सरगुजा

भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को तोडऩे की साजिश, ऐसे लोगों से रहें सावधान- रामलखन सिंह पैकरा
06-May-2026 10:43 PM
भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को तोडऩे की साजिश, ऐसे लोगों से रहें सावधान- रामलखन सिंह पैकरा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अंबिकापुर, 6 मई। जनजाति गौरव समाज के प्रदेश महामंत्री रामलखन सिंह पैकरा ने आदिवासी समाज को दिग्भ्रमित करने वाले तथाकथित षडय़ंत्रकारी तत्वों से सतर्क रहने की अपील की है।

 उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज में भ्रम फैलाकर आपसी भाईचारे को तोडऩे की कोशिश कर रहे हैं, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पैकरा ने कहा कि आदिकाल से भारत में रहने वाले सभी समुदायों ने आपसी सौहार्द और भाईचारे की परंपरा को अपनाया है। विशेष रूप से जनजाति समाज की संस्कृति और परंपराएं न केवल भारत बल्कि विश्वभर में सम्मानित हैं।

उन्होंने कहा कि जनजाति समाज के संतों और महापुरुषों जैसे महारानी दुर्गावती, भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, तिलका मांझी, संत गहिरा गुरु और पद्मश्री माता राजमोहनी देवी ने कभी अलग धर्म कोड की मांग नहीं की। ये सभी महापुरुष समाज और देश की एकता के पक्षधर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें और उनके सहयोगी समाज को भ्रमित कर आपसी भेदभाव पैदा करना चाहते हैं, ताकि देश की एकता कमजोर हो। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर आंदोलन और प्रदर्शन कर समाज को भटकाने की कोशिश की जा रही है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे जाति-पाति और धर्म से ऊपर उठकर महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलें तथा शिक्षा, आर्थिक विकास, खेती-किसानी और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दें।

पैकरा ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के रूप में समाज की पहचान स्पष्ट है और इसे लेकर किसी तरह के भ्रम में आने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समाज से एकजुट रहने और विभाजनकारी तत्वों से दूरी बनाए रखने का आह्वान किया।


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