सरगुजा

स्कूलों में अनिवार्य प्रार्थना नियमों पर पुनर्विचार की मांग
15-Jun-2026 9:48 PM
स्कूलों में अनिवार्य प्रार्थना नियमों पर पुनर्विचार की मांग

कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने शिक्षा मंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का दिया हवाला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अंबिकापुर, 15 जून। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सरकारी एवं निजी स्कूलों में दैनिक प्रार्थना गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग को लेकर कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने सोमवार को सरगुजा कलेक्टर के माध्यम से शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

 ज्ञापन में कहा गया है कि स्कूलों के लिए जारी की गई दैनिक प्रार्थना संबंधी व्यवस्था एक धर्म विशेष की धार्मिक आस्थाओं पर आधारित प्रतीत होती है, जो देश की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है।

कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रशीद अहमद अंसारी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में सरकार से उक्त आदेश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया। रशीद अंसारी ने कहा कि वर्तमान समय में पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

 उन्होंने आरोप लगाया कि इन मूलभूत समस्याओं के समाधान के बजाय स्कूलों को साम्प्रदायिक राजनीति का माध्यम बनाया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस अवसर पर अंबिकापुर शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह धंजल ने कहा कि देश के बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा को धार्मिक और राजनीतिक प्रभावों से दूर रखते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष मो. इस्लाम, राजू बाबरा, पापिन्दर सिंह विखु, लुकस एक्का, अजय अरुण मिंज, जेनेबिब कुजूर, रूबी जैन, शिफ्तीन रजा, शकीला सिद्दीकी, विजय बेक, अली सहित कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ और संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


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