विचार / लेख

गांधी को गरियाने वालों से विनम्र अनुरोध
31-Jul-2023 4:04 PM
गांधी को गरियाने वालों से विनम्र अनुरोध

 डॉ. आर.के. पालीवाल

हमारे यहां आजकल महात्मा गांधी को गरियाने का नया फैशन सा हो गया है। विशेष रूप से सोशल मीडिया पर कुछ लोग बंटवारे से लेकर तुष्टिकरण तक गांधी को कसूरवार ठहराने के फतवे जारी करते हैं। ऐसे लोग खुद तो गांधी के विराट व्यक्तित्व से परिचित नहीं हैं लेकिन युवाओं के अधपके मन को भ्रमित कर रहे हैं। ऐसे लोगों से एक विनम्र अनुरोध है कि वे थोड़ी देर ठहरकर शांति से अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर यह सोचें कि आखिर देश विदेश की इतनी सारी नामचीन हस्तियां सत्य, शांति और सादगी के महान उपासक महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और चरित्र को क्यों सर्वोच्च कोटि का मानती थी और क्यों आज भी विश्व के करोड़ों लोग उनके बताए शांति के रास्ते को सर्वश्रेष्ठ मार्ग मानते हैं। आखिर क्यों संयुक्त राष्ट्र संघ ने गांधी के जन्मदिन दो अक्तूबर को विश्व अहिंसा दिवस घोषित कर इस महामानव को सम्मानित किया है। यही नहीं हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ मुख्यालय में महात्मा गांधी की मूर्ति भी स्थापित की गई है।

भारत ही नहीं विश्व के सभी महाद्वीपों के सैकड़ों देशों में गांधी की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।उन पर कई हजार किताबें लिखी गई हैं और अभी भी लिखी जा रही हैं। भारत सहित विश्व के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में गांधी पर पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स पढ़ाए जाते हैं और शोधकार्य हो रहे हैं। गांधी के जीवन और विचारों को प्रचारित प्रसारित करती इंटरनेट पर हजारों वेबसाइट हैं। बॉम्बे सर्वोदय मंडल द्वारा संचालित वेबसाइट द्वद्मद्दड्डठ्ठस्रद्धद्ब.शह्म्द्द पर पिछ्ले कुछ साल में सैकड़ों देशों के करोड़ों लोग विजिट कर चुके हैं। गांधी द्वारा स्थापित साबरमती और वर्धा आश्रमों में प्रतिदिन हजारों लोग गांधी के आकर्षण से खींचे आते हैं और वहां रखी पुस्तिका में एक से बढक़र एक उदगार व्यक्त करते हैं।यह सब तब हो रहा है जब गांधी कभी किसी लाभ के पद, यथा भारत के प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति या मंत्री आदि नहीं रहे फिर भी विश्व के सैकड़ों देशों में उनकी मृत्यु के पचहत्तर साल बाद भी उन्हें बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है।

आइंस्टीन गांधी के बारे में भाव विभोर होकर लिखते हैं कि भविष्य की पीढिय़ां यकीन नहीं करेंगी कि हमारी पीढ़ी ने गांधी जैसी सख्शियत को धरती पर आम आदमी की तरह चलते हुए देखा है।रोमा रोला ने आध्यात्मिक सख्शीयत की खोज में निकली मीराबेन को गांधी की शरण में भेजा था। पंजाब की राजकुमारी अमृत कौर ने गांधी के सानिध्य के लिए राजमहल के ऐशो आराम त्यागकर आश्रम का तपस्विनी जीवन अपनाया था। गांधी के प्रभाव में आकर ही लोहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपनी अच्छी खासी बैरिस्टरी और जमीदारी त्यागकर खुद को देश सेवा में झौंक दिया था। सरदार पटेल की तरह सरोजनी नायडू से लेकर महादेव देसाई और डॉ सुशीला नैयर आदि न जाने कितने नाम हैं जिन्होंने गांधी के आकर्षण में अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया था।लुई फिशर उनकी सटीक जीवनी लिखने भारत आए थे। लॉर्ड माउंटबेटन ने उन्हें शांति के लिए फौज से बड़ा काम करने वाला वन मैन आर्मी का खिताब दिया था। हिंदी कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद और उनकी सहधर्मिणी गांधी के अनन्य प्रशंसक थे।

गांधी की हत्या के बाद भी उनके सहयोगियों ने गांधी के मार्ग पर चलकर अदभुत कार्य किए हैं। विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में कितनी जमीन गरीबों के लिए दान में मिली है। जयप्रकाश नारायण और नारायण देसाई के नेतृत्व में शांति सेना ने पूर्वोत्तर में कितना अदभुत काम किया है। सुभाषचंद्र बोस ने अपनी पहली सैन्य टुकड़ी का नाम गांधी ब्रिगेड रखा था।आज भी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने धरने प्रदर्शन गांधी मूर्ति के नीचे बैठकर करते हैं।भारत आने वाले विशिष्ट राजकीय अतिथि अपनी भारत यात्रा में गांधी से जुड़े स्थलों पर श्रद्धांजलि अर्पित करने जाते हैं।सूर्य सरीखी इतनी दैदीप्यमान विभूति पर कीचड़ उछालकर लोग अपनी ही क्षुद्रता और अपने ही हल्केपन का परिचय देते हैं। आपके गरियाने से गांधी की वैश्विक और सदाबहार छवि पर कोई असर नहीं पड़ेगा इसलिए अपनी उर्जा गांधी को गरियाने में जाया मत करो।


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