विचार / लेख
पंकज श्रीवास्तव
खेल और सांस्कृतिक क्षेत्र पर भी सरकार पूरा ध्यान दे रही है। इसी के तहत 2022 में छत्तीसगढिय़ा ओलंपिक की परंपरा शुरू की गयी जिसमें 14 पारंपरिक खेलों की स्पर्धाएं होती हैं। साथ ही 2226 किलोमीटर की राम वन गमन परिपथ परियोजना को 137 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। भगवान राम ने 14 साल के वनवास के 10 वर्ष छत्तीसगढ़ में ही बिताये थे। छत्तीसगढ़ पर्व सम्मान निधि के अंतर्गत गैर अनुसूचित क्षेत्रों की 6111 ग्राम पंचायतों में तीज त्यौहार मनाने के लिए 10 हजार रुपए की दो किस्तें दी जा रही हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कार्यकाल तमाम समस्याओं से ग्रस्त इस राज्य के इतिहास में कायाकल्प के रूप में दर्ज हो गया है। उन्होंने ज़मीनी अनुभव और दूरदृष्टि से देश को शासन-प्रशासन का ऐसा ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ दिया है जो किसी चमकम विज्ञापनी अभियान की वजह से चर्चा में नहीं आया बल्कि इसने सूबे के किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं से लेकर व्यापारियों तक की जि़ंदगी में रंग भरा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव किया है।
छत्तीसगढ़ एक कृषिप्रधान राज्य रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए न्याय योजनाओं के माध्यम से किसानों के साथ-साथ पशुपालकों और खेतिहर मज़दूरों को भी आर्थिक लाभ दिया गया। भूपेश बघेल सरकार ने 17 लाख 82 हजार किसानों का 9,270 करोड़ का कर्ज माफ किया। सिंचाई ऋण का 325 करोड़ माफ किया। यही नहीं, बस्तर में लोहांडीगुड़ा के 1707 किसानों की अधिग्रहण की गयी 4200 एकड़ भूमि उन्हें वापस लौटाई गयी। अधिग्रहीत भूमि को किसानों को वापस मिलना एक विरल घटना है।
भूपेश बघेल सरकार ने मत्स्य पालन और पशुपालन की अहमियत को समझा जिससे की बड़ी आबादी जुड़ी हुई है। इसके लिए क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण सुविधा योजना लागू की गयी। मछली पालन को कृषि का दर्जा देने का असर ये हुआ कि छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन में देश में छठवाँ और मछली बीज उत्पादन में पाँचवाँ स्थान प्राप्त कर चुका है। इसी के साथ लाख की खेती को भी कृषि का दर्जा दिया गया। लाख की खेती करने वाले 50 हजार किसान इस समय चार हजार टन लाख का उत्पादन करते हैं जिसका मूल्य लगभग सौ करोड़ रुपये है। बिजली के क्षेत्र में किसानों को लगभग 11 हजार करोड़ की राहत मुख्यमंत्री के पहले चार साल के कार्यकाल में दी गयी। राज्य में 400 यूनिट विद्युत खपत पर 50 फीसदी की छूट दी जा रही है। एससी, एसटी वर्ग के किसानों को सिंचाई हेतु निशुल्क बिजली दी जा रही है। खेत मज़दूरों के पास जमीन का मालिकाना नहीं होता लेकिन खेती की तरक्की में उनका योगदान बेहद अहम होता है। इसीलिए भूपेश बघेल सरकार उन्हें 7 हजार रुपये वार्षिक की सहायता दे रही है। करीब 5 लाख 63 हजार परिवार इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लागत मूल्य और बाज़ार मूल्य के दुष्चक्र को बड़े करीब से देखा है। इसलिए उन्होंने विभिन्न फसलों के समर्थन मूल्य में भारी इजाफा किया है। समर्थन मूल्य पर दलहनी फ़सलों की खरीद सुनिश्चित की है। धान खरीद केंद्रों की संख्या 2617 हो चुकी है। प्रति एकड़ 15 की जगह 20 क्विंटल धान खरीदी करने का ऐलान हो चुका है। बारदाने का मूल्य भी 18 से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया गया है। यह भी तय किया गया है कि जिस रकबे से किसान द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया गया था, यदि वह धान के बदले कोदो, कुटकी, गन्ना, अरहर आदि या केला,पपीता की खेती या फिर वृक्षारोपण भी करता है तो उसे प्रति एकड़ दस हजार रुपये की इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही महुआ, इमली, चिरौंजी, शहद समेत 65 लघु वनोपज की सरकार उचित दाम पर खरीद कर रही है। लघु वनोपज प्रसंस्करण से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की संख्या 4239 से बढक़र 17,424 हो गई है और राज्य में 3945 ग्राम स्तरीय संग्रहण केन्द्र संचालित हैं। ये तस्वीर सारी कहानी खुद कहती है।
छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का एक ऐसा अभिनव प्रयोग है जिसकी सराहना पूरे देश में हो रही है। इस योजना ने गोबर को भी आय का स्रोत बना दिया। सरकार इस योजना के तहत 2 रुपये किलो की दर से गोबर और 4 रुपये लीटर की दर से गोमूत्र खरीद रही है। इस योजना के तहत 10,278 गौठान निर्मित किए गये और 3,63,127 पशुपालकों को इसका लाभ हुआ। इस योजना के तहत 542 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस योजना ने स्थानीय स्तर पर जैविक खाद उत्पादन को गति दी है, साथ ही आवारा पशुओं की समस्या को भी नियंत्रित किया है। यही नहीं गौठानों को महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क योजना (रीपा) के तहत विकसित किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की सुराजी गाँव योजना गांधी जी के ग्राम स्वराज की याद दिलाता है। नरवा (बरसाती नाले), गरुवा (पशुधन), घुरवा (कम्पोस्ट खाद निर्माण) और बारी (सब्जी और फलोद्यान) के विकास ने पूरी तस्वीर बदल दी है। 