विचार / लेख
-प्रकाश दुबे
अयोध्या परिसर में नाम बदलने का पुराना रिवाज है। कभी साकेत, कभी अयोध्या, कभी फैजाबाद। नवाब नाचते गाते भी थे और राम की आराधना भी करते थे। उसी अयोध्या में जाने कितने बार सिर फुटव्वल की नौबत आने लगी। डा राम मनोहर लोहिया का जन्म वर्तमान अयोध्या संभाग का अकबरपुर में हुआ था। सत्ता में आने के बाद मायावती ने अकबरपुर को जिले का दर्जा देते हुए आम्बेडकर नगर जिला नाम कर दिया। नाम का अपना प्रभाव होता है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस प्रभाव को सिर नवाकर स्वीकार किया। जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों के सपा उम्मीदवारों की एकमात्र योग्यता समान है। सभी बसपा के दलबदलू हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में राम अचल राजभर बसपा के चुनावचिह्न पर अकबरपुर से जीते थे। नजाकत नाम के साथ नहीं बदलती। सपा में शामिल होते ही राजभर ने संकल्प घोषित किया-अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के बाद वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री बनाएंगे।
वंशवाद विरोधी क्रांति
प्रतापसिंह राणे चुनाव मैदान से हट गए। बेटा, बहू और प्रतापराव के चुनाव लडऩे पर वंशवाद का आरोप लगता। भले सत्ताधारी पार्टी ने बहू को प्रतापराव के खिलाफ मैदान में उतारा हो। बरसों तक जिस पार्टी के मुख्यमंत्री रहे, उसे वंशवाद विरोध समझ में नहीं आया। गोवा में भगवा को सत्ता दिलाने वाले मनोहर पर्रिकर ने सचिवालय के मुख्यमंत्री कक्ष में गोलवलकरजी की तस्वीर लगा रखी थी। निर्भीक पिता के चुनाव क्षेत्र से बेटा उत्पल निर्दल चुनाव लडऩे के लिए विवश है। वंशवाद और परिवारवाद विरोधी पार्टी नीति में उत्पल की दाढ़ी फिट नहीं हुई। कांग्रेस से दलबदल करने वाले दागदार को पार्टी ने मनोहर पर्रिकर के विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी थमा दी। उनकी पत्नी को भी चुनाव मैदान में उतारा। उत्पल अपना बच्चा है। दलबदलुओं पर नीति नहीं लाद सकते। हेमवती नंदन बहुगुणा के भांजे जनरल खंडूरी की बेटी ऋतु कोटद्वार से चुनाव लड़ेगी। बहुगुणा की सांसद बेटी रीता लखनऊ में बेटे को लड़ाने के लिए सांसदी छोडऩे का त्याग करना चाहती हैं या धमकी दे रही हैं? पूरा कुनबा ही पार्टी में हो तब परिवारवाद का आक्षेप बेमानी है।
सूर्य नमस्कार
राजतिलक की संभावनाओं पर कोहरा है। पडरौना के पूर्व जमींदार परिवार के राजकुमार और कांग्रेस के अघोषित राज परिवार के घनिष्ठ रतनजीत प्रताप नारायण सिंह को योगी बाबा की छत्रछाया में राजयोग को आदित्य उगता नजऱ आ रहा है। समाजवादी अखिलेश ने मौर्य को टिकट देकर कुंवर रतनजीत की जीत की संभावना का सूर्यास्त कर दिया था। कुंवर के दलबदल के बाद कांग्रेस ने महासचिव अविनाश पांडे को झारखंड का प्रभारी बनाया। तय हुआ था कि जिस दिन रतनजीत को योगी बाबा उम्मीदवार घोषित करेंगे, उसी दिन रांची में मंत्री, विधायक, पदाधिकारी अविनाश के साथ नए जोश में संगठन को मजबूत करने की बात करेंगे। रतन को चक्रव्यूह में उतारने की योगी बाबा की कोशिश पर आला कमान का अंकुश लगा है। कांग्रेस की रणनीति धरी रह गई। योगी का आदित्य प्रखर हो, या धुंधला, आरपीएन के दूसरे आदित्य ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। पार्टी में शामिल कराया तो टिकटवा भी दिलवाएंगे। एनडीटीवी पत्रकार सोनिया (वर्मा) सिंह आरपीएन की पत्नी हैं। दावे से कह सकता हूं कि दलबदल में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
अहिंसक गणतंत्र
दिल्ली में गणतंत्र दिवस की तैयारियां जारी थीं। गृहमंत्री गन्नों के खेत में वोट की मिठास तलाशने पहुंचे थे। गोदावरी तट पर पार्टी सांसद अहिंसक गणतंत्र का सामना कर रहा था। पुराना कांग्रेसी है। महात्मा गांधी वाला बुखार पूरी तरह उतरा नहीं है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में वादा किया कि जीतने के बाद हल्दी और ज्वार बोर्ड बनवा कर हल्दी उत्पादक किसानों को सही दाम दिलवाएंगे। नहीं बना तो सांसदी से इस्तीफा देंगे। स्टाम्प पेपर पर वचननामा छपवाकर बंटवाया था। निजामाबाद जिले के किसानों ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री की बेटी को हरा दिया सांसद धरमपुरी अरविंद का 25 जनवरी को जनता ने रास्ता छेंक लिया। पुलिस के लाठी-डंडे के बावजूद नहीं हटे। उनकी शिकायत है कि न तो बोर्ड बने और न त्यागपत्र मिला। सडक़ पर वचननामा की होली जलाई। क्रिकेटर रह चुके अरविंद पिच छोडक़र भागे। गांधी और गणतंत्र को मानने वालों की खुराफात का मुकाबला नहीं है। लुभावने चुनावी वादे करने के बाद याददाश्त खोने वालों को इन दिनों किसान सबक सिखला रहे हैं। नसीहत-फर्जी वादा करने वाले सावधान रहें।
(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)


