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जिन पहाड़ों पर से चाँद सबसे सुंदर नजऱ आता है, वो संकट में हैं, ये राष्ट्रीय आपदा
24-Aug-2023 7:48 PM
जिन पहाड़ों पर से चाँद सबसे सुंदर नजऱ आता है, वो संकट में हैं, ये राष्ट्रीय आपदा

फोटो साभार: ट्विटर/@himachalpolice


-अपूर्व गर्ग
माफ़ कीजियेगा चंद्रयान की सफलता की बधाई देने के बाद आपको उन पहाड़ों में ले जाना चाहूंगा जहाँ बसे न जाने कितने घर बारिश मिट्टी में मिलकर ज़मींदोज़ हो गए।

हो सकता है , इस वक्त ये सुनकर पीड़ा हो... माफ़ी चाहता हूँ...

जो पहाड़ चांदनी में नहाकर चमकते हैं और चाँद जिन पहाडिय़ों से सबसे गोरा सुंदर नजऱ आता है उस पर संकट के बादल छाए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल में अब तक 330 जानें जा चुकी हैं और 12,000 घर तबाह हो चुके हैं। तकरीबन 13 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

बहुत भयानक मंजर है। जान जा रही, लोग बेघर हो रहे और कारोबार ठप्प। जबकि अभी लॉकडाउन से मिले ज़ख्म अभी भरे नहीं हैं।

फटते बादल निगलने को तैयार हैं। तेज बारिश में कब सडक़ बहे, घर बह जाए कहा नहीं जा सकता!

ऐसा पिछले 50 बरसों में नहीं हुआ। दोस्त ने बताया आस-पास क्या दूर-दूर तक लोग जागते रहे कोई सो नहीं रहा।

नींद कैसे आए? जरा सोचिए... जो पहाड़ इस दुनिया को तरोताजा कर भेजते हैं, क्या इस बारिश में हम उनके आंसुओं का सैलाब देख पा रहे?

इस मौके पर मुझे एक भी राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी।

वहां जो बर्बाद हुए, तबाह हुए वो सभी विचारों के लोग हैं। प्रकृति का प्रकोप बराबरी से है। सभी राजनीतिक दलों को बराबरी से हिमाचल को प्राथमिकता पर रखते हुए अपना पूरा ध्यान और फोकस यहीं करना चाहिए।

पहाड़ की बर्बादी की कीमत मैदानों को भी चुकानी होगी।

पहाड़ पुकार रहे हैं, आपने सुना?

हिमाचल की चीख क्या दिल्ली ने सुनी?

क्या उन तमाम लोगों ने सुनी जिनके मोबाइल हिमाचल की सुंदर तस्वीरों से भरे हैं ?

पिछले 50 सालों में पहली बार ऐसी भयानक तस्वीर उभरी है जो इस देश की तस्वीर ही है।

आहत हिमाचल नहीं हम सब हैं । ये हम सब पर आपदा है।

ये राष्ट्रीय आपदा है।

देश भर के 75,000 पर्यटकों और 17,000 फंसी गाडिय़ों को तो हिमाचल ने 48 घंटे में सुरक्षित निकाल लिया।

पर अब बारी और जिम्मेदारी हमारी है हिमाचल को इस आपदा से बाहर निकलने की। ये तभी बेहतर सम्भव होगा जब तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित कर हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय आपदा के तहत मिलने वाला राहत पैकेज देना चाहिए।

आइए हम भी आगे बढ़ें हाथ बढ़ाएं। चाँद जिस तरह नि:स्वार्थ अपनी चांदनी बिखेरता है इसी तरह हम भी अपनी इंसानियत बिखेरें।

इसरो ने कितनी ख़ूबसूरती से मेहनत से अपना काम किया।

आइए हम भी ऐसी मेहनत से जज़्बे से प्यारे पहाड़ी भाइयों के साथ खड़े होकर इस ख़ूबसूरत दुनिया को बचाएं।


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