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एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 : छत्तीसगढ़ के उच्चशिक्षण संस्थाओं का निराशाजनक प्रदर्शन विभाग एवं सरकार के लिए बेहद चिंताजनक
07-Jun-2023 11:05 PM
एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 : छत्तीसगढ़ के उच्चशिक्षण संस्थाओं का निराशाजनक प्रदर्शन विभाग एवं सरकार के लिए बेहद चिंताजनक

-डॉ. लखन चौधरी
एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 में छत्तीसगढ़ के शासकीय उच्चशिक्षण संस्थाओं यानि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। देश के उच्चशिक्षण संस्थानों को गुणवत्ता के आधार पर रैंकिंग देने की इस पहल की शुरुआत जब 2016 में की गई थी, तब इसमें देशभर के 3500 उच्चशिक्षण संस्थानों ने हिस्सा लिया था। 2016 में राजधानी के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को 46वीं रैंक हासिल हुई थी। इस साल यानि 2023 में देशभर के 8,686 उच्चशिक्षण संस्थानों ने इस रैंकिंग में हिस्सा लिया है, और इस बार पं. रविशंकर विवि को 179वीं रैंक मिली है। हालांकि विश्वविद्यालय की रैंकिग 2017 से लगातार पिछड़ती गई है, और पिछले 2021 से पं.रविवि लगातार 151-200 की श्रेणी में रहता आया है।

राजधानी के विश्वविद्यालय सहित राज्यभर के तमाम विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का प्रदर्शन जहां एक ओर स्वयं उच्चशिक्षण संस्थाओं के लिए बेहद चिंता खड़ी करता है, वहीं यह उच्चशिक्षा विभाग और सरकार के लिए भी कम चिंताजनक नहीं है। कहा जाए कि उच्चशिक्षा में राज्य के शासकीय उच्चशिक्षण संस्थाओं का इस तरह का बेहद कमजोर एवं निराशाजनक प्रदर्शन संस्थाओं से अधिक उच्चशिक्षा विभाग-मंत्रालय और राज्य सरकार के लिए अधिक चुनौतीभरा है। उच्चशिक्षा को लेकर सरकार की नीतियां सवाल खड़ा करते रहे हैं कि आखिरकार सरकार की चिंता उच्चशिक्षा विभाग को लेकर क्यों नहीं रहती है ?

ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेतीकिसानी को लेकर सरकार जिस तरह चिंता करती है, उच्चशिक्षा को लेकर सरकार की इस तरह की चिंता क्यों नहीं है ? युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की चिंता करने वाली सरकारों को अब गंभीरता से सोचने की जरूरत है कि शिक्षा में गुणात्मकता लाए बगैर विकास, नवाचार एवं सुधार की सारी की सारी योजनाएं, कार्यक्रम एवं नीतियां अधूरी ही रहेंगी। तात्पर्य यह है कि शिक्षा में आमूलचूल सुधार एवं परिवर्तन के बगैर विकसित राज्य बनने की संकल्पना ही व्यर्थ होती है। याद रहे! सरकारी योजनाएं, कार्यक्रम एवं नीतियां समग्रता में तब तक फलीभूत नहीं हो सकती हैं, जब तक राज्य के युवाओं को गुणात्मक शिक्षा नहीं दी जाती या नहीं मिलती है।

नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क यानि एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 में छत्तीसगढ़ को इस बार फिर घोर निराशा हाथ लगी है। कहा जा रहा है कि राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों सहित तमाम उच्चशिक्षण संस्थानों की गुणात्मक दुर्गति या दुर्दशा एक बार फिर जाहीर हुई है। ओवरऑल यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज कैटेगरी के शीर्षतम 100 की बात तो दूर, शीर्ष 200 संस्थानों में भी राज्य सरकार द्वारा संचालित एक भी राजकीय या शासकीय संस्थान अपना स्थान नहीं बना पाया है। पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर यूनिवर्सिटी कैटेगरी के अंतर्गत 179वें पर है, कॉलेज कैटेगरी के शीर्षतम 200 रैंकिग में राज्य का एक भी निजी या शासकीय महाविद्यालय नहीं है।

