विचार / लेख

ओपनहाइमर देखते हुए...
01-Aug-2023 4:30 PM
ओपनहाइमर देखते हुए...

 अणु शक्ति सिंह

युद्ध का एक कि़स्सा मेरे ज़हन में आधा-अधूरा है। शायद यह जापानी ही है जिसे बचपन में कभी पढ़ा गया था।

कहानी कुछ यूँ है, ‘सुबह का वक्त है। पति दफ्तर के लिए निकल चुका। पूरे गर्भ वाली पत्नी दो साल के बेटे को नहला रही है। बेटा नहाने में बदमाशी कर रहा है। हाथ से फिसल फिसल जा रहा है। साबुन उसकी आँखों में चला गया है। बेटे की कुनमुनाहट चालू है कि गर्भस्थ शिशु भी हलचल करता है। बेटे को थामते हुए महिला बैठती है। आने वाले शिशु के विषय में सोचती है। उम्मीद करती है कि बेटी होगी।

वह खयाल में ही डूबी है कि धमाका होता है। धमाके में लाखों लोग तुरंत मर जाते हैं।

पति बचता है किसी तरह। वह अपने घर पहुँचता है। जली हुई हालत में माँ-बेटे की लाश मिलती है। स्त्री के पेट से बाहर गर्भस्थ शिशु जिसके गाल पर बड़ा सा चीरा है।’

मैं कहानियाँ नहीं भूल पाती, न ही कविताओं का मजमून। यह किस्सा मेरी चेतना में दु:ख बनकर बैठा हुआ है। आज वह दु:ख क्रिस्टोफर नोलान की ओपनहाइमर ने एक बार फिर सहला दिया।

यह फि़ल्म एक ऐसे वैज्ञानिक की गाथा हो सकती है जिसने अमेरिका को कथित रूप से उसका आज दिया। उसके उत्थान और पतन के रूप में दर्ज किया जा सकता है।

या फिर एक बेहद महत्वाकांक्षी राजनयिक के बदले और चाहनाओं के फलक कीज् पर कहानी इतनी ही सीधी होती तो क्रिस्टोफर नोलान की कृति कैसे होती?

इंटरस्टेलर बनाने वाला शख़्स तहों में कहानियाँ बुनता है। आण्विक गुणों को जुदा ढंग से समझने के लिए बेकरार ओपनहाइमर ब्लैक होल पर जर्नल लिखता है। यह युद्ध में डूबा हुआ काल है। हिटलर की क्रूरताओं का। यहूदियों के हॉलोकास्ट होने का और अपनी जमीन छोडक़र भाग जाने का। अपने समय का महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंटस्टाइन दशक पहले ही अपने यहूदी होने की कीमत अदा कर चुका था। जर्मनी छोडक़र अमेरिका जा बसा था। दुनिया खून और मांस के लोथड़े में बंटी हुई थी।

क्रूरताएँ अपनी पराकाष्ठा पर थीं, और और वीभत्सताओं का इंतजार करते हुए। ठीक इसी वक़्त विज्ञान भी अपने उरूज पर था। क्वांटम मैकेनिक्स की दुनिया में एक साथ कई उस्ताद सक्रिय थे। नील्स बोर अपने गुरु रदरफोर्ड के थिर परमाणु सिद्धांत को खारिज कर चुके थे। परमाणु के नाभिक से जुड़ी हुई कई नई बातें दुनिया के सामने थीं।

उसी जाहिर समय जर्मनी में भी एक कमाल का फिजिसिस्ट वर्नर हाइजनबर्ग भी काम कर रहा था। वही जिसने क्वांटम मैकेनिक्स का सिद्धांत दिया था।

दुनिया भर में खुसफुसाहट थी, हाइजनबर्ग के न चाहने पर भी हिटलर उससे ऐसा हथियार बनवा सकता था जो दुनिया को नेस्तनाबूद कर दे। अमेरिका पहले यह हथियार बनवाना चाहता था।

एक वैज्ञानिक को इसकी बागडोर सौंपी जाती है। ओपनहाइमर को वह अपनी टीम बनाता है। उसका एक साथी उसे चेन रिएक्शन को लेकर आगाह करता है। दुनिया के खत्म हो जाने का खतरा मंडराने लगता है।

