सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,19 अप्रैल। सरगुजा जिले के ग्रामीण क्षेत्र सुलपगा गांव में एक अनोखी शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां परंपराओं से हटकर दुल्हन पक्ष बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंचा और विवाह के बाद दूल्हे की विदाई कर उसे दुल्हन के घर ले जाया गया। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।
जानकारी के अनुसार, मसी परंपरा के तहत देवमुनि एक्का और बिलासुस बरवा का विवाह संपन्न हुआ। इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि दुल्हन स्वयं बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची और पारंपरिक कन्यादान की जगह ‘वरदान’ की रस्म निभाई गई। विवाह संपन्न होने के बाद जब दूल्हे की विदाई हुई तो वह भावुक होकर फूट-फूट कर रोने लगा, जो लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना रहा।
दुल्हन के पिता मोहन एक्का ने बताया कि उनके परिवार में चार बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है। ऐसे में परिवार के सहारे के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया कि दूल्हे को घर जमाई बनाकर अपने घर लाया जाए। उन्होंने कहा कि भले यह परंपरा समाज के लिए नई हो, लेकिन उनके परिवार के लिए यह आवश्यक निर्णय था।
लडक़े पक्ष की ओर से उर्मिला बरवा ने बताया कि यह उनके परिवार के लिए भी पहली बार का अनुभव है, जब बारात लडक़ी पक्ष से आई और दूल्हा घर जमाई बनकर लडक़ी के घर गया। वहीं बारात में शामिल महेश तिर्की ने बताया कि लडक़ी के घर में कोई बेटा नहीं होने के कारण परिवार के सहारे के लिए यह निर्णय लिया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समुदाय में विवाह के बाद ‘चुमान’ नामक परंपरा भी निभाई जाती है, जिसमें बाद में लडक़े पक्ष की ओर से दहेज दिया जाता है। इस अनोखी शादी और दूल्हे की विदाई की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


