विचार / लेख

‘पुतिन यूक्रेन तक ही नहीं थमेंगे, धीमी आँच पर पका रहे हैं मांस’
24-Feb-2022 4:59 PM
‘पुतिन यूक्रेन तक ही नहीं थमेंगे, धीमी आँच पर पका रहे हैं मांस’

-स्टीव रोजनबर्ग
ब्रिटिश फिल्मकार अल्फ्रेड हिचकॉक ने असमंजस, दुविधा या सस्पेंस के विषय पर एक बार कहा था- जितना संभव हो सके दर्शकों को परेशान करें।’
ऐसा लगता है कि व्लादिमीर पुतिन हिचकॉक की फिल्में खूब देख रहे हैं। महीनों तक पुतिन ने दुनिया को अनुमान लगाने दिया कि वह यूक्रेन पर हमला करेंगे या नहीं। शीत युद्ध के बाद यूरोप में जो सुरक्षा व्यवस्था बनी थी, उसे नष्ट करने की योजना बना रहे हैं या नहीं?
जब उन्होंने इसी हफ्ते पूर्वी यूक्रेन के दो अलगाववादी इलाकों को स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में मान्यता दी तो कई लोग हैरान रह गए। लेकिन पुतिन अब क्या करेंगे? अभी कुछ देर पहले ही पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन में सैनिक भेजने की घोषणा कर दी है। हमले की खबरें भी आ रही हैं।
‘पुतिन्स रशा’ किताब की लेखिका लिलिया श्वेतसोवा कहती हैं कि पुतिन के लिए सस्पेंस सबसे पसंदीदा उपकरण है।
श्वेतसोवा कहती हैं, ‘पुतिन आग लगाकर और बुझाकर, तनाव बनाए रखेंगे। अगर वह अपने मानसिक तर्क पर बने रहते हैं तो पूरी तरह से हमला नहीं करेंगे। लेकिन उनके पास संभावित कदम उठाने के लिए अलग-अलग कई चीजें हैं। जैसे साइबर हमला और दक्षिणी अमेरिकी अजगर की तरह यूक्रेन को आर्थिक रूप से दबोचते रहेंगे। रूसी सेना पूरे दोनेत्स्क और लुहांस्क को भी अपने नियंत्रण में ले सकती है। वह बिल्ली की तरह चूहे के साथ खेलते रहेंगे।’
रूस की सत्ता की दीवार के पीछे क्या चल रहा है, इसकी थाह लेना बेहद मुश्किल काम है। पुतिन के दिमाग को पढऩा या समझना अब भी उतना ही चुनौतीपूर्ण है।
पुतिन की आगामी योजना
लेकिन पुतिन के बयानों और उनके भाषणों से उनकी सोच का कुछ अंदाजा लगता है। शीत युद्ध का जिस तरह से अंत हुआ, उससे पुतिन बहुत नाराज रहते हैं।
शीत युद्ध का अंत सोवियय संघ के बिखरने और उसके प्रभाव के अंत की कहानी है। नेटो का विस्तार पूरब तक हुआ और पुतिन की कड़वाहट बढ़ती गई। पुतिन उस व्यक्ति तरह लग रहे हैं, जो पूरी शक्ति के साथ एक मिशन पर लगा हो। पुतिन का मिशन है- यूक्रेन को रूस के साथ किसी भी तरह से लाना।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में सीनियर रिसर्च असोसिएट व्लादिमीर पस्तुखोव कहते हैं, ‘वह रूस के फेडरल सिक्यॉरिटी सर्विस के एक अधिकारी से ज्यादा अयातुल्लाह लग रहे हैं। वह इतिहास में अपनी खास जगह के लिए किसी धार्मिक आस्था की तरह लगे हुए हैं। वह कदम दर कदम काम करेंगे। पहले अलगाववादी इलाकों को मान्यता दी। अब वहां सेना भेजेंगे। फिर दोनों इलाकों में अपने हिसाब से रूस में शामिल होने के लिए जनमत संग्रह की घोषणा करेंगे। इसके बाद यहाँ स्थानीय सैन्य अभियान चलेगा और पुतिन 2014 से पहले का सीमा विस्तार करेंगे।’
व्लादिमीर पस्तुखोव कहते हैं, ‘अगर अपने नियम से पुतिन को खेल खेलने की आजादी मिली तो इसे वह जहाँ तक संभव होगा, लंबा ले जाएंगे। वह धीमी आँच पर मांस पकाएंगे।’ पश्चिम के नेताओं को लग रहा है कि नए प्रतिबंध गेम-चेंजर होंग लेकिन पुतिन बहुत ही सख्ती दिखा रहे हैं।
