विचार / लेख

धर्म के नाम पर हमें क्रूर बनाया जा रहा है?
13-Oct-2023 4:14 PM
धर्म के नाम पर हमें क्रूर बनाया जा रहा है?

  हिमांशु कमार

मैंने फैसला किया कि अब जब फेसबुक पर युद्ध का ऐलान हो ही चुका है तो चलकर पाकिस्तान का नामो-निशान मिटाने के महान काम में मुझे भी अपना योगदान देना चाहिए।

मैं राजस्थान के गड़रियों के साथ मिलकर पाकिस्तान में दाखिल हो गया।

पाकिस्तान में घुसने के बाद मैंने आसपास नजर दौड़ाई कि पाकिस्तान को बर्बाद करने की शुरुआत कहां से करी जाय?

मेरे आसपास रेत का मैदान और झाडिय़ाँ थीं।

 मैंने थोड़ी सी रेत बर्बाद करने की मंशा से हवा में उड़ा दी और सोचा कि कम से कम पाकिस्तान की कुछ रेत ही बर्बाद कर दूं।

लेकिन वह रेत उडक़र वापिस मेरी आँखों और कुछ मुंह में घुस गई।

अपना पहला वार खाली जाने के बाद गुस्से से मैंने कुछ पाकिस्तानी झाडिय़ों को बर्बाद करने के लिहाज से उन्हें उखाडऩा चाहा।

लेकिन रेगिस्तानी झाडिय़ाँ काँटों से भरी होती हैं इसलिए मेरे हाथ में कांटे घुस गये।

झाडिय़ों को कोसते हुए मैंने झाडिय़ां बर्बाद करने का आइडिया भी ड्राप कर दिया।

मैंने दूर नजर दौड़ाई तो वहाँ से मुझे धुंआ उठता दिखाई दिया, मैंने सोचा जरूर ये पाकिस्तानी आग जलाकर भारत को जलाने की तैयारी में लगे हुए होंगे।

जब मैं धुंए के नजदीक पहुंचा तो मैंने देखा कि धुंआ एक झोपड़ी से निकल रहा था।

मैंने सोचा अंदर आतंकवादी होंगे।

मैंने हाथ में एक डंडा ले लिया और घर के पीछे की तरफ गया।

घर के पीछे एक खिडक़ी थी।

मैंने चुपके से खिडक़ी के भीतर झाँका तो भीतर एक बूढ़ा आदमी चूल्हे पर रोटियाँ सेक रहा था।

कमरे में दीवार के साथ एक खाट पर एक बूढ़ी औरत लेटी हुई थी।

वो शायद बीमार थी क्योंकि वो बार-बार खांस रही थी।

जमीन पर एक बच्चा बोरी का टुकड़ा बिछा कर पढ़ रहा था।

मेरे खिडक़ी के झांकने से कमरे में आने वाली रोशनी कम हुई बूढ़े व्यक्ति ने मुझे नजर उठाकर देखा और पूछा कौन हो भाई, भीतर आ जाओ।

मेरा दिल जोर-जोर से धडक़ने लगा।

मुझे लगा अगर मैंने भागने की कोशिश करी तो अभी यह बूढ़ा चूल्हे के पीछे से एके फोर्टी सेवेन निकालकर मुझे भून देगा।

मैं डरते-डरते सामने के दरवाजे से घर के भीतर चला गया।

बूढ़ी महिला खटिया पर उठकर बैठ गई।

बच्चा भी पढ़ाई रोककर मुझे देखने लगा।

बूढ़े ने मेरे सामने बैठने के लिए एक लकड़ी का पीढ़ा सरका दिया और मटके से एक गिलास पानी निकालकर मेरे सामने खड़ा हो गया।

मैंने सोचा जरूर पानी में जहर डालकर लाया होगा।

लेकिन रेगिस्तान में इतनी देर चलने के बाद मेरा प्यास से बुरा हाल था इसलिए मैंने सारा पानी एक ही सांस में खत्म कर दिया।

बूढ़े ने कहा बेटा लगता है परदेसी हो, रास्ता भटक गये हो, भूख लगी होगी, लो रोटी खा लो।

मेरे मना करने के बाद भी बूढ़े ने एक एल्मूनियम की थाली में दो रोटी और आलू की सब्जी डाल कर मेरे सामने रख दी।

मैंने सोचा कि पाकिस्तान को बर्बाद करने के लिए जिंदा रहना जरूरी है इसलिए खाना खा लिया जाय।

मैं खाना खा रहा था तभी बूढ़े ने कहा हिन्दुस्तान की तरफ से आये लगते हो?

मुझे लगा कि जरूर यह बूढ़ा आईएसआई का एजेंट है।

मैं घिर चुका था मैंने डरते-डरते कहा जी हाँ रास्ता भटक गया था।

बूढ़े ने बेहद नरमी से कहा कोई बात नहीं यहाँ के गडरिये अपनी बकरियां चराते-चराते कभी कभी हिन्दुस्तान में चले जाते हैं।

मैं बोल दूंगा तो हमारे गाँव वाले तुम्हें हिन्दुस्तान पहुंचा देंगे।

मैंने सर नीचा करके कहा जी ठीक है।

बाहर रात हो गई थी बूढ़े ने कहा बेटा रात यहीं रुक जाओ, सुबह तुम्हारी वापसी का इंतजाम कर देंगे।

