विचार / लेख
-रमेश अनुपम
बस्तर गोलीकांड की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के.एल.पांडेय की एकल जांच समिति की घोषणा हो चुकी थी।
इसी बीच देश के सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य जे. बी. कृपलानी बस्तर आए। वे जगदलपुर में हुए नरसंहार से बेहद क्षुब्ध थे। बस्तर महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव और निरीह आदिवासियों की हत्या से बहुत आहत थे।
जे.बी.कृपलानी ने 10 मई सन 1966 को जगदलपुर में एक विशाल आम सभा को भी संबोधित किया।
बस्तर के इतिहास में यह आमसभा स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाने लायक है। इस विशाल आमसभा को आज भी याद किया जाता है।
आमसभा को संबोधित करते हुए प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सांसद
(सन् 1951 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था)
आचार्य जे.बी.कृपलानी ने कहा था-
‘जगदलपुर हत्याकांड को लेकर कांग्रेसी चुप क्यों हैं? अंग्रेजों के जमाने में यह हुआ होता तो क्या वे चुप रहते? कमीशन की नियुक्ति से लेकर कमीशन के आगमन (6 अप्रैल 1966) तक लगभग पैंतीस दिनों तक जगदलपुर में धारा 144 लगाना तथा प्रशासन की बागडोर पुलिस के हाथों में होना। साक्ष्यों को पुलिस द्वारा नष्ट किया जाना और राजमहल के खून के दागों को मिटाना, यह आखिर क्या साबित करता है ?
इसी तरह महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के साथ केवल बारह आदिवासियों की मौत की कहानी भी अपने आप में संदेहजनक है।

प्रखर नेता जीवटराम भगवानदास कृपलानी ने बस्तर महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए आगे अपने भाषण में कहा था :
यदि बस्तर महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव कांग्रेसी शासन का तख्ता पलटने वाले थे तो केंद्र को इसकी खबर कैसे नहीं लगी? आदिवासी तीर और बांस की नुकीली कमचियों से तख्ता पलटने वाले थे यह बात ही अपने आप में मूर्खतापूर्ण और हास्यास्पद प्रतीत होती है।
यह सोचने लायक बात है कि इतनी शक्तिशाली सरकार आदिवासियों के तीर और कमान से इतनी भयभीत कैसे हो गई। यह भी अपने आप में संदेहास्पद है कि जब इतनी भारी मात्रा में यहां बलवा होने वाला था तो स्थानीय कांग्रेस पार्टी ने राज्य और केंद्र सरकार को समय रहते सूचित क्यों नहीं किया ?
आचार्य जे. बी कृपलानी ने तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा था-
‘26 मार्च की गोली कांड के विषय में पूरी जानकारी देने के लिए गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने देश से 48 घंटों का समय क्यों मांगा?’
जगदलपुर में 10 मई को आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए जे.बी. कृपलानी ने गोली कांड में लिप्त अधिकारियों के अब तक अन्यत्र स्थांतरण न किए जाने पर भी क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा था-
‘बस्तर गोली कांड से संबंधित अधिकारी अभी भी बस्तर में क्यों पदस्थ हैं? जब कि उनका तुरंत ट्रांसफर हो जाना चाहिए था।
यही कारण है कि शासन की इस नीति के फलस्वरूप गुनाहगार अधिकारी अपने गुनाह छिपाने के लिए इस खुली छूट का फायदा उठा रहें हैं।’
आचार्य जे.बी.कृपलानी का यह भाषण बस्तर गोली कांड के विषय में अनेक सवालों को जन्म देता है।
इस वीभत्स गोली कांड को लेकर आचार्य जे.बी. कृपलानी राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारों को कटघरे में खड़े करने की कोशिश करते हैं।

राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारों की जवाबदेही पर वे प्रश्न चिन्ह भी खड़े करते हैं।
यहां एक अवांतर टिप्पणी करने के मोह से मैं स्वयं को नहीं रोक पा रहा हूं। यह अवांतर टिप्पणी भी जे.बी. कृपलानी और बस्तर गोली कांड से संबंधित है।
मई 1966 में जब जे.बी.कृपलानी बस्तर गोली कांड के सिलसिले में जगदलपुर जा रहे थे। यह उसी समय की एक रोमांचक घटना है जो आज भी मेरे जेहन में कैद है।
मैं 1966 में चौदह वर्ष का एक किशोर था। धमतरी में आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था। यह घटना शायद 9 या 10 मई की है।
धमतरी के मकई चौक पर स्थित अमर टाकीज के पास सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ लगी हुई थी।
किशोर सुलभ जिज्ञासा से मैं भी उस भीड़ के साथ खड़ा हो गया। जब मैंने यह जानने की कोशिश की कि यहां भीड़ क्यों लगी हुई है? मुझे बताया गया कि जे.बी.कृपलानी अभी कुछ ही देर में यहां से होकर गुजरने वाले हैं।
भीड़ को जे. बी. कृपलानी का उत्सुकतापूर्वक इंतजार था जो बस्तर गोली कांड के सिलसिले में जगदलपुर जा रहे थे। वे रायपुर से कार से निकल चुके थे। मैं भी किशोर सुलभ उत्सुकतावश इस भीड़ में शामिल हो गया था ।
थोड़ी ही देर बाद रायपुर से आ रही एक कार को भीड़ ने घेर लिया था। कार के रुकते ही जे.बी.कृपलानी उस कार से बाहर निकले । लोग उनकी जय-जयकार के नारे लगाने लगे। लोगों ने उनसे कुछ बोलने का निवेदन भी किया। पर वे किस तरह इस आकस्मिक भीड़ को संबोधित करें यह किसी के समझ में नहीं आ रहा था।
तभी किसी ने सुझाव दिया कि जे. बी. कृपलानी कार के ऊपर चढ़ कर भाषण दें, ताकि सभी लोग उन्हें देख और सुन सकें। यह तरकीब काम आ गई ।
आनन-फानन में उन्हें जैसे-तैसे कार के ऊपर चढ़ाया गया। जे.बी. कृपलानी ने कार पर खड़े होकर अपना भाषण दिया। जाहिर है वह भाषण बस्तर गोली कांड को लेकर था। इस भाषण के बाद ही धमतरी से उनकी विदाई हुई और वे जगदलपुर के लिए सकुशल रवाना हो पाए थे।
मैं इसका चश्मदीद गवाह बन सका था, यही क्या मेरे लिए कम है।
बाद में सन 1967 के लोकसभा चुनाव में रायपुर लोकसभा सीट से जे.बी.कृपलानी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ा, किंतु कांग्रेस के लखन लाल गुप्ता के हाथों उन्हें पराजित होना पड़ा था।
(बाकी अगले हफ्ते)