रूस की प्रतिष्ठा
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बीबीसी से कहा, ‘हम इन प्रतिबंधों को अवैध मानते हैं। हम लंबे समय से इसे देख रहे हैं और पश्चिम हमारी प्रगति को रोकने के लिए इसी टूल का बार-बार इस्तेमाल करता है। हमें पता था कि प्रतिबंध लगेगा, चाहे कुछ भी हो। यह कोई मायने नहीं रखता है कि हमने कुछ किया है या नहीं। उनका प्रतिबंध अनिवार्य है।’
लेकिन क्या रूस पश्चिम में अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा की परवाह नहीं करता है, जो कि लगातार निचले स्तर पर जा रही है। आपके मुल्क को एक हमलावर के तौर पर देखा जा रहा है? इस सवाल के जवाब में मारिया कहती हैं, ‘हमारी इस प्रतिष्ठा की खोज आप कर रहे हैं। पश्चिम की प्रतिष्ठा के बारे में आप क्या सोचते हैं? जो कि ख़ून से रंगा हुआ है।’
कहा जा रहा है कि मारिया जख़ारोवा को भी यूरोपियन यूनियन की प्रतिबंध सूची शामिल किया गया है। हिचकॉक की थ्रिलर फिल्में एंटरटेन करती है लेकिन पुतिन की यूक्रेन थ्रिलर रूस के लोगों को नर्वस कर रही है।
रूस के लोग क्या सोच रहे हैं?
लेवाडा पब्लिक ऑपिनियन एजेंसी के डेनिस वोल्कोव कहते हैं, ‘ज़्यादातर लोग यह नहीं जानना चाहते हैं कि क्या हो रहा है। लोगों के लिए यह डराने वाला है। ये सुनना नहीं चाहते हैं। लोग युद्ध से डरे हुए हैं। हमने जो सर्वे किया है, उनमें से आधे लोगों ने कहा है कि युद्ध की आशंका है।’
रूस के कुछ लोगों ने सार्वजनिक रूप से सरकार की लाइन का विरोध किया है। कुछ शीर्ष के रूसी बुद्धिजीवियों ने एक पीटिशन पर हस्ताक्षर किया है और यूक्रेन में अनैतिक, गैर-जिम्मेदार के साथ आपराधिक युद्ध से बचने की सलाह दी है। इनका दावा है कि रूसी आपराधिक दु:साहसवाद के बंधक बन गए हैं।
पीटिशन में अपना नाम दर्ज कराने वाले प्रोफेसर एंद्रेई जबोव ने कहा कि रूस में लोग अपनी सरकार या संसद को रोकने में सक्षम नहीं हैं। जबोव ने कहा, ‘लेकिन मैंने अपनी राय रखने के लिए यह हस्ताक्षर किया है। मैंने रूस के शासक वर्ग वाले आभिजात्यों से खुद को दूर कर लिया है। यह वर्ग अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ रहा है।’ लेकिन पुतिन के रूस में समर्थक भी हैं।
सोवियत आर्मी के एक पूर्व कमांडर एलेक्सी ने कहा, ‘केवल यूक्रेन नहीं है जो रूस में लौटेगा। पोलैंड, बुल्गारिया और हंगरी भी हैं। ये सभी देश हमारे हुआ करते थे।’ एलेक्सी को 1990 के दशक की आर्थिक उथल-पुथल याद है लेकिन अब उन्हें लगता है कि रूस अपने घुटनों पर खड़ा हो गया है।
एलेक्सी कहते हैं, ‘यह एक जैविक प्रक्रिया है। जब एक बच्चा बीमार पड़ता है तो बीमारी से लडऩे की और क्षमता विकसित कर लेता है। 1990 के दशक में रूस इसी बीमारी से ग्रस्त हुआ था। लेकिन बीमारी ने हमें और मज़बूत बना दिया है। हमें नेटो को दूर जाने के लिए मनाने की जरूरत नहीं है। वह ख़ुद ही सब छोड़ देगा।’ (bbc.com/hindi)
 


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