उगेगी।

कांग्रेस की राज्यसभा इतिहास का म्यूजियम होने की जगह, अब फ्यूचरिस्टिक होनी चाहिए। ये नए नेताओं को लोकस स्टैंडी देने की, उन्हें खड़ा करने की जगह हो, बुढवों की आरामकुर्सी नहीं। इन कारतूसों को साबित करना चाहिए कि इनमें बारूद बचा है। वरना ये लायबिलिटी है, बेकार और दगे हुए कारतूस हैं। और दगे हुए कारतूस ढोकर युद्ध नहीं जीते जाते।


अन्य पोस्ट