विचार / लेख
-डॉ. आर.के. पालीवाल
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री, प्रदेश का प्रचार प्रसार विभाग और अधिकांश सरकारी मशीनरी सत्ता प्राप्ति की नई सीढ़ी बनती दिख रही मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना को प्रदेश के कोने कोने तक पहुंचाने में जुटे हैं। भले ही यह योजना गरीब वर्ग की महिलाओं के खाते में सीधे हर महीने एक हज़ार रूपए जमा करने की सीधी सरल योजना है लेकिन मुख्यमंत्री जिले जिले घूमकर, अखबारों में विज्ञापन देकर, चौराहों पर पोस्टर लगवाकर न केवल जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई हवा में उड़ा रहे हैं बल्कि जनता के तमाम जरूरी मुद्दे छोडक़र पूरी प्रशासनिक मशीनरी इस योजना के भव्य समारोहों के लिए महिलाओं की भीड जुटाने में लगी है।
सत्ता, जन धन और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का यह अपनी किस्म का अनूठा मामला है। इक्कीसवीं सदी में जब अधिकांश आर्थिक लेन देन नेट बैंकिंग से हो रहा है तब किसी योजना के प्रचार के लिए सिर्फ चुनाव जीतने के लिए सरकारी तंत्र का इतना फूहड़ प्रदर्शन लोकतंत्र के नैतिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है।
ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादुई चमत्कार कर्नाटक विधानसभा में हार के बाद के बाद फीका पड़ गया है और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा का नेतृत्व गृह प्रदेश हिमाचल प्रदेश में असफल होने के बाद विश्वसनीय नहीं रहा इसलिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सत्ता बचाने के लिए लाड़ली बहना योजना को ढाल बनाकर चुनावी रणभूमि में उतरे हैं और तमाम आलोचनाओं से बेखबर होकर लाडली बहना योजना के विज्ञापन और प्रचार प्रसार पर पूरी ताकत झौंक रहे हैं।
उन्हें पूरा विश्वास है कि बहनों से राखी बंधवाकर वे भारतीय जनता पार्टी को जिताने का जो संकल्प ले रहे हैं वह उनकी जीत सुनिश्चित करेगा। भले ही कानूनी तौर पर इस तरह की योजना का बेहिसाब प्रचार जायज हो लेकिन चुनावी वर्ष में यह सीधे सीधे मतदाताओं के बड़े वर्ग के लिए सीधा प्रलोभन है। केन्द्रीय चुनाव आयोग के नेत्र भले ही चुनाव अधिसूचना जारी होने पर खुलते हैं लेकिन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में इस रेवड़ी कल्चर को सबसे ज्यादा उनके दल की मध्य प्रदेश सरकार ही बढ़ा रही है। जिस तरह प्रधान मंत्री की भव्य देशी विदेशी रैलियों के लिए बड़ा मंच सजाया जाता है इस योजना के लिए वैसा ही भव्य मंच शिवराज सिंह चौहान भी सजा रहे हैं।
कांग्रेस ने इस योजना को धराशायी करने के लिए पंद्रह सौ रुपए का शिगूफा छोडक़र पानी फेरने की तैयारी की थी। सरकार को लगा कि उसकी सारी मेहनत बेकार चली गई इसलिए रक्षाबंधन पर यह राशि बढ़ाकर बारह सो पचास रुपए कर दी और यह घोषणा भी कर दी कि भविष्य में समय समय पर ढाई सौ रुपए बढ़ाकर यह राशि तीन हजार रूपए प्रतिमाह तक बढ़ाई जाएगी। संभव है निकट भविष्य में कांग्रेस भी पंद्रह सौ में पांच पांच सौ का इजाफा कर इसे पांच हजार तक बढ़ाने का जुमला उछाल दे।


