सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददात
अंबिकापुर, 21 अप्रैल। शहर के चोपड़ापारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी के विरुद्ध की गई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने स्कूल शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा और दबाव में लिया गया निर्णय बताया है।
कैलाश मिश्रा ने बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा 5 जून 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर स्कूल संचालन की जानकारी देने के साथ ही मान्यता संबंधी मार्गदर्शन मांगा गया था। इसके बावजूद विभाग ने करीब 10 महीनों तक आवेदन पर कोई पहल नहीं की। ऐसे में अचानक स्कूल संचालन स्थगित करने और एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाने का आदेश जारी किया जाना समझ से परे है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जारी आदेश में स्कूल प्रबंधन द्वारा अपनी गलती स्वीकार किए जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि जांच प्रतिवेदन में ऐसी कोई स्वीकारोक्ति दर्ज नहीं है।
कैलाश मिश्रा के अनुसार जांच रिपोर्ट में स्कूल की अधोसंरचना, मानव संसाधन और बच्चों की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को संतोषजनक और बेहतर बताया गया है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब व्यवस्थाएं उचित पाई गईं, तो कठोर कार्रवाई किस आधार पर की गई।
कैलाश मिश्रा ने यह भी दावा किया कि यह कार्रवाई कलेक्टर के अनुमोदन के बिना की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है। उन्होंने मामले में पारदर्शिता लाने के लिए पुनर्विचार की मांग करते हुए यह भी पूछा कि आखिर 10 महीनों तक विभाग ने आवेदन पर कोई निर्णय क्यों नहीं लिया।
उन्होंने बताया कि संबंधित संस्थान केवल एक स्कूल ही नहीं, बल्कि डे-केयर सेंटर के रूप में भी कार्यरत था, जहां कामकाजी अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण में छोडक़र निश्चिंत होकर कार्य पर जाते थे। अचानक हुई कार्रवाई के बाद ऐसे अभिभावकों के सामने बच्चों की देखभाल को लेकर नई समस्या खड़ी हो गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाई की पुनरावृत्ति न हो।ा