30 हजार नरवा के विकास से सिंचाई रकबे में 11,564 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है जो एक मिसाल है। गरवा कार्यक्रम के तहत लगभग छह हजार स्वालंबी गौठानें सक्रिय हैं जिन्होंने 212336 स्वसहायता सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराया है। घुरवा कार्यक्रम के तहत अप्रैल 2023 तक 32.72 लाख क्विंटल जैविक खाद का उत्पादन हुआ और बारी के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक बाडिय़ों का बड़े पैमाने पर विकास हुआ। सहकारिता के क्षेत्र में भी लगातार तरक्की देखी जा रही है। सहकारी चीनी मिलों में इथेनॉल प्लांट की स्थापना हुई। बस्तर और सरगुजा में सुलभ बैंकिंग सुविधा शुरू हुई। कृषि साख सहकारी समितियों की संख्या बढक़र 2058 हो गयी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने को लेकर काफी सचेत हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी और हिंदी माध्यम स्कूल खोले गये जिनमें 2 लाख 5 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसी के साथ 10 महाविद्यालय खोलने की भी स्वीकृति दी गयी है। सरकार बेरोजगारों को हर महीने 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ता दे रही है। युवाओं की रचनात्मकता को पंख देने के उद्देश्य से 13,242 राजीव मितान क्लब गठित किये गये हैं जिन्हें प्रति वर्ष एक लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं की फीस माफ कर दी गयी है। रोजगार मिशन के तहत सरकार ने 15 रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा है जिसे लगातार पूरा किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना ने स्वास्थ्य सेवाओं को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँचाया है। इस योजना से 1.16 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं। इसी तरह शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत 51 लाख और दाई-दीदी क्लीनिक से 1,52,361 लोगों को लाभ हुआ है। इसी तरह डॉ.खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत अब तक 24 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं। इसी के साथ मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 2643 मामलों में 80 करोड़ से ज़्यादा की सहायता दी गयी है। इसके तहत दुर्लभ बीमारियों में 20 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। (बाकी पेज 8 पर)
राज्य में 10 मेडिकल कालेजों के बाद चार नये मेडिकल कालेजों भी स्वीकृत हुए हैं। राज्य में 195 श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर का संचालन हो रहा हैं जहाँ रियायती दर पर दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार का महिला सशक्तिकरण पर पर विशेष ध्यान है। गरीब परिवारों की 10 लाख 61 हजार महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 50 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन के रूप में भी पाँच सौ रुपये दिये जा रहे हैं। महिलाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।
छत्तीसगढ़ में उद्योगों का भी तेजी से विकास हो रहा है। औद्योगिक नीति 2019-2024 में फूड, एथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, दवा, सोलर जैसे नए उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है। इसमें वनांचल उद्योग पैकेज के अंतर्गत स्थापित होने वाली इकाइयों अधिकतम 50 लाख प्रति वर्ष अनुदान देने का प्रावधान है। राज्य के 146 विकासखंड़ों में 200 फूड पार्कों की स्थापना की जा रही है। इस दौरान 2367 उद्योग स्थापित हुए, जिसमें 22 हजार 81 करोड़ रुपए की पूंजी का निवेश किया गया और 42,906 लोगों के लिए रोजगार का सृजन हुआ।
खेल और सांस्कृतिक क्षेत्र पर भी सरकार पूरा ध्यान दे रही है। इसी के तहत 2022 में छत्तीसगढिय़ा ओलंपिक की परंपरा शुरू की गयी जिसमें 14 पारंपरिक खेलों की स्पर्धाएं होती हैं। साथ ही 2226 किलोमीटर की राम वन गमन परिपथ परियोजना को 137 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। भगवान राम ने 14 साल के वनवास के 10 वर्ष छत्तीसगढ़ में ही बिताये थे। छत्तीसगढ़ पर्व सम्मान निधि के अंतर्गत गैर अनुसूचित क्षेत्रों की 6111 ग्राम पंचायतों में तीज त्यौहार मनाने के लिए 10 हजार रुपए की दो किस्तें दी जा रही हैं।
भूपेश बघेल सरकार सामाजिक-आर्थिक सर्वे कराकर समाज के विभिन्न वर्गों के विकास और पिछड़ेपन की सच्ची तस्वीर सामने लाने का प्रयास कर रही है। इससे विकास योजनाओं को बनाने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी। (लेखक दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं)