अमेरिका जल्दबाज़ी में है। फ़्लैशबैक में चल रही कहानी को सुना रहा राजनयिक अपनी ताजपोशी के इंतजार में है।

उस कहानी में ग्रीक कथाओं का वह देश-निकाला नायक है जिसने ईश्वर से आग चुराकर मनुष्यों को दे दी और ख़ुद नर्क में जलता रहा। उसी कहानी में अंतर्मन की जागृति लिए हुए भारतीय मिथक है जो संभोग के क्षणों में भी कर्तव्यबोध जागृत करता है। मनुष्यता को प्रश्रय देता है।

ग्रीक कथाओं का शापित नायक अचानक से ओपनहाइमर के चेहरे में नजऱ आने लगता है। अमेरिका के एक छुपे हुए शहर में वैज्ञानिकों के एक दल से जूझते हुए, उनकी सहमति-असहमति झेलते हुए।

दूसरा विश्व युद्ध लाखों जान ले चुका है। जर्मनी हार रहा है। जापान नहीं हारेगा, अमेरिका जानता है। जापान को हराना है तो वह हथियार चाहिए। ओपनहाइमर की टीम लगी हुई है। वे लगातार काम कर रहे हैं। उनकी तड़प, चाह देखकर कौन नहीं चाहेगा कि वे सफल हो जाएँ।

यहीं नोलान का जादू चलता है। आप चाहते हैं कि ये संघर्षरत वैज्ञानिक सफल हों। आपके पेट में मरोड़ें उठने लगती हैं कि उनका सफल होना लाखों जान की क़ीमत होगा। आप एक बारगी चाहते हैं कि यह परीक्षण फेल हो जाए। एक दूसरा कि़स्सा लिख दिया जाए, ठीक टेरेंटीनो की इनग्लोरियस बास्टर्ड की तरह।

आप यह भी जानते हैं ओपनहाइमर सफल हुआ था। हिरोशिमा बर्बाद हो गया था। नागासाकी नेस्तनाबूदज् उसी वक्त लाखों लोग मारे गये थे। पीढिय़ाँ बाद तक मरती रही थीं।

ओपनहाइमर परमाणु बम बना लेता है। अमेरिका जश्न में झूमता है। जापान आग में खत्म होता है। ओपनहाइमर के जहन में जहन्नुम का एक दरवाजा खुलता है जहां पछतावा उसे रोज जला रहा है। नोलान इसे शब्दों में नहीं, बिंबों में दर्ज करते हैं। नोलान हिन्दी कविता लिख रहे होते तो जरूर केदारनाथ सिंह के अच्छे मित्र होते। बिंब और दर्शन अपनी संपूर्णता में, यही तो नोलान की खासियत है।

ओपनहाइमर का किस्सा कायदे से लिटल बॉय और फैट मैन के छ: और नौ अगस्त को फटने के बाद ख़त्म हो जाना चाहिए था।

इस खात्मे को तारीफों से और सम्मानों से सजा हुआ होना था पर क्या मनुष्यों को आग देने वाले नायक प्रोमेथियस की मुक्ति संभव थी?

एक आग जलती रही। देव भंजित होते रहे, शाप देते रहे। यूरेनियम के परमाणु का चेन रिएक्शन दुनिया तो नहीं ख़त्म कर पाया। एक दूसरी शृंखला शुरू हो गई। रुस और अमेरिका का शीत युद्ध दुनिया भर में आण्विक हथियारों के जखीरे के तैयार होने की शुरुआत थी।

ओपनहाइमर मेडल ऑफ मेरिट के साथ मुस्कुराते हैं। नोलान के निर्देशन से कसी सिलियन मर्फी की मुद्राएँ थोड़े और दु:ख के साथ हृदय में धंस जाती हैं। कोई मृत शरीर नहीं दिखता है। रक्त की बूँद भी नहीं। बावजूद इसके युद्ध दिखता है, विध्वंस भी। कचोट से मन भर उठता है। फादर ऑफ एटोमिक बॉम्ब माने जाने वाले काले-सफ़ेद में लिपटे नायक के लिए संवेदनाएँ तड़प उठती हैं। भविष्य दिखता है। अंधेरा दिखता है। शक्ति की लड़ाइयों की चौंध में बंद हो जाती हैं आँखें। (ओपनहाइमर देखते हुए)


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