सरगुजा

दिल्ली के जनजाति समागम में सरगुजा संभाग से पहुंचे 5 हजार प्रतिनिधि जनजातीय अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का उठाया मुद्दा
15-Jun-2026 4:13 PM
दिल्ली के जनजाति समागम में सरगुजा संभाग से पहुंचे 5 हजार प्रतिनिधि जनजातीय अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का उठाया मुद्दा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अंबिकापुर, 15 जून। जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा रविवार को उरांव समाज भवन, पटेलपारा अंबिकापुर में प्रेस वार्ता आयोजित कर दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजाति समागम-2026 की जानकारी साझा की गई। प्रेस वार्ता में मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेशराम भगत, प्रांत संयोजक रोशन प्रताप सिंह, सह संयोजक इंदर भगत, जिला संयोजक बिहारीलाल उरांव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में 24 मई को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित जनजाति समागम-2026 में देशभर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के लाखों लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग से भी लगभग 5 हजार जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

उन्होंने बताया कि अंबिकापुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, रायगढ़, कोरबा और जशपुर जिलों से पहुंचे समाजजनों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और सांस्कृतिक पहचान के साथ समागम में भाग लिया। दिल्ली में विभिन्न स्थानों से निकली विशाल शोभायात्राएं लाल किला मैदान पहुंचीं, जहां देश के अलग-अलग राज्यों की जनजातीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रहे। उन्होंने जनजातीय समाज की संस्कृति, आस्था, जल-जंगल-जमीन से जुड़ी जीवनशैली और प्रकृति संरक्षण में उसकी भूमिका को भारत की सांस्कृतिक धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भविष्य में जनजातीय समाज के महाकुंभ के रूप में याद किया जाएगा।

मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि जनजाति समागम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं था, बल्कि जनजातीय समाज की पहचान, परंपरागत आस्था और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का मंच भी बना। उन्होंने मांग की कि अनुसूचित जनजाति की स्पष्ट वैधानिक परिभाषा तय की जाए तथा धर्मांतरण के बाद पारंपरिक जनजातीय संस्कृति और जीवन-पद्धति का परित्याग करने वाले व्यक्तियों के संबंध में स्पष्ट संवैधानिक व्यवस्था बनाई जाए।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि जनजाति सुरक्षा मंच इस विषय को लेकर पिछले दो दशकों से अभियान चला रहा है। वर्ष 2009-10 में देशभर के 26 राज्यों के 26 हजार से अधिक गांवों से 27.67 लाख हस्ताक्षर एकत्र कर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद भी विभिन्न माध्यमों से अभियान जारी है।

मंच के प्रतिनिधियों ने बताया कि 28 मई 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर जनजातीय समाज से जुड़े विधिक एवं संवैधानिक मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल ने अनुसूचित जनजाति की परिभाषा, संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश 1950 में आवश्यक संशोधन तथा जनजातीय सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग रखी।

मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यह विषय केवल आरक्षण या कानूनी व्याख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों जनजातीय लोगों की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की।

प्रेस वार्ता के अंत में जनजातीय संस्कृति, परंपरागत आस्था, संवैधानिक अधिकारों एवं सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प व्यक्त किया गया।


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