विचार / लेख
-ध्रुव गुप्त
मनचाहा प्यार, वशीकरण, पारिवारिक कलह, सौतन से मुक्ति, मुकदमे में जीत, गुप्त खजाने के लिए संपर्क करें फलां बाबा से। सफलता की सौ प्रतिशत गारंटी। ऐसे विज्ञापन अखबारों के वर्गीकृत विज्ञापनों और स्थानीय टीवी चैनलों पर अक्सर दिखाई दे जाते हैं।
ऐसा ही एक विज्ञापन देख एक दिन ख्याल आया कि क्यों न आज किसी बाबा से थोड़ा-बहुत मनोरंजन कर लिया जाय। एक तंत्र सम्राट को चुनकर मैंने नंबर डायल कर दिया। उधर से बड़ी मुलायम आवाज आई- ‘क्या चाहिए बच्चा?’ मैंने कहा- ‘आप सर्वज्ञाता हैं, बाबा। मेरी समस्या आप खुद समझ लें। मुझे कहने में संकोच हो रहा है।’ बाबा हंसे- ‘मनचाहा प्यार?’ मेरे हां कहने पर बाबा ने मेरी उम्र और वैवाहिक स्थिति पूछी। मैंने अपनी असली उम्र बताते हुए कहा- ‘बीवी के दिन-रात के झगड़ों से परेशान हूं। शादी तो मुझे नहीं करनी, लेकिन कहीं से थोड़ा प्यार मिल जाय तो मेरा आगे का जीवन आसान हो। क्या इस उम्र में मनचाहा प्यार पाने की कोई गुंजाइश बची है, बाबा?’ बाबा ने कहा- ‘तुम्हारी उम्र को देखते हुए काम मुश्किल है। मुझे लंबी और कठिन तांत्रिक साधना करनी होगी। बहुत सारी सामग्री लगेगी। तीस-चालीस हजार का खर्च बैठेगा।’ बड़ी मिन्नतों के बाद यह सौदा बीस हज़ार पर आकर फाइनल हुआ।
बाबा ने कहा- ‘तत्काल सरसो के कुछ दाने लो और 10 दिनों में एक लाख’? हूं ‘मंत्र से सिद्ध कर रख लो। तुम्हारे पैसे मिल जाने के बाद मेरी साधना शुरू होगी। उसके बाद वह मंत्रसिद्ध सरसो तुम जिसके सिर पर डाल दोगे, वह चौबीस घंटों में तुम्हारे पीछे दौड़ी आएगी। काम न हुआ तो पैसे वापसी की फुल गारंटी।’ मैंने कहा- ‘बाबा रिटायर्ड आदमी हूं।
20 हजार का बड़ा जुआ खेलने में थोड़ा डर लगता है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि आप पहले मेरा काम करा दो, पैसे मैं काम होते ही दे दूंगा। मेरी तरफ से भी फुल गारंटी है।’
गुस्साए बाबा ने शुद्ध उर्दू में मुझे पांच-दस श्राप देकर फोन काट दिया। अगले दिन मैंने एक दूसरे नंबर से फोन लगाकर बाबा को शुद्ध भोजपुरी में दस-बीस गालियां दीं और कहा कि आपका नंबर अब पुलिस के पास है। मेरा मनचाहा प्यार आपने नहीं दिलाया, अब आप अनचाहे पुलिसिया रोमांस के लिए तैयार रहिए!
पिछले कई दिनों से बाबा का नंबर बंद है।


