विचार / लेख

शिक्षा से बेहतर निवेश कुछ नहीं...
20-Apr-2022 3:34 PM
शिक्षा से बेहतर निवेश कुछ नहीं...

-नितिन त्रिपाठी
जब आप अपनी दसवीं के मित्रों के साथ बैठते है और विश्लेषण करते हैं कि कौन क्या बना-तो केवल और केवल एक अंतर समझ आता है-शिक्षा। जिसने अंतर बनाया।

वह जो इतने गरीब थे कि कालेज के दिनों में नौ रुपए फीस नहीं भर पाते थे-आज अफसर हैं, बड़ा बंगला है, प्रतिष्ठित हैं। केवल शिक्षा की वजह से।

वह जिनके पिता वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थे और स्कूल के समय जिनकी दादागिरी चलती थी, कैंटीन में जिनके नाम से उधार चलता था, उनकी लास्ट खबर यह थी कि वह जेल में थे।

वह लड़कियाँ जो आउट ऑफ लीग थीं, जिनके कुत्ते भी पैरों में मोजे पहनते थे, जिनसे बात करने के लिए रैपिडेक्स से वाक्य याद कर जाना पड़ता था। उनका ध्यान शिक्षा पर न रहा रोमांस पर रहा। और जाहिर सी बात है उनके बॉयफ्रेंड भी वैसे ही निकले-आज वह आंटियाँ शिक्षा के महत्व को समझ अपनी बेटियों को स्कूल खुद छोडऩे लेने जाती हैं।

इंजीनियरिंग कालेज में ऐसे ऐसे छात्र थे जिन्होंने बारहवीं तक कोई फिल्म सिनेमा हाल में न देखी थी, पिता लेबर थे। आज वह चीफ इंजीनियर बन मुख्यमंत्री के साथ फोटो डालते हैं।

ऐसे भी मित्र थे जिनकी घरेलू परिस्थितियाँ इतनी विकट थीं  कि पढऩा मुश्किल था। किसी तरह से दसवीं पास की पर लगे रहे। पढ़ाई की, सरकारी नौकरी में गए और पढ़ाई की, आज समाज के संभ्रांत व्यक्ति हैं। बच्चों को वह शिक्षा दे रहे हैं जो खुद नहीं पाए थे।

इक्का-दुक्का नेताजी के साथ टहलने वाले लोग छोड़ दिए जाएँ तो केवल और केवल शिक्षा ने सबके जीवन में अंतर पैदा किया। खुले दिमाग से अपने अगल-बगल देख डालिए, पचीस साल की कैरियर ग्रोथ, नब्बे प्रतिशत आप पाएँगे शिक्षा ने बनाई।
और अंतर केवल पैसे का ही नहीं लाइफ स्टाइल का होता है। शिक्षित व्यक्ति की कम्पनी में सबको मजा आता है। मै स्वयं यदि किसी नेता से मिलता हूँ तो यदि वह शिक्षित है तो बात करने का अलग लेवल होता है, लगता है कुछ अच्छा किया। वहीं अशिक्षित नेता से कार्य तो बन जाता है पर उसका समाज में इज्जत पाना मुश्किल होता है।

मेरी सब मित्रों को यही सलाह रहती है कि आप हैसियत से बढक़र शिक्षा ग्रहण करो और बच्चों को भी दो। इस काल में शिक्षा से बेहतर निवेश कुछ नहीं।
शेष अभी दसवीं फि़ल्म देख रहा हूँ। फिल्म का संदेश भी यही है कि शिक्षा कैसे सकारात्मक परिवर्तन लाती है। नया डायरेक्टर है, डायलाग कुमार विश्वास के हैं तो थोड़ी फ्रेशनेस है। पिक्चर एक बार देखने लायक है। मुख्य है फिल्म का संदेश जिससे मैं सौ प्रतिशत सहमत हूँ।

 


अन्य पोस्ट