विचार / लेख

एक उम्र हो जाने पर....
23-Oct-2023 4:08 PM
एक उम्र हो जाने पर....

सिद्धार्थ ताबिश

80-85 साल की उम्र के लोगों को में कहते हुए देखता हूं कि ‘आप कहते हैं कि प्रकृति के बीच जा कर रहो, शहर से दूर.. रहो ज़मीन लेकर.. मगर वहां मेडिकल की सुविधा कैसे मिलेगी?’

मैं सच में समझ नहीं पाता हूं कि 80-85 साल को उम्र में भी मनुष्य ‘बचने’ के बारे में सोचा करता है? इतनी उम्र में पहुंचने के बाद भी उसने मरने की कोई तैयारी ही नहीं की?

और आप अगर अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि जिस व्यक्ति को बड़ी लंबी उम्र तक जीने की लालसा होती है उसके जीवन में कुछ भी ख़ास नहीं होता है.. वही सुबह उठना, खाना खाना, पार्क में जा कर योग करना, हगना और मूतना फिर सो जाना और इस रूटीन को जारी रखने के लिए उसे और 15 साल जीने की इच्छा रहती है.. ये थकते ही नहीं है इस रूटीन से कभी.. दवा खा खा के चलना है किसी तरह.. बस जीते जाना है.. क्यों?

एक उम्र हो जाने पर मरने के लिए तैयार हो जाइए.. क्यों ये सोचना कि जंगल में चले गए और हार्ट अटैक आ गया तो क्या होगा.. कुछ नहीं होगा आप बस मर जायेंगे.. आप परेशान इसलिए हैं क्योंकि आप मरने के लिए तैयार नहीं है.. क्यों इतनी उम्र में मेडिकल सुविधा चाहिए? क्यों नहीं अब इस उम्र में बिना किसी भय के जोखिम में साथ जी सकते हैं आप? कभी सफऱ खत्म करेंगे अपना या बस रास्ते पर चलते ही जाने का जुनून बनाए रहेंगे?

जोखिम ले कर, स्वयं के साथ, प्रकृति पर विश्वास करके अगर आप दो साल भी जी लिए तो आप जान जाएंगे कि असल में जीना कहते किसे हैं और फिर आप मरने के लिए तैयार हो जाएंगे।


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