विचार / लेख

प्रेस का नियंत्रण तभी लाभकारी...
23-Oct-2023 4:10 PM
प्रेस का नियंत्रण तभी लाभकारी...

पत्रकारिता का एकमात्र ध्येय सेवा होना चाहिए। समाचारपत्रों के पास बड़ी भारी शक्ति है, लेकिन जिस प्रकार अनियंत्रित बाढ़ का पानी पूरी बस्तियों को डूबा देता है और फसलों को नष्ट कर देता है, इसी प्रकार अनियंत्रित लेखनी की सेवा भी विनाशकारी होती है। यदि उसका नियंत्रण बाहर से किया जाए तो वह नियंत्रणहीनता से भी अधिक अनिष्टकारी सिद्ध होता है। प्रेस का नियंत्रण तभी लाभकारी हो सकता है जब प्रेस उसे स्वयं अपने ऊपर आरोपित करे। अगर यह तर्क सही है तो दुनिया के कितने पत्र इस कसौटी पर खरे उतरेंगे? लेकिन जो पत्रिकाएं निकम्मी हैं, उन्हें कौन रोके? अच्छाई और बुराई की तरह निकम्मी और उपयोगी भी साथ-साथ चलेंगी और मनुष्य को अपना चुनाव खुद करना होगा।

पत्रकारिता का सही काम लोकमानस को शिक्षित करना है उसे वांछित-अवांछित विचारों से भरना नहीं। इसलिए अखबार में क्या बात देनी है और कब देनी है, इसका निर्णय प्तपत्रकार को अपने विवेक से करना चाहिए।आज स्थिति यह है कि पत्रकार केवल तथ्य देकर संतोष का अनुभव नहीं करते। पत्रकारिता ‘घटनाओं की प्रबुद्ध पूर्व अपेक्षा’ की कला बन गयी है।

-महात्मा गांधी


अन्य पोस्ट