विचार / लेख
अपूर्व गर्ग
जिस तरह मैंने इस जिंदगी में मोबाइल का प्रयोग नहीं किया, वैसे ही कभी पान नहीं खाया।
मैं नहीं जानता पान का स्वाद क्या होता है ! पर कुछ-कुछ जानता हूँ, इसका स्वाद क्या होता है, खाकर जब लोग जब चबाते बड़ा सा वृत्ताकार मुँह बनाकर बात करते हैं तो कुछ छींटें उडक़र स्वाद बता जाते हैं।
इसलिए पान चबाने वालों को देखकर मेरे दाँतों में भी अजब सी हल-चल जरूर मचती है।
मैंने देखा है,
प्रति घंटे की दर से पान चबाने वालों की शक्ल ही नहीं विचार भी बहुत मिलते हैं ।
इनके लगातार हिलते दांतों पर गौर करिये बिलकुल हमशक्ल दीखते हैं, भाई ! इसलिए मुझे शक होता है, ये लोग
एक जैसा ही सोचते हैं ।
मुँह में पान चबाते सहमति में सिर ज़्यादा हिलाते दीखते हैं ।
पान पर कुछ टोकाटोकी कर दो तो विद्वान लोग इसके उद्भव स्थल मलाया से लेकर मुगलों से होकर गुजरते शैलेन्द्र के गीत पान खाएँ सैंया हमारो। सब कुछ एक सांस में बता देते हैं।
दरअसल, जिस तरह मोबाइल पर बात करने का अनुशासन की बात की जाती है वैसे पान खाने वालों पर भी ये बात लागू होती है और दोनों नहीं सुधरेंगे।
न चाह कर भी मोबाइल धारी के सारे वार्तालाप का साक्षी बनना पड़ता है, न चाह कर भी पान का स्वाद भीतर लेना होता है।
इससे पहले कोई पान के वैज्ञानिक -सांस्कृतिक महत्व बताये मैं बताना चाहूंगा मैं कतई इसके विरोध में नहीं। पान में चूना ही तो लगता है और चूना लगने के तो हम आदी हैं।
जो ये कहते हैं पान स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है , मैं उनसे सहमत हूँ पर इससे आगे बढक़र कहना चाहता हूँ, ये स्वास्थ्य के लिए तब और भी अच्छा है जब आप इसके जूस का भी वमन की जगह सेवन करें। जैसे रसीले फलों को चबाकर जूस निगल जाते हैं वैसे ही पान भी चबाकर इसका जूस पी जाइये तो वो सारे विटामिन पेट में चले जाएंगे जो पान खाने वाले गिनाते हैं। इससे खाने वाला खुश, सामने वाला खुश।
पान खाने का बड़ा उद्योग है, रोजगार का जरिया है और इससे ज्यादा रोजगार मिलता है पान खाने के बाद की प्रक्रिया से।
दन्त चिकित्सक , दवा व्यापारी, सफाई कर्मी, लांड्री, पेंटर और पेंट उद्योग। को पान का बड़ा सहारा है।
जिस तरह शराब पीकर झूम -झूमकर कविताएँ -शायरी हुई हैं वैसे ही पान खाकर भी लोग कम बहके नहीं हैं ।
पान की लाली महबूब के होंठों पर देखकर खुद भी लोग लाल गुलाबी होते रहे ।
अकबर इलाहबादी तो पहले नंबर पर ही रहेंगे न-
‘लगावट की अदा से उन का कहना पान हाजिर है
कयामत है सितम है दिल फिदा है जान हाजिर है’
वाकई पान की एक अलग दुनिया है ,अलग किस्से हैं , यारियाँ हैं ,गिलौरियाँ हैं जिसका अलग भाईचारा है ।।
शायद यही वजह है मुझे पान चबाने वाले हमशक्ल दीखते हैं!