आधी रात को जब सब सो रहे थे तो मैं उठा और चुपके से बाहर निकल गया।

काफी दूर चलने के बाद एक सडक़ मिली।

सडक़ पर करीब एक किलोमीटर चलने के बाद एक ढाबा मिला।

ढाबे वाले से मैंने पूछा कि क्या यहाँ रुकने के लिए कोई इंतजाम हो सकता है।

ढाबे वाले ने कहा कि इतनी सारी खाटें पड़ी हैं किसी पर भी सो जाइये।

ढाबे पर मैं सुबह-सुबह उठ गया।

सामने से एक ट्रक गुजर रहा था।

मैंने ट्रक को हाथ दिया और उसमें सवार हो गया।

एक कस्बा देखकर मैंने कहा मुझे यहाँ उतार दो ।

जब उसे मैंने पैसे देने चाहे तो उसने भारतीय रूपये देखकर कहा कि जी आप तो हमारे मेहमान हो मैं आपसे पैसे कैसे लूँगा और ट्रक लेकर आगे बढ़ गया।

कस्बे में पहुँचने के बाद मैंने सोचा कि अब शायद मुझे पाकिस्तान को बर्बाद करने का मौका मिल सकता है।

तभी मुझे एक फौजी दिखाई दिया ।

मैंने सोचा कि हाँ मेरी लड़ाई तो पाकिस्तान आर्मी से ही है क्योंकि ये फौजी ही तो हम पर हमला करते हैं।

फौजी के करीब जाकर मैंने बहाना बनाया कि मैं पत्रकार हूँ और वीजा लेकर पकिस्तान में घूमने आया हूँ।

वो सिपाही मेरी बातों में आ गया।

मैंने उससे पूछा कि आपके भारत के बारे में क्या विचार हैं?

वो बोला कि देखिये सिपाही तो अफसर के आर्डर पर जंग लड़ता है।

सिपाही की किसी से दुश्मनी नहीं होती।

सिपाही तो हमेशा यही चाहता है कि अमन रहे।

उस फौजी ने कहा कि हमारे सामने बार्डर पर जो हिंदुस्तानी सिपाही खड़ा है वो पाकिस्तान के बारे में नहीं अपने बच्चों के बारे में सोचता रहता है।

हम भी अपने बच्चों के भविष्य के बारे में फिक्रमंद रहते हैं।

 

फौजी ने बताया उसके दो बच्चे हैं, बीबी को कैंसर हो गया है, इलाज करा रहा है।

उसने बताया कि मुझे हमेशा छुट्टी लेनी पड़ती है इसलिए अफसरों से कई बार मुझे ताने भी सुनने पड़ते हैं।

मुझे लगा इस फौजी को मारने से पकिस्तान को कोई नुकसान नहीं होगा, उलटे इसके अफसर खुश होंगे कि चलो एक बोझ कम हुआ।

पकिस्तान में घूमते हुए मैंने गरीब मजदूर देखे जो दिन भर काम करने के बाद भी अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते।

मैंने किसान देखे जो कड़ी मेहनत के बाद भी अपने परिवार को इलाज और शिक्षा देने में असमर्थ हैं।

मैंने पढ़े-लिखे नौजवान देखे जो बिना नौकरी के परेशान हैं।

मैंने पाकिस्तान में भी धार्मिक लोगों को मजे में देखा।

उन्हें देखकर मुझे भारत के धार्मिक नेताओं की याद आ गई जो धर्म के नाम पर हमें लड़वाते रहते हैं।

पकिस्तान में भी ऐसे भडक़ाने वाले लोग बड़े ताकतवर थे।

मैंने देखा जैसे भारत में पाकिस्तान के खिलाफ भडक़ाकर वोट मांगे जाते हैं वैसे ही पाकिस्तान में भी भारत के खिलाफ भडक़ाकर नेता लोग वोट मांग रहे थे।

पाकिस्तान में मुझे एक युवक मिला उसने मुझसे कहा कि मेरी समझ में नहीं आता कि भारत पाकिस्तान को और क्या बर्बाद करना चाहता है? हम तो पहले से ही बर्बाद हैं?

उसकी बातें सुनकर मुझे भारत की बर्बादी याद आ गई।

हमारे भारत में भी तो किसान बर्बाद हो रहे हैं, मजदूरों के ऊपर मजदूरी बढ़ाने की मांग करने पर पुलिस लाठी चलाती है।

हमारे देश में भी बड़े पूंजीपतियों के लिए लाखों आदिवासियों को जंगल से बाहर खदेड़ा जा रहा है।

अब पाकिस्तान को बर्बाद करने का मेरा जोश कमजोर पडऩे लगा था।

मैं जहां भी जाता था मुझे भारतीय जानकर लोग मुझे बहुत प्यार देते थे।

मैंने सोचा पाकिस्तान को बर्बाद करने का मतलब क्या इन प्यारे लोगों को बर्बाद करना है?

क्या हम इन स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को मारना चाहते हैं?

क्या हम इन निर्दोष औरतों को या रोजग़ार तलाश कर रहे नौजवानों को मारना चाहते हैं?

आखिर जब हम कहते हैं कि पाकिस्तान का नामो निशान मिटा दो तो हम इन निर्दोषों की हत्या के लिए तो अपनी सरकार को कहते हैं।

यह सोचते हुए मेरा सर चकराने लगा।

मुझे लगा हे प्रभु यह मैं क्या पाप करने चला था?

हमें धर्म के नाम पर इतना क्रूर बनाया जा रहा है?

और हम मूर्ख इन भडक़ाने वाले दुष्टों के पीछे लगे हुए हैं?

अब मेरी आंखें खुल चुकी थीं।

मैं जिस रास्ते भारत से पाकिस्तान गया था उसी रास्ते वापिस आ गया।


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