विचार / लेख

आजादी का अमृत काल, बस, 15 अगस्त तक
07-Aug-2023 2:36 PM
आजादी का अमृत काल, बस, 15 अगस्त तक

  प्रकाश दुबे

आरोप गंभीर है-देशद्रोह और भारत के विरुद्ध युद्ध छेडऩे का। मणिपुर में जारी हिंसा के बीच उसने राज्य में कदम रखने की जुर्रत की। वह भी तफरीह के लिए सैलानी की तरह नहीं। तथ्यान्वेषण समिति में शामिल होकर। आरोपपत्र के हिसाब से उम्रकैद हो सकती है। करेला और नीम चढ़ा। उसके पास वकालत की सनद है। मणिपुर की पुलिस के हाल पर आम पाठक हंसे या रोए, अदालत ने फुर्ती दिखाते हुए आनन फानन में गिरफ्तारी का फरमान जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने वकील दीक्षा द्विवेदी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई।

अगली राहत के लिए मणिपुर उच्च न्यायालय की देहरी खटखटाने के लिए कहा। वकील के अंदेशे को भांपते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से चार सप्ताह के अंदर अपना पक्ष रखने कहा। आजादी का यह अमृतकाल वकील दीक्षा द्विवेदी के लिए 15 अगस्त तक जारी रहेगा या नहीं? हम आप काहे फिक्र करें? भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ की विचारशीलता से हैरान लोगों को इतनी दिलासा मिलेगी कि तलवार लटकी है।

दल बदल की फसल लहलहाई 

ज्योतिषियों के कामकाज में हस्तक्षेप किए बगैर दावा कर सकता हूं कि केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी की भाग्य रेखा अभिनेत्री की भाग्य रेखा से हजार गुने अधिक मजबूत है।मात्र इसलिए नहीं, कि मंत्री रहते हुए तेलंगाना प्रदेश पार्टी के अध्यक्ष बना दिए गए। ऊपर वालों की मेहरबानी के बाद राज्य का दौरा किया। इतिहास में दर्ज है कि बादशाह के कंधे पर बाज बैठाकरते थे। मंत्री सह प्रदेशाध्यक्ष का सेहरा लगाए राज्य में पहुंचे तो सत्कार के साथ कुछ दलबदलू कतार में खड़े मिले। इनमें जनजाति बहुल जिले के दो पूर्व विधायक शामिल हैं। किशन रेड्डी पूर्वोत्तर विकास मंत्री भी हैं।

मणिपुर जाकर क्या करते? बड़े बोल बोलने वाले चुप हैं। मणिपुर की राज्यपाल आदिवासी हैं। वे मुंह खोलें। बहरहाल आदिवासी हितैषी मंत्री ने एक आश्वासन अवश्य दे डाला। उनका कहना है कि जनसंख्या के अनुपात में तेलंगाना में जनजाति समुदाय का आरक्षण बढऩा चाहिए।  क्रिकेट की तरह राजनीति में गुगली फेंकने में माहिर किशन रेड्डी के बयान से मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के माथे पर शिकन होनी चाहिए। इसे कहते हैं-हर्र लगे न फिटकरी-

कर्नाटक का नाटक गांव गांव में

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया को इतना कहने का हक है कि विरोधी अफवाहें फैलाकर सरकार को बदनाम करते हैं। विधायक असंतुष्ट हैं। मंत्री बनने की लालसा में कर्नाटक के पसंदीदा दलबदल नाटक में शामिल हो सकते हैं, आदि आदि। कामकाज ठीक से नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय में फाइलों का अंबार लगा है। अफवाह को हवा देने वालों में भाजपा, कुमारस्वामी और मंत्री पद लालची अपने विधायकों में से किस की तरफ निशाना है? यह साफ साफ नहीं बताया। ध्रुव सत्य मुख्यमंत्री जानते हैं और उनके उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार भी। कई पार्टी विधायक दो टूक कह चुके हैं कि मंत्री फंत्री का फैसला बाद में करते रहना। सबसे पहले हमारे विधानसभा क्षेत्र के तहसीलदार से लेकर थानेदार को बदलो। कारण? ये सब-सब पिछली सरकार में हमारी नाक में दम कर चुके हैं। दिल्ली बैठक में राष्ट्रीय नेताओं से विधायकों ने अनेक विभागों की जानकारी देते हुए मांग दोहराई। तबादलों के साथ दान-दक्षिणा का आरोप हवा में तैरने लगेगा। विपक्ष ताक में है। आपके सहानुभूति जताने से सिद्धरामैया की समस्या हल होने वाली नहीं है।

गड्डी ठीक से फेंटना जादूगर पुत्र

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को 90 बरस की वृद्धा ने आशीष दिया-फिर से मुख्यमंत्री बनो। मुख्यमंत्री का जवाब अप्रत्याशित था। मैं तो नहीं चाहता, लेकिन यह कुर्सी मुझे नहीं छोड़ रही है। अब आप यह मत सोचो कि सचिन पायलट को सुनकर कैसा लगा होगा? मिठबोले मुख्यमंत्री चुनावी जादू जानते हैं। एक दिन का किस्सा सुनकर ही सब समझ जाएंगे। तारीख 31 जुलाई 2023 और समय दिया बत्ती लग जाने के बाद का। 53 पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण की सूची से महकमे के कई चेहरों पर मुस्कान खिल गई। दिल थाम कर बैठिए। 

सचिवालय में बहुत काम होता है। जिलों का का राजकाज संभालने वाले भी कान लगाए बैठे थे। उनका अनुमान सही था। एक और सूची जारी हुई। राजस्थान प्रशासनिक सेवा के 336 तबादला आदेश शामिल थे। ईडी फीडी अपना काम करता रहे। अशोक का जादू कितना काम करेगा? यह तो गहलोत भी नहीं जानते। हम यह अवश्य  बता सकते हैं कि मुख्यमंत्री के पिता जोधपुर के जाने माने जादूगर थे।

(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)


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