सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
लखनपुर, 14 मई। सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलदगी के खुटेनपारा में सडक़ और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। वर्षों बीत जाने के बाद भी ग्रामीण बेहतर सडक़ और पेयजल व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बरसात पूर्व सडक़ निर्माण एवं पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार लखनपुर से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित बेलदगी ग्राम के खुटेनपारा में करीब 20 से 30 परिवार निवासरत हैं। यहां से ग्राम कोसंगा होते हुए केंवरी और मैनपाट जाने के लिए कच्चा एवं पगडंडी मार्ग है, जिसकी हालत बरसात के दिनों में अत्यंत खराब हो जाती है। रास्ते में कीचड़ भर जाने से लोगों का आवागमन प्रभावित होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी होती है, जिसके कारण कई अभिभावक बरसात के दौरान बच्चों को महीनों तक स्कूल नहीं भेज पाते और उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
ग्रामीणों ने बताया कि सडक़ निर्माण को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधियों, सचिव तथा संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों ने सडक़ निर्माण और पेयजल व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन चुनाव के बाद समस्या जस की तस बनी हुई है।
क्षेत्र में पेयजल संकट भी गंभीर रूप ले चुका है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगे बोरवेल का पंप असामाजिक तत्वों द्वारा चोरी कर लिया गया था। इसकी सूचना थाने में भी दी गई, लेकिन अब तक न तो चोरी का खुलासा हो सका और न ही बोरवेल की मरम्मत हो पाई। परिणामस्वरूप पिछले तीन महीनों से ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि एक अन्य बोरवेल का स्टार्टर निजी मकान में लगा होने के कारण पानी भरने को लेकर आए दिन विवाद की स्थिति निर्मित होती है। मजबूरी में लोगों को करीब तीन किलोमीटर दूर केंवरी गांव से पानी लाना पड़ रहा है। वहीं कई हैंडपंप खराब पड़े हैं तथा नल-जल योजना भी मोटर चोरी के बाद बंद पड़ी हुई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात शुरू होने से पहले सडक़ निर्माण कार्य कराया जाए तथा पेयजल व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। फिलहाल खुटेनपारा के ग्रामीण सडक़ और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष करने को मजबूर हैं।