राज्य के शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों एवं विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईआरएफ की रैंकिंग रिपार्ट 2023 से राज्य सरकार और उच्चशिक्षा विभाग की नींद कितनी खुलेगी या कितनी टूटेगी अभी यह कहना तो मुश्किल लगता है, लेकिन इससे तय है कि राज्य का उच्चशिक्षा महकमा किस तरह और किस कदर उदासीन है ? पिछले चार-पांच सालों से राज्य का उच्च शिक्षा विभाग एवं मंत्रालय जिस तरह से कार्य कर रहा है, इससे तो इससे अधिक की उम्मीद भी नहीं की जानी चाहिए? लचर कार्यशैली, काम करने के सुस्त ढ़ंग एवं तरीके, उदासीनता सब कुछ बयां करते हैं? विभाग पर जिस तरह से नौकरशाही एवं अफसरशाही हॉवी है, इससे तो अच्छी की आस की ही नहीं जा सकती है?बहरहाल देखना दिलचस्प हो सकता है कि इस रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार एवं उच्चशिक्षा विभाग की नींद खुलती है या नहीं?

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी की जाने वाली नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क यानि एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 की घोषणा कर दी गई है। इसमें विभिन्न श्रेणी में देश के शीर्षतम उच्चशिक्षण संस्थानों को गुणवत्ता के आधार पर श्रेणी यानि रैंकिंग दी गई है। इसका तात्पर्य है कि देशभर के उच्चशिक्षण संस्थानों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर मिलने वाली या दी जाने वाली रैंकिग जारी की गई हैै। 2023 की ओवरऑल रैंकिंग में आईआईटी मद्रास देश को देश का सबसे सर्वश्रेष्ठ संस्थान का स्थान मिला है, या कहा जाये कि घोषित किया गया है। वहीं यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में आईआईएससी बेंगलुरु को नंबर एक का दर्जा मिला है।

इस साल इस सूची में एक नया विषय जोड़ा गया है, जो इस रैंकिंग के अंतर्गत 2022 में नहीं था। पिछले साल इस श्रेणी के लिए चार कैटेगरी थीं। महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान, और सात डोमेन विषय यानि ज्ञानक्षेत्र के प्रमुख विषयों जैसे इंजीनियरिंग, प्रबंधन, फार्मेसी, कानून, चिकित्सा, वास्तुकला और दंत चिकित्सा सम्मिलित थे। इस साल 2023 के लिए एनआईआरएफ ने एक नया विषय कृषि और संबद्ध क्षेत्र जोड़ा है। इसके अलावा आर्किटेक्चर डिसिप्लिन का नाम बदलकर ’आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग’ कर दिया गया है। नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क यानि रैंकिंग 2023 के शीर्ष-10 विश्वविद्यालय श्रेणी की सूची के अनुसार देश का टॉप विश्वविद्यालय इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बैंगलोर है। दूसरे स्थान पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली है। इसके बाद क्रमश: जामिया मिलिया इस्लामिया और जाधवपुर विश्वविद्यालय तीसरे और चौथे, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय पांचवें, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन छठवें, अमृता विश्व विद्यापीठम सातवें, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी आठवें, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी नवें और हैदराबाद विश्वविद्यालय दसवें स्थान पर है।

नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क यानि एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 की इस साल जारी रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी की जाने वाली नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क यानि एनआईआरएफ रैंकिंग का आठवां संस्करण यानि आठवीं रिपोर्ट है। देश के उच्चशिक्षण संस्थानों को गुणवत्ता के आधार पर इस तरह की रैंकिंग देने की शुरुआत 2016 में की गई थी। 2016 में इस रैंकिग के लिए 3500 संस्थानों ने हिस्सा लिया था। इस साल यानि 2023 में देशभर के 8,686 संस्थानों ने रैंकिंग में हिस्सा लिया है। इस रैंकिग में अलग-अलग तरह के मानदण्ड यानि पैरामीटर्स होते हैं। इसमें टीचिंग, लर्निंग एंड रिर्सोसेस, रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिसेस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरीज एंड इन्क्लूसिविटी और परसेप्शन के आधार पर संस्थानों को नंबर या पॉइंट दिए जाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी की जाने वाली यह नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क यानि एनआईआरएफ रैंकिंग, भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय यानि एमएचआरडी द्वारा अनुमोदित है, इसलिए इस रैंकिग की अपनी महत्ता है।


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