विचार / लेख

ब्लेक लेबल
01-Mar-2022 1:04 PM
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- प्रकाश दुबे

चुनाव और होली के मौसम में गाली का बुरा नहीं मानते। इस सूची में अब संसद और विधानसभाएं शामिल होने की दावेदारी कर रही हैं। ताजी पेशकश राजस्थान विधानसभा में हुई। अशोक गहलोत सरकार के बजट का चीर हरण करते हुए सतीश पूनिया सौंदर्यशास्त्र की मिसाल देने लगे-काली औरत ब्यूटी पार्लर में जाकर चेहरा चमका सकती है। बजट का हाल वही है। यानी काली कलूटी का मेक अप कर दिया गया है। रंगभेद की नीति से गांधी जी लड़े थे। महात्मा गांधी की हत्या के 74 साल बाद महिलाएं भडक़ गईं। पूनिया का पद उनकी परेशानी बन गया। भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष होने के नाते अपनी पार्टी का ऐतराज ध्यान में आया। आपस में अनबन है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का विरोध भारी पड़ता। सदन में विरोध के साथ साथ महिला आयोग की तलवार म्यान से निकल आई। पूनिया समझदार हैं। उन्होंने अपने काले कलूटे शब्द वापस लेने में ही खैर समझी।    

            

टीचर्स स्पेशल
निराला, पंत, महादेवी, धर्मवीर भारती, फिराक गोरखपुरी समेत सैकड़ों कलम धनाढ्यों और शिक्षकों की भूमि में चुनाव प्रचार बस समाप्त होने वाला था। देश को सबसे अधिक नौकरशाह देने की शोहरत रखने वाला इलाहाबाद अब प्रयागराज है। विद्यार्थियों का जत्था प्रियंका गांधी के पास पहुंचा। उन्हें अपनी विपदा सुनाई। महामारी और कुंभ की डुबकी लगाने के कारण शिक्षा केन्द्र के विद्यार्थी गुरुजनों और संस्थान की शक्ल देखने से वंचित रह गए। कहने को केन्द्रीय विवि है और उसके सिवा दो और। विद्यार्थियों की समस्या है कि पढ़ाई तो आन लाइन हुई। अब परीक्षा आफ लाइन होगी यानी परीक्षा भवन में जाकर परचा देना होगा। विद्यार्थी इसके लिए तैयार नहीं हैं। प्रियंका को ज्ञापन देते समय वर्षा गायकवाड़ हाजिर थीं। वर्षा शिक्षा मंत्री हैं, परंतु महाराष्ट्र की। देश भर की शिक्षा की बागडोर संभालने वाले धर्मेन्द्र प्रधान विधानसभा चुनाव के प्रभारी हैं और युवा मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर सहप्रभारी।

आफिसर्स च्वाइस
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पढ़ाकू जहां जाते हैं, अपनी छाप छोड़ते हैं। विवि को बदनाम करने वाले उनकी इस गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखते। विजय कुमार का ही उदाहरण लो। भारतीय पुलिस सेवा की नौकरी में आने के बाद छत्तीसगढ़ के नक्सली उपद्रव ग्रस्त में पहुंचे। कलूरी जैसे उस्ताद के साथ काम करने का अवसर मिला। कलूरी तो पत्रकारों की ठुकाई के कारण बदनाम हुए। विजय कुमार को हाले कश्मीर दुरुस्त करने श्रीनगर रेंज का पुलिस महानरीक्षक बनाया गया। फुर्तीले विजय ने आतंकवादियों और उनकी नजऱ में शरारती पत्रकारों को दुरुस्त करना शुरु किया। दो टूक बोलने वाले पुलिस महानरीक्षक दो टूक बोलने से नहीं हिचके। उपराज्यपाल के किसी कथन पर कहा-नेता अपने तरीके से बात करते हैं। हम अपने तरीके से काम करते हैं। विजय कुमार को पदोन्नत कर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बनाने के प्रस्ताव पर विभागीय समिति की मुहर लग चुकी है। तरक्की नहीं हुई। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उत्तर प्रदेश में व्यस्त होने के कारण नहीं। फिलहाल पद रिक्त नहीं है।  

रायल चेलैंज
मौसम है घूमने फिरने का। नासमझ चुनाव प्रचार करते घूमते हैं। समझदार समितियों और सरकारी दौरों के बहाने लक्षदीप, कश्मीर और अंडमान एक करते हैं। नहीं नहीं। सावरकर और काला पानी जेल के कारण पर्यटन केन्द्र बने पोर्ट ब्लेयर पहुंचना आसान नहीं है। एकमात्र रन वे को दुरुस्त करने के लिए सप्ताह में चार पांच दिन हवाई अड्डे पर जहाजों के उडऩे उतरने पर रोक रहेगी। सैलानी नहीं पहुंचेंगे तो एकमात्र व्यापार से जुड़े लोगों की कमाई बंद। वैसे भी महामारी ने बेहाल कर रखा है। सांसद कुलदीप राय शर्मा ने उपराज्यपाल की देहरी पर दस्तक दी। बात नहीं बनी। प्रधानमंत्री से गुहार लगाई। उनका सुझाव है कि रोजाना चार पांच घंटे विमानों की आवाजाही जारी रखी जाए। सोशल मीडिया पर ज्योतिरादित्य महाराज को कहते दिखाया जा रहा है-एयर इंडिया का महाराजा टाटा कर गया। यूक्रेन से प्रवासी भारतीयों को कैसे लाऊं? राजीव गांधी भवन के तो पंख नहीं हैं। सोशल मीडिया के शैतान बहकावे में मत आना। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रवासियों की वापसी में व्यस्त हैं।
(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)


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