विचार / लेख
-अजीत साही
अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय राजदूत, दूतावास के अन्य कर्मचारी और उनके परिवार काबुल से कैसे निकले?
जवाब: मोदी सरकार ने तालिबान से मदद माँगी और तालिबान ने उनके बाहर निकलने में मदद की और उनको हवाई अड्डे तक सुरक्षा कवच देकर पहुँचाया.
ये ख़बर दुनिया की जानीमानी फ़्रांसीसी समाचार एजेंसी AFP ने छापी है.
हुआ ये कि अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद भारतीय दूतावास में खलबली मच गई. जिस वक़्त ये मालूम पड़ा कि हवाई अड्डे तक पहुँचने के रास्ते पर तालिबान मौजूद हैं तो हौसले और पस्त हो गए. दूतावास वाले मुहल्ले में भी तालिबान ही तालिबान मौजूद थे.
घबराहट की वजह ये भी थी कि भारत शुरू से ही तालिबान विरोधी रहा है. बयालीस साल पहले जब सोवियत यूनियन अफ़ग़ानिस्तान में घुसा था तो भारत कम्युनिस्टों के साथ था. जब सोवियत संघ का पिट्ठू राष्ट्रपति नजीबुल्लाह अफ़ग़ानिस्तान पर राज कर रहा था तो भारत उसके साथ था. जब तालिबान आया था तो भारत अफ़ग़ानिस्तान छोड़ गया था. जब 2001 में अमेरिका ने तालिबान को भगा दिया था तो फिर भारत अफ़ग़ानिस्तान लौट आया था. अब जब तालिबान दोबारा आया है तो भारत ने फटाफट अपना दूतावास फिर बंद करने का फ़ैसला कर लिया.
कल दूतावास के अंदर डेढ़ सौ से ज़्यादा लोग फंसे थे, जिनमें AFP का रिपोर्टर भी था जिसने बाद में ये ख़बर लिखी. सभी अधिकारियों के चेहरे पर हवाइयाँ थीं. मरता क्या न करता. इन अधिकारियों ने तालिबान से संपर्क किया और उनसे निवेदन किया कि वो भारतीयों को एयरपोर्ट तक जाने में मदद दें.
फिर क्या था. पलक झपकते ही हथियार से लैस दर्जनों तालिबान भारतीय दूतावास के बाहर जमा हो गए. ज्यों ही क़रीब दो दर्जन गाड़ियाँ दूतावास के कर्मचारियों और उनके परिवार वालों को लेकर निकलीं बाहर खड़े तालिबान उनकी ओर देखकर मुस्कराए और हाथ हिलाकर "वेव" करने लगे. भारतीय क़ाफ़िले के साथ तालिबान भी अपनी गाड़ियों में चल पड़े.
एयरपोर्ट सिर्फ़ पाँच किलोमीटर दूर था लेकिन पूरा रास्ता जाम था, हज़ारों अफ़ग़ान एयरपोर्ट जाने की कोशिश कर रहे थे. इतनी ज़रा सी दूरी तय करने में भारतीय क़ाफ़िले को पाँच घंटे लग गए. जगह जगह तालिबान की दूसरी टुकड़ियों ने चेक-प्वाइंट लगा रखे थे. AFP के रिपोर्टर के मुताबिक़ कई बार जब भीड़ बहुत अधिक हो जाती थी तो भारतीय क़ाफ़िले के सुरक्षा कवच बने तालिबान अपनी गाड़ियों से उतर कर हवाई फ़ायर कर दे रहे थे जिससे कि भारतीय क़ाफ़िले को आगे बढ़ने में मदद हो सके.
भारतीय क़ाफ़िला जब एयरपोर्ट पहुँच गया तब तालिबान वापस लौट गए.


